Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

तुलसी माता की आरती



ॐ जय तुलसी माता,जय तुलसी माता
सब जग की सुख दाता, जय तुलसी माता ।।
ॐ जय तुलसी माता...

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर।
रुग्ण से रक्षा करती, माँ तू भव त्राता।।
ॐ जय तुलसी माता...

बटु पुत्री हे श्यामा, सुर बल्ली ग्रामा।
विष्णु प्रिये जो सेवे, सो नर तर जाता।।
ॐ जय तुलसी माता...

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से वंदित।
पतित जनो की तारिणी, तुम हो विख्याता।।
ॐ जय तुलसी माता...

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन।
मानवलोक तुम्ही से, सुख संपति पाता।।
ॐ जय तुलसी माता...

हरि को तुम अति प्यारी, श्यामवरण तुम्हारी।
पावन प्रेम हैं प्रभु का, भक्तों से नाता।।
ॐ जय तुलसी माता...

सब जग की सुख दाता, जय तुलसी माता ।।
ॐ जय तुलसी माता...

उलझ मत दिल बहारों में

उलझ मत दिल बहारों में ,बहारों का भरोसा क्या
सहारे टूट जाते है,सहारों का भरोसा क्या

तमन्नायें जो तेरी है फुहारे है ये सावन की
फुहारे सूख जाती है फुहारों का भरोसा क्या

दिलासे जो जहाँ के है,सभी रंगी बहारें है
बहारे रूठ जाती है,बहारों का भरोसा क्या

तू इन फूले गुब्बारों पर अरे दिल क्यों फ़िदा होता
गुब्बारे फूट जाते है,गुब्बारों का भरोसा क्या

तू सम -बल नाम का लेकर किनारों से किनारा कर
किनारे टूट जाते है किनारों का भरोसा क्या

तू अपनी अक्लमंदी पर विचारों पर न इतराना
जो लहरों की तरह चंचल विचारों का भरोसा क्या

परम प्रभू की शरण लेकर विकारों से सजग रहना
कहाँ कब मन बिगड़ जाए विकारों का भरोसा क्या

उलझ मत दिल बहारों में ,बहारों का भरोसा क्या
सहारे टूट जाते है,सहारों का भरोसा क्या


तोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा सो जायेगा

तोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा सो जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा
धन दौलत और रिश्ते नाते सब पल में छुट जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा।।धृ।।

जिनको तू अपना कहता है,ये न तेरे अपने है
तू रही है जीवन पथ का,ये सब सारे सपने है
टूटेगा जब सपना तेरा,सब अपना हो जायेगा
एक दिन ऐसा आयेगा....

जबसे जग को अपना समझा, जबसे रब को भूल गया
जन्मों से तू आता रहा हर बार गर्भ में झूल गया
अब भी वक्त है सुन ले बन्दे बाद में तू पछतायेगा
एक दिन ऐसा आएगा....

बचपन तेरा बीत गया और जाती तेरी जवानी है
ये जीवन तो कलकल बहता एक नदिया का पानी है
हाथ गुरु का थाम ले वरना बीच भवर डुब जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा....

नही जायेगा लख चौरासी जिसने गुरु को पाया है
बड़भागी है  गुरु संग जिसने जीवन सफल बनाया है
गुरुचरणों से प्रीती कर ले अंत गुरु में समाएगा
एक दिन ऐसा आएगा....

तोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा सो जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा
धन दौलत और रिश्ते नाते सब पल में छुट जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा....


