Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

आये हैं जो भी बापू के दर पे

आये हैं जो भी बापू के दर पे
पाये हैं सब वो जाये न खाली
सवाँरे हैं किस्मत जिसकी इन्होने
हाथों में अपने डोरी सँभाली

यही तन मन में बसते
दिखाए हमको रस्ते -2
इन्ही का नूर सबमें
न इनसा कोई जग में
जब भी है डोले, नैया भँवर में
गुरुवर ने आकर, झट से बचाली
यही सबका सहारा
न इनके बिन गुजारा
इन्ही की पावन दृष्टि
इन्ही से रोशन सृष्टि
जीवन हमारा है इक बगिया -2
बापू हमारे बगिया के माली
ज्ञान का है समंदर
यही बाहर व अन्दर -2
है तीर्थ इनका ये दर
झुका लो अपना ये सर -2
इनकी शरण में, आके है लगता
जैसे कि सारी खुशियाँ है पाली
न इनसे दूर होना
पड़ेगा हमको रोना
इन्ही का आसरा है
ये धरती आसमाँ
माँगे बिना ही, करते है बापू
भक्तों पे अपने रहमत निराली
यही भव से है तारे
सभी के कष्ट निवारे
न इनसे साथी कोई
जगा दे शक्ति सोई
आज्ञा में इनकी, जो भी है रहता
उसने तो अपनी बिगड़ी बना ली

इन्ही का प्यार निश्छल
इनके दीदार निर्मल
इन्ही की शरण में सुख है
मिटाते सबके दुख हैं
सुधरे है जीवन, जिसपे इन्होने
अपनी निराली नजरें हैं डाली
आए है जो भी बापू के दर पे
पाए है सब वो जाए न खाली
ये सुख दुख से परे हैं
ये सच्चे और खरे हैं
जो इनका ध्यान धरे है
वही भव से तरे है
बड़भागी है, जिसने भी अपनी
गुरु चरणों में भक्ति बढ़ा ली
ये सूरज चाँद सितारे
नही है इनसे प्यारे
इन्ही की छवि है प्यारी
यही केशव मुरारी
करते उजाला, ज्ञान से अपने
चाहे हो कितनी, राते ये काली
कभी ये साथ न छोड़े
न नाता हमसे तोड़े
यही तो सबके खुदा है
न होते हमसे जुदा है
चाहत न रहती, लौकिक सुखों की
जिसने भी इनमें, वृत्ति टिकाली
फ़ँसे मझधार में थे
टिके संसार में थे
न था कोई भी साहिल
न दिखती थी हमें मंजिल
डुबे कभी ना, तकदीर उसकी
जिसने गुरु साये में पनाह ली

कही है धुप तो छाया
ये कैसी इनकी माया
मिला जो इनका साया
लगे सब कुछ है पाया
श्रद्धा से जो भी, शरण में आता
उसने तो अपनी किस्मत जगा ली
इनकी कृपा से, भक्तों ने अपने,
दुख-दोषों की शमां बुझा ली
ये देते दुर्लभ दीक्षा
सार है इनकी शिक्षा
यही सबसे है न्यारे
सदा है साथ हमारे
पाये हैं शांति, मुक्ति व तृप्ति
जिसने भी इनसे प्रीति लगाली
ये भटकों का ठिकाना

ये सबका आशियाना

इन्हें सब कुछ है माना

इन्ही का प्यार है पाना

पूरी है होती उसकी मुरादें

जिसने हृदय में मूरत बसा ली

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