Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा

कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा
हरि गोविंद गोविंद नारायणा ।।धृ।।

हरि नारायणा गुरु नारायणा
कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा
हरि गोविंद गोविंद नारायणा

तू जो भी करे सबका मंगल करे
तू ही जग तारणा है जदगीश्वरा
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

तू ही हरि रूप में तू ही गुरु रूप में
तू ही सब रूपों में समाया प्रभू
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

तू ही दीनदयाला तू ही भक्तकृपाला
तू ही मुरलीधरा है हे केशवा
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

गोविंद हरि बोलो गोपाल हरि बोलो
घनश्याम हरि बोलो मेरे राम हरि बोलो
गोविंद हरि बोलो गोपाल हरि बोलो...
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दरबार में सच्चे सदगुरू के

दरबार में सच्चे सद्गुरु के 
दुःखदर्द मिटाए जाते हैं
दुनिया के सताए लोग यहाँ 
सीने से लगाए जाते है

ये महफ़िल है मस्तानों की
हर शख्स यहाँ पर मतवाला
भर भर के जाम इबादत के 
यहाँ सबको पिलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

ऐ जगवालों क्यों डरते हो
इस डर पर शीश झुकानेसे
ऐ नादानों ये वह दर है
सर भेंट चढ़ाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

इल्जाम लगानेवालों ने
इल्जाम लगाए लाख मगर
ओ तेरी सौगात समझ करके
हम सिर पे उठाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

जिन प्यारों पर ऐ जगवालों 
हो खास इनायत सद्गुरु की
उनको ही संदेशा जाता है
और वो ही बुलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

रद्राष्टकम्

श्री रद्राष्टकम्
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।

निराकारमोङकारमूलं तुरीयं
गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारूगंगा
लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा।।

चलत्कुण्डलमं भ्रू सुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुंडमालं
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहमं भवानीपतिं भावगम्यं।।

कलातीत कल्याण कल्पांतकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानंन संदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं
भजंतीह लोके परे वा नराणाम्।।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।
जरा जन्म दुःखौध तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।

रूद्राष्टकमिदं प्रोक्तू विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।

इति श्री गोस्वामि तुलसीदास कृतं श्री रूद्राष्टकं सम्पूर्णम्।
ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ ॐ ॐ।।

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर बाँधी है जीवन डोर
दिल मेरा लगा ही रहता हर पल तेरी ओर।।धृ।।

नैनों के दर्पण में गुरुवर तुमको सदा ही देखूँ
क्या से क्या बनाते हो हर पल यहीं मैं सोचूँ
मन आँगन में अब तो बाबा नाचे है खुशियों के मोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...

तुमने ही चमकाया गुरूवर तकदीर का ये सितारा
नाज करूँ मैं भाग्य पे अपने पाकर तेरा ही सहारा
तेरी निगाहों में हमने देखी स्वर्णिम युग की भोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...

तेरी एक नजर में हम तो जन्मों के सुख पाएँ
तेरी ही महिमा के गुरूवर गीत सदा हम गाएँ
पाके अनोखा प्यार तेरा हम हो गए भाव विभोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...






न जाने कौनसे गुण पर

न जाने कौनसे गुण पर दयानिधी रीझ जाते है।।धृ।।

नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर भोग छिलकों का लगाते हैं॥
न जाने कौनसे गुण पर ..

न आये मधुपुरी से गोपियों की दु:ख व्यथा सुनकर।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारिका से दौड़े आते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

न रोये वन गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आँसू बहाते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ बिन्दु विधिहर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

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ओ सबकी अँखियों में नीर भरे

ओ सबकी अँखियों में नीर भरे
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
सबकी अँखियों में नीर भरे
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
ओ मैं तो तेरे ही द्वार पड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
सबकी अँखियों में नीर भरे...

तुमसा जोगी ना कोई पाया
तुमही से मैंने नेह लगाया
ओ मेरी प्रीत है तुमसे लगी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी ...