ओ सतगुरु प्यारे अपना हमें बना ले

ओ सतगुरु प्यारे अपना हमें बना ले
चरणों में अब लगा ले।।धृ।।

तुम बिन नही है कोई सुध -बुध जो ले हमारी
है खूब खोज देखा मतलब की दुनिया सारी
धोखे के जाल से अब भगवन हमे छुड़ा ले
चरणों में अब लगा ले

कोई नही है संगी,दिन चार के है मेले
सम्बन्ध इस जगत के सब झूठ के झमेले
तू ही न बाह पकड़े तो कौन फिर संभाले
चरणों में अब लगा ले

सत् और असत् का भी भगवान ज्ञान दे दे
अभिलाषा अब ये है,भक्ति का दान दे दे
हम प्रेम के है प्यासे ,दे प्रेम के प्याले
चरणों में अब लगा ले

कृपा से अब मिटा दे दुःख दर्द गम बखेड़ा
बस एक नजर से तेरी हो जाये पार बेडा
भव सिंधु है भयानक,दासों को अब तरा ले
चरणों में अब लगा ले

ओ सतगुरु प्यारे अपना हमें बना ले
चरणों में अब लगा ले





जब जब युग परिवर्तन होता हर युग में अवतारा है

जब जब युग परिवर्तन होता,हर युग में अवतारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है
गुरु चरणों में शीश झुकाया,ये सौभाग्य हमारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है।।धृ।।


मै तो काशी गया ,मैं तो मथुरा गया,
गुरु दर सा न कोई सहारा मिला
रब प्यारा लगे,जग भी प्यारा लगे
गुरुवर जैसा न कोई प्यारा मिला
गुरु चरणों में मेरा मन्दिर,मस्जिद,और गुरुद्वारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है

गुरु माता मेरे,गुरु पिता मेरे,
गुरु बन्धु ,गुरु मेरी आत्मा
गुरु भक्ति मेरी,गुरु शक्ति मेरी
गुरु जीवन मेरे परमात्मा
कण कण में गुरु तत्व समाया
जग की जीवन धारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है

जग के स्वामी मेरे,अंतर्यामी मेरे
हर पल हर घडी तेरा दीदार हो
एक रहमत करो हे दयालु मेरे
मौत आये वहाँ जो गुरुद्वार हो
गुरुवर ज्ञान का दीप जलाये
गुरुवर से उजियारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है

जब जब युग परिवर्तन होता,हर युग में अवतारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है
गुरु चरणों में शीश झुकाया,ये सौभाग्य हमारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है।

जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे

जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे
चौरासी से चल रही तेरी भागमभाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे।।धृ।।

बचपन बीता खेल कूद में जग में मौज मनाई है
धन को जोड़ा तन को जोड़ा जबसे जवानी आई है
जाये जवानी आये बुढ़ापा फिर भी जग में सोया है
धिक्कारे है दुनिया उसको व्यर्थ में जीवन खोया है
मौत से पहले अमृत पी ले काल है विषधर नाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे...

भूल गया तू उसको जिसने गर्भ में तुझे खिलाया है
तेरी राह में माँ के तन से जिसने दूध बहाया है
जल अग्नि और अन्न पवन सब तेरे लिए बनाये है
तुझपे अमृत वर्षा करने गुरु रूप में आए है
गुरुचरणों में आजा बन्दे जागे सोये भाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे....

तन भी छूटा धन भी छूटा छोड़ जगत ये जायेगा
खाली हाथ से आया था और खाली हाथ से जायेगा
मोह माया और धन दौलत में फिर क्यों जीवन खोता है
तूही ब्रम्ह का अंश सनातन फिर काहे को रोता है
अब भी वक्त है हाथ में तेरे फिर लग जाये आग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे....





गुरुवर की रहमत से बन्दे

गुरुवर की रहमत से बन्दे ,जग बन्धन सब टूटे
गुरु का प्यार न रूठे,गुरु दरबार न छूटे।।धृ।।

गुरु चरणों से गंगा यमुना निशदिन बहती जाए
गुरु उदर में सात समन्दर दशो दिशा समाए
गुरु हृदय में ब्रम्हा विष्णु,गुरु महिमा को गाए,
गुरु कंठ से ब्रम्ह ज्ञान की नित वर्षा बरसाए
गुरुवर से है रिश्ता सच्चा,बाकि सब है झूठे
गुरु का प्यार न रूठे....

रोम रोम गुरुवर का तीरथ, आँखें सूरज चन्दा
गुरुमुख से अमृत बरसे,छूटे यम का फंदा
गुरु नाम को जप ले प्यारे,गुरु में सब है समाया
राम तभी भगवान कहाए जब वशिष्ठ को पाया
गुरु कृपा सब कुछ दे देती ,माया सब को लूटे
गुरु का प्यार न रूठे...

ईश कृपा मुझपे बरसी तो गुरुदेव को पाया
जैसे सूरज की गर्मी में मिल गयी शीतल छाया
गुरुवर के संतोष मात्र से आत्मज्ञान मिल जाए
गुरुकृपा जो बरस गयी तो भवसागर तर जाए
गुरु ॐ गुरु ॐ जपते जाओ ,लख चौरासी छूटे
गुरु का प्यार न रूठे...

गुरुभक्ति है जिसने पायी उसका बेडा पार है
धन्य हुई ये धरती माता धन्य हुआ संसार है
गुरु मिल जाये सब मिल जाये,बिन सतगुरु ना कोई
मात पिता सुत बान्धव ये सब हर घर घर में होई
ब्रम्ह ज्ञान का रूप है गुरुवर ,नित्य है एक अनूठे
गुरु का प्यार न रूठे....

गुरुवर की रेहमत से बन्दे ,जग बन्धन सब टूटे
गुरु का प्यार न रूठे,गुरु दरबार न छूटे...

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दीप जलाकर ज्ञान के

दीप जलाकर ज्ञान के,दूर करो अंधकार
समता,करुणा,स्नेह से भरो दिल के भण्डार
दिप जलाकर ज्ञान के...

राग द्वेष ना मोह हो हमको,दूर हो विषय विकार
कर उपकार उनपर सदा,जो दीन हीन लाचार
दिप जलाकर ज्ञान के....

हरदम रहता साथ सदा वो,फिर भी है निःसंग
तन मन पावन हो जाता है,पी जब नाम की भंग
दिप जलाकर ज्ञान के...

लीन हुआ चित् नाम नशे में,पाया प्रेम का सार
निज आनंद में मस्त रहे मन,सपना ये संसार
दिप जलाकर ज्ञान के...

वन में तू खोजे ईश कहाँ है,साहिब सब के संग
स्व से मिलने की दिल में जागे तीव्र तरंग
दिप जलाकर ज्ञान के...

भेद भरम संशय को मिटाकर छूट गया अहंकार
रोम रोम में छा गयी है हरि रस की खुमार
दिप जलाकर ज्ञान के...

पा लिया मन के मन्दिर में दिलबर का दीदार
छलका दरिया आनंद का,खुला जो दिल का द्वार
दिप जलाकर ज्ञान के...

मन बुद्धि वाणी से परे है ना रूप रंग आकार
साक्षी सद्गुरु वेश में मेरे प्रभु आये साकार
दिप जलाकर ज्ञान के...

दीप जलाकर ज्ञान के,दूर करो अंधकार
समता,करुणा,स्नेह से भरो दिल के भण्डार
दिप जलाकर ज्ञान के...



आओ प्रेम से गुरु चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ाये हम

आओ प्रेम से गुरु चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम
तन मन सब अर्पण कर गुरु को उनके ही हो जाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

कृपा सिंधु है बापू अपने,सबका मंगल करते है
जो भी आता शरण में इनकी,सबका दुःख ये हरते है
सद्गुरु जी की कृपा दृष्टि से भव सागर तर जाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

ये संसार है सपने जैसा,मिथ्या खेल यहाँ सारा
जो इसमें आसक्त हुआ वो जीवन की बाजी हारा
तारणहार गुरु ही केवल इनकी शरण में जाए हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

विषयों से अपना मन मोड़ो,ये तो है अति दुःखदायी
दिल के तार प्रभु से जोड़ो,परम सुहृद वे सुखदायी
भजन और चिंतन से प्रभु की सात्विक भक्ति पाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

अहंकार और राग द्वेष से मन को शांति नही मिलती
बिना शांति के प्रभु प्रेम की कली हृदय में नही खिलती
जीव मात्र को अपना समझे,अपने प्रिय को पाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