सुन लो मेरे जोगी सलोना
तुम बिन रह गया बस हमें रोना
ओ मेरी अँखियों की प्यास बढ़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

कृपा करो हम दास पे स्वामी
घट घट वासी अंतर्यामी
हो अब टूटे न श्रध्दा लड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

दर्शन से तेरे सुख हमें मिलता
सत्संग से आपके जीवन है खिलता
ओ बोलो आएगी कब वो घड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

आत्मज्ञान की बातें तुम्हारी
पुलकित होते है नर और नारी
ओ तेरी शान है सर्वोपरी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

तुमसा जोगी ना कोई प्यारा
तुम ही हो जीने का एक सहारा
हो अब तो तुमको ही माना हरि
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

चाहे जैसे मुझे रख लो,कुछ ना कहूँगा मैं

चाहे जैसे मुझे रख लो,कुछ ना कहूँगा मैं
तेरा ही था, तेरा ही हूँ ,तेरा रहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तुम्हारे नाम का मोती ही मेरी दौलत है
ये रूतबा और ये शोहरत भी तेरी बदौलत है
तू है सागर मैं हूँ कतरा, तुझ संग बहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

मेरा मन अब नही लगता है जग की बातों में
अपनी उँगली थमा दी मैंने तेरे हाथों में
जिस तरफ ले चलो मुझको वही चलूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

गम की राते लगे की जैसे सुख का सवेरा है
बस तू एक बार जो कह दे कि हाँ तू मेरा है
फिर तो हर एक सितम हँसकर ही सहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

जिसकी अटकी है जान तुझमें मैं वो परिंदा हूँ
तू मेरे साथ है इस आस पे मैं तो जिंदा हूँ
हमारी आस जो टूटी तो जी ना सकूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तेरे दर्शन को नैना तरसते

तेरे दर्शन को नैना तरसते 
सबकी अँखियों से नीर बरसते
अब तो आ भी जाओ ऐसे ना तड़पाओ
धैर्य धरते हुए हम पुकारा करे
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

तुमको पाया तो सबकुछ है पाया
मिट गई जन्मों की लौकिक माया
नाम जपता रहूँ तुमको ध्याता रहूँ
महिमा सभीको सुनाता रहूँ
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

अपनी सूरत हृदय में बसा दो
प्रीत करने की रीती सिखा दो
करके चरणों का ध्यान,पाए भक्ति और ज्ञान
गुरुभक्ति से मन को मिटाते रह
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

सारे साधक खड़े तेरे द्वारे 
आ भी जाओ महँगीबा दुलारे
सुन के करुण पुकार आ जाओ करतार
सत्संग अमृत की वर्षा कराते रहो
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय 
शिवाय नमः शिवाय।
तीन शब्द में सृष्टि सारी
सृष्टि सारी समाय
ॐ नमः शिवाय ।।धृ।।

पर्बत पर्बत क्यों चढ़े
नदी पार क्यों जाय
जो मिलना है यही है
जिन खोजा तिन पाय
ॐ नमः शिवाय...

हर सपना एक साँप है
मन से लिपटा जाय
विष अमृत कभी ना बने
लाखो जतन लगाय
ॐ नमः शिवाय...

तेरा दर मिल गया मुझको

तेरा दर मिल गया मुझको
सहारा हो तो ऐसा हो
तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो
तेरा दर मिल गया मुझको...

जमाने में नही देखा 
कोई सरकार के जैसा
मेरे दिलदार के जैसा
मेरे सरकार के जैसा
हमें ये नाज है रहबर
हमारा हो तो ऐसा हो 
तेरा दर मिल गया मुझको...

रहूँ मैं तरी चौखट पर
मेरे जोगी मेरे दिलबर
मेरे जोगी मेरे रहबर
मेरे जोगी मेरे दिलबर
रहें तू रूबरू मेरे
नजारा हो तो ऐसा हो
तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो
तेरा दर मिल गया मुझको...