आओ प्रेम से गुरु चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम
तन मन सब अर्पण कर गुरु को उनके ही हो जाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

आ जाओ हे दयालु गुरुवर देर न हो अब आने को

आ जाओ हे दयालू गुरुवर ,देर न हो अब आने को
आँखें मेरी तरस गयी है,गुरुवर दर्शन पाने को
आ जाओ हे दयालू गुरुवर ,देर न हो अब आने को।।धृ।।

जब जब गुरुवर याद है आते,आँख मेरी भर आये
मुख से कुछ ना बोल सकु मैं, दिल रोता ही जाए
लख चौरासी रोता आया,भूल गया मुस्काने को
आँखें मेरी तरस गयी है,गुरुवर दर्शन पाने को
आ जाओ हे दयालू गुरुवर ,देर न हो अब आने को

त्रेता में राम बने हो,हर मर्यादा निभायी
द्वापर में तुम कृष्ण कन्हैया ,प्रेम की मुरली बजाई
आपके बाग़ का छोटा फूल हूँ,आ जाओ महकाने को
आँखें मेरी तरस गयी है,गुरुवर दर्शन पाने को
आ जाओ हे दयालू गुरुवर ,देर न हो अब आने को

ऐसा लगा गुरु दर पे मैंने जब गुरु दर्शन पाए
लाखों बरस के प्यासे को अमृत सागर मिल जाए
भटक गया गुरुवर मैं जग में,राह मिले अनजाने को
आँखें मेरी तरस गयी है,गुरुवर दर्शन पाने को
आ जाओ हे दयालू गुरुवर ,देर न हो अब आने को

कल- कल में मैंने जीवन खोया ,जीवन की हो श्याम
श्याम से पहले मुझको जाना गुरुवर के निज धाम
आये हो तो मेरे गुरुवर ना कहना अब जाने को
आँखें मेरी तरस गयी है,गुरुवर दर्शन पाने को
आ जाओ हे दयालू गुरुवर ,देर न हो अब आने को

जिस सरिता से बेहता सुधारस,वो गुरु अमृतवाणी
जिस ज्योति से मोह विनाशे, वो ज्योति है जगानी
अँधियारा छाया है गुरुवर,आओ ज्योत जलाने को
आँखें मेरी तरस गयी है,गुरुवर दर्शन पाने को
आ जाओ हे दयालू गुरुवर ,देर न हो अब आने को

ॐ हरि ॐ ,हरि ॐ, हरि ॐ.....

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गुरुदेव हमें तेरी बड़ी याद सताती है

गुरुदेव हमें तेरी बड़ी याद सताती है
एक पल की जुदाई भी हमको तड़पाती है ।।धृ।।

तुम ब्रम्हा विष्णु हो,तुम शंकर हो गुरुवर
तेरा नाम जपे राधा ,कृष्णा भी गाते है
गुरुदेव हमें तेरी...

तुम ज्ञान के दाता हो,वेदों के ज्ञाता हो
हम भक्तन को तुमसे मुक्ति मिल जाती है
गुरुदेव हमें तेरी...

हरि ॐ का तुमने ही प्रचार किया गुरुवर
इस नाम को जप करके दुनिया तर जाती है
गुरुदेव हमें तेरी...

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गोविन्द हरे गोपाल हरे

गोविन्द हरे गोपाल हरे
जय केशव माधव श्याम हरे
गोविन्द गोविन्द गोपाला
गोविन्द गोविन्द गोपाला।।धृ।।
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

जय मुरली माधव श्याम हरे
जय जय प्रभु दीन दयाल हरे
जय कृष्ण हरे गोविन्द हरे
जय जय गिरिधर गोपाल हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

जय राम हरे जय कृष्ण हरे
जय मुरलीधर घनश्याम हरे
मनमोहन सुंदर श्याम हरे
घनश्याम हरे राधेश्याम हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे....

श्री राधे  राधे कृष्ण हरे
जय कुंज बिहारी श्याम हरे
हे सर्वेश्वर हे परमेश्वर हे योगेश्वर
श्री कृष्ण हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

जय राम हरे जय कृष्ण हरे
जय मुरलीधर घनश्याम हरे
मनमोहन सुंदर श्याम हरे
घनश्याम हरे राधे श्याम हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

श्री राधे राधे कृष्ण हरे
जय कुंज बिहारी श्याम हरे
हे सर्वेश्वर हे परमेश्वर हे योगेश्वर
श्रीकृष्ण हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

गोविन्द हरे गोपाल हरे
जय केशव माधव श्याम हरे
जय मुरली माधव श्याम हरे
जय जय प्रभु दीन दयाल हरे
जय कृष्ण हरे गोविन्द हरे
जय जय गिरिधर गोपाल हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

जय राम हरे जय कृष्ण हरे
जय मुरलीधर घनश्याम हरे
मनमोहन सुंदर श्याम हरे
घनश्याम हरे राधेश्याम हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

श्री राधे राधे कृष्ण हरे
जय कुंज बिहारी श्याम हरे
हे सर्वेश्वर हे परमेश्वर हे योगेश्वर
श्रीकृष्ण हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

जय मुरली माधव श्याम हरे
जय जय प्रभु दीन दयाल हरे
जय कृष्ण हरे गोविन्द हरे
जय जय गिरिधर गोपाल हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

जय राम हरे जय कृष्ण हरे
जय मुरलीधर घनश्याम हरे
मनमोहन सुंदर श्याम हरे
घनश्याम हरे राधे श्याम हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...

श्री राधे राधे कृष्ण हरे
जय कुंज बिहारी श्याम हरे
हे सर्वेश्वर हे परमेश्वर हे योगेश्वर
श्रीकृष्ण हरे
गोविन्द हरे गोपाल हरे...
जय गोविन्द गोविंद गोपाला
जय गोविन्द गोविन्द गोपाला
जय गोविन्द गोविन्द गोपाला
जय गोविन्द गोविन्द गोपाला 
जय गोविन्द गोविन्द
जय गोविन्द गोविन्द
जय गोविन्द गोविन्द गोपाला
हरे कृष्ण हरे राम
हरे कृष्ण हरे राम
हरे कृष्ण हरे राम
हरे कृष्ण हरे राम
हरे कृष्ण हरे राम
हरे कृष्ण हरे राम
कृष्ण कृष्ण हरे राम
कृष्ण कृष्ण हरे राम
कृष्ण कृष्ण हरे राम
जय गोविन्द गोविन्द गोपाला....
हरे कृष्ण हरे राम
हरे कृष्ण हरे राम...
कृष्ण कृष्ण हरे राम
कृष्ण कृष्ण हरे राम...
जय गोविन्द गोविन्द गोपाला 
जय गोविन्द गोविन्द
जय गोविन्द गोविन्द
जय गोविन्द गोविन्द गोपाला...


पार लगावो भव से

पार लगावो भव से हरि मोहे
हरि मोहे पार लगावो
पार लगावो भव से
हो साँई मोहे पार लगावो भव से
हरि मोहे पार लगावो भव से ।।धृ।।

चंचल चित मोरा उड़त फिरत है
बाँधन चाहूँ नाहि बँधत है
हो साँई...हो साँई...
मोरा जियरा छुड़ावो भव से
पार लगावो....

भाँति भाँति की रस्सी बनाकर
बाँधा इन्द्रियों ने भरमाकर
हो साँई... हो साँई...
मेरा बंधन काँटो भव से
पार लगावो...

तुम सच्चे गुरु समरथ स्वामी
मैँ मूरख कामी अज्ञानी
हो साँई....हो साँई....
मोहे डूबता उबारो भव से
पार लगावो....

पार लगावो भव से
हो साँई मोहे पार लगावो भव से...

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औषधि कौन पिलावे

औषधि कौन पिलावे
औषधि कौन पिलावे
गुरु बिन औषधि कौन पिलावे ।।धृ।।

भव व्याधि यह बहुत सतावे
सुध बुध सारी भुलावे
गुरु बिन औषधि....