मेरे साँसों में बहती है
तेरे ही नाम की खुशबू
महक जाए हर एक मंजर
जिकर जब भी तुम्हारा हो

तेरा दर मिल गया मुझको
सहारा हो तो ऐसा हो

तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो

हमें ये नाज है रहबर
हमारा हो तो ऐसा हो 

रहें तू रूबरू मेरे
नजारा हो तो ऐसा हो

महक जाए हर एक मंजर
जिकर जब भी तुम्हारा हो

जिकर जब भी तुम्हारा हो
सहारा हो तो ऐसा हो....

कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे

कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
नींद चुराके मोहे अपना बनावे
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

प्रीत लगाके तोसे बड़ा दुःख पाया रे
एक पल भी मोहे चैन न आया
तेरे बिन मन घबराए, एक पल चैन न आए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

छुप छुप रोऊँ कान्हा दुनिया से चोरी रे
टूट न जाए कहीं प्रीत की डोरी
नैना भर भर आए तेरी याद सताए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

भक्त तुम्हारा कान्हा तुमको पुकारें
दरश दिखा दे मोहे आँखों के तारे
तेरा दर्शन पाया जीवन बीता प्यारा
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

तेरे बिन मन घबराए एक पल चैन न आए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
नींद चुराके मोहे अपना बनाए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

प्रीत लगाके तोसे बड़ा दुःख पाया रे
एक पल भी मोहे चैन न आया
नैना भर भर आए तेरी याद सताए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

हे मेरे शिवरूप गुरुजी

हे मेरे शिवरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
रुद्र महा शिवरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी।।धृ।।

नाम है तेरा तारणहारा
सबके दुखड़े हरते हो तुम
प्रेम सुधा का पान करा के
सबको पावन करते हो
तुमही हो सब रूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

पावन सबसे ज्ञान की गंगा
आपके मुख से बहती है
ब्रह्म गुरु के वचनों में है
सारी श्रुतियाँ कहती है
सबमें तेरा रूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

मंगल दर्शन गुरुवर तेरा
जिसने भी कभी पाया है
जनम जनम की प्यास मिटी
जो तेरे दर पे आया है
रुद्र महा शिवरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

सिंधु दया के प्रेम के सागर
विनती मेरी सुन लेना
सेवक जान सदा चरणों में
मुझको अपने रख लेना
तेरे रहूँ अनुरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

कैलाशी काशी के वासी
घट घट वासी अविनाशी हो
ह्रदय बिहारी भव भयहारी
त्रिपुरारी तुम सुखराशी हो
तुम ही हो सब रूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

गुरु सुखकारक गुरु दुःखवारक

गुरु सुखकारक
गुरु दुःखवारक
मुख मुद्रा मनोहारी
गुरु की महिमा भारी
मेरे गुरु की महिमा भारी।।धृ।।

गुरु का संग मिला है जबसे
तबसे बात बनी है न्यारी
प्रगट सुबुद्धि गुरु के वचन से
वाणी लगे मोहे प्यारी
गुरु की महिमा भारी...

धर्म सिखाया मार्ग दिखाया
गुरुवर है मेरे परम् उपकारी
गुरु ने ही गोविंद बतायो
निर्बलता को निवारी
गुरु की महिमा भारी...

जय गुरु जय गुरु जय हो तुम्हारी
एक अर्जी तुम सुन लो हमारी
सारी उमर करूँ चरणों की पूजा
बेड़ो लगा दियो पारी
गुरु की महिमा भारी...

गुरु सुखकारक, 
गुरु दुःखवारक
मुख मुद्रा मनोहारी,
गुरु की महिमा भारी,
मेरे गुरु की महिमा भारी

आनंदरूपा जय गुरुदेवा

आनंदरूपा जय गुरुदेवा
परम् स्वरूपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ ।।धृ