विषय विषम ज्वर अति घबरावे
तृष्णा प्यास बढ़ावे
गुरु बिन औषधि....

ऐसो कौन कृपालु जग में
आवागमन मिटावे
गुरु बिन औषधि....

आप भुला जग सब भुलावे
ऐसो काम न आवे
गुरु बिन औषधि....

होवे का मिल नबज दिखाऊँ
अमृत रंग पिलावे
गुरु बिन औषधि....

औषधि कौन पिलावे
गुरु बिन औषधि कौन पिलावे

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सत्संग की गंगा बहती है

सत्संग की गंगा बहती है
गुरुदेव तुम्हारे चरणों में  ।।धृ।।
फल मिलता है उस तीरथ का
कल्याण तुम्हारे चरणों में
सत्संग की गंगा....

मैं जनम जनम का भटका हुँ
तब शरण आपकी आया हुँ
इन भूले भटके जीवों का
कल्याण तुम्हारे चरणों में
सत्संग की गंगा....

दुनिया का दुःख मिटाते हो
देव दिव्य परखाते हो
सब आवागमन मिटाते हो
है मोक्ष तुम्हारे चरणों में
सत्संग की गंगा ....

एक बार जो दर्शन पाता है
बस आपका ही हो जाता है
क्या गुप्त तुम्हारी प्रीती है
हम धन्य तुम्हारे चरणों में
सत्संग की गंगा....

जनम का भूला शरण पड़ा
तब आयके द्वार तुम्हारे खड़ा
काँटों सकल बन्धन मेरा
निर्मल तुम्हारे चरणों में
सत्संग की गंगा....

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नर तन है बडा अनमोल

ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
नर तन है बडा अनमोल
तू समझ ले इसका मोल
प्रभू नाम तू मुख से बोल
अभिमान में युँ ना डोल

तुझे कहने समझने की 
प्रभू ने दी है शक्ति
ना व्यर्थ गवाँ जीवन
प्रभू की कर ले भक्ति
जाए युँ ही समय बीता
उठ नींद से अखियाँ खोल

जीने को युँ जीवन 
पशु पक्षी भी जीते है
क्या फर्क है फिर हम में
गर जन्म युँ जीते है
क्या खोया क्या पाया
इसको भी तराजू में तोल

इसकी उसकी बातों में
है क्या आनी जानी
अपने भीतर भी झाँक
क्यों करता है नादानी
प्रभू देख रहे है सबको
तेरी खुल जाएगी पोल

चुपचाप ये जीवनभर
करता है तू समझोता
बाहर से हँसता है
पर भीतर से रोता
कबतक तू बजाएगा
बेताला ये तो ढोल

क्या लेकर आया था
क्या लेकर जाएगा
कर ले ईश्वर का भजन 
सुख चैन तू पाएगा
सब माया का बंधन है
तू भूल ना अपना कौल
नर तन है.....


आज मेरे गुरु ने बतलाया

आज मेरे गुरु ने बतलाया
मुझको ये ही ज्ञान
ब्रम्ह है सब में एक समान
ब्रम्ह है सब में एक समान
ब्रम्ह एक अद्वैत रूप है
नही भेद स्थान
ब्रम्ह है सबमें.....

विद्या विनय युक्त ब्राम्हण में
गौ हस्ती अरु पशु पक्षिण मे 

वही आत्मा है श्वासन में 
वही रम रहा है हरिजन में
ये सब जग जगदीश रूप है
करो इसी का ध्यान
ब्रम्ह है सबमें.....

ना वो जन्मे ना वो मरता
ना वो जलता ना वो गलता
ना वो घटता ना वो बढ़ता
सदा एक ही रूप में रहता
अविनाशी निर्गुण निर्लेपि 
व्यापक उसको जान
ब्रम्ह है सबमें.....

मन से तो वो कथा न जावे
वाणी से भी कहा न जावे
सतगुरु अब कैसे समझावे
नेति नेति कह वह बतावे
खुद ही खुद को तुम पहचानो
ब्रम्ह है सबमे......



करुणा करो गुरुदेव रहमत करो गुरुदेव

करुणा करो गुरुदेव रहमत करो गुरुदेव
अब तो आ भी जाओ जल्दी आ भी जाओ ।।धृ।।
ऐसे ना रुलाओ जल्दी आ भी जाओ
दरश को तरसे ये नैना दिन कटे ना कटे ये रैना
देर ना लगाओ
अब तो आ भी जाओ....

तेरे सिवा मेरा कोई नही तुझसे ही मेरी जिंदगी
साँसों में हो तेरा सुमिरन साधना मेरी यही
तुम से शोहरत है हमारी तुम ही दौलत हो हमारी
तुमसे रौशन चाँद तारे हर ख़ुशी हर एक नज़ारे
हर ख़ुशी हर एक नज़ारे
लौट अब आओ
अब तो आ भी जाओ....

आ भी जाओ ना गुरूजी आ भी जाओ ना
युँ रुलाओ ना गुरूजी यूँ रुलाओ ना

हमको बस तेरी जरूरत दिल में ख्वाइश है तेरी
दरश बिन तेरे गुरुवर भीगी है अखियाँ मेरी
सूना लगता ये जहाँ है फीका लगता है हर समा है
यूँ ना तड़पाओ
अब तो आ भी जाओ.....

यूँ तो है जग में हजारों पर कोई तुमसा नही
तेरे दर पे जो है मिलता वो नही मिलता कहीं
तेरे कदमों में है जन्नत हमको है बस तेरी चाहत 
पास हरदम तुम रहोगे दिल ने माँगी है ये मन्नत
मान भी जाओ 
अब तो आ भी जाओ.....



दिल में प्रेम की ज्योत जलाई

दिल में प्रेम की ज्योत जलाई
दिल में प्रेम की ज्योत जलाई
गुरु से ऐसी प्रीत लगाई
मेरी प्रीत कभी ना टूटे
ऐसा वर दे दो

शबरी के घर आए थे
जूठे बेर जो खाए थे
भक्ति का वरदान दिया
उसका भी कल्याण किया
तेरा दर है सबसे प्यारा
तेरा दर है सबसे प्यारा
कर दो रेहमत साँई 
दिल में.....

मीरा को भी तार दिया
विषधर को भी हार किया
तुम सबके रखवारे हो
जग में सबसे प्यारे हो
तुम हो कृपा के सिंधु गुरुवर
तुम हो कृपा के सिंधु गुरुवर
कर दो रेहमत साँई
दिल में.....

साथ तेरा ये छूटे ना
मेरी श्रद्धा टूटे ना
गुरुवर का दीदार किया
मुझको भव से पार किया
खेल अजब है तेरा साँई
खेल अजब है तेरा साँई 
मोहे समझ ना आई
दिल में......

गुरुवर ही संसार है
गुरु ब्रम्ह का सार है
गुरुवर तारणहारे है
गुरु ही भव से तारे है
धन्य हुआ मैं इस जीवन में
धन्य हुआ मैं इस जीवन में
कर दो रेहमत साँई

                                                                                   

कृपा की एक नज़र गुरुवर

कृपा की एक नज़र गुरुवर 
हमारी ओर कर देना
मिटा कर मोह तम उर-दीप
में तुम ज्योति भर देना


बिना तेरी कृपा के नाव 
धारा में फँसी मेरी 
धारा में फँसी मेरी
पकड़ पतवार मंज़िल दूर
बेडा पार कर देना
कृपा की एक नज़र....


बहा दो प्रेम की गंगा
दिलों में प्यार का सागर
दिलों में प्यार का सागर
हमें आपस में मिल-जुलकर
प्रभू रहना सिखा देना
कृपा की एक नज़र....


हमारे ध्यान में आओ 
प्रभू आँखों में बस जाओ
प्रभू आँखों में बस जाओ
ह्रदय में भक्ति रस भरकर 
मन हरिमय बना देना
कृपा की एक नज़र.....


ये मन चंचल नही माने
फँसा भ्रम् जाल में तड़पे

फँसा भ्रम् जाल में तड़पे
लगाकर निज चरण में दास
तुम अपना बना लेना
कृपा की एक नज़र.....





जिस दिन गुरुजी तेरा दर्शन होगा

जिस दिन गुरुजी तेरा दर्शन होगा
उस दिन सफल मेरा जीवन होगा
तन मन मेरा तेरे पर जब अर्पण होगा
जिस दिन......

मेरे मन के मन्दिर में मैं तुझको बिठाउँगा
भाव भरे उपहार तेरे चरणों में चढ़ाऊँगा
असूअन की धारा से अर्चन होगा
उस दिन सफल मेरा जीवन होगा
जिस दिन.....

तेरा मेरा रिश्ता गुरूजी बहुत है पुराना
मुझको गुरूजी मेरे कभी ना भुलाना
ध्यान तेरा जब निशदिन होगा
उस दिन सफल मेरा जीवन होगा
जिस दिन......

जैसा भी कहोगे मुझको वैसा ही मंजूर है
दृष्टि दया की मेरे पर भरपूर है
तेरी कृपा से मन दर्पण होगा
उस दिन सफल मेरा जीवन होगा
जिस दिन.....



रे मन मस्त सदा दिल रहना




रे मन मस्त सदा दिल रहना
आन पड़े सो सहना
रे मन......
   कोई दिन कम्बल,कोई दिन अम्बर
   कब दिगंबर सोना
आत्म नशे में देह भुलाकर 
साक्षी होकर रहना
रे मन......
   कोई दिन घी गुड़ मौज उड़ाना
   कोई दिन भूख सहाना
   कोई दिन वाडी कोई दिन गाडी
कब मसान जगाना
रे मन.....
   कोई दिन खाट पलंग सजाना
   कोई दिन धूल बिछौना 
कोई दिन शाह बने शाहों के
कब फकीरा दीना
रे मन......
    कड़वा मीठा सबका सुनना 
    मुख अमृत बरसाना 
समझ सुख दुःख नभ-बादल सम
रंग-संग छुड़ाना
रे मन......


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गुरु भजन बिना मिले शांति नही









गुरु भजन बिना मिले शांति नही
जब तक दया दृष्टि नही होती
उनकी कृपा दृष्टि नही होती
जब तक होता ज्ञान नही
तब तक मिटती भ्रान्ती नही
गुरु भजन बिना……….

कई जन्मों से भटके है
इस मोह में फँस के अटके  है
जो सबसे ज्यादा अपने है
ये नजर उन्हें पहचानती नही
गुरु भजन बिना………..

गुरुदेव हमे न तड़पाओ
बुलवाओ हमे या खुद आओ
दर्शन को तरसती ये आँखें
तुम्हे देखे बिना अब मानती नही
गुरु भजन बिना……….

गुरु सब घट के वासी है
अजर अमर अविनाशी है
व्यर्थ है जीवन उनके बिना
रहे शरण बिना कोई क्रांती नही
गुरु भजन बिना……….


सद्गुरु तुम्हारे ज्ञान ने जीना सीखा दिया



सद्गुरु तुम्हारे ज्ञान ने जीना सीखा दिया
हमको तुम्हारे प्यार ने इंसा बना दिया...

रहते है जलवे आपके नजरों में हर घडी
मस्ती का जाम आपने ऐसा पिला दिया
सद्गुरु तुम्हारे ज्ञान ने.......

भूला हुआ था रास्ता,भटका हुआ था मै
रेहमत तेरी ने मुझको काबिल बना दिया
सद्गुरु तुम्हारे ज्ञान ने.......

जिसने किसी को आजतक सजदा नही किया
वो सर भी मैंने आपके दर पे झुका दिया
सद्गुरु तुम्हारे ज्ञान ने......

जिस दिन से मुझको आपने अपना बना लिया
दोनों जहाँ को दास ने कब से भुला दिया
सद्गुरु तुम्हारे ज्ञान ने......








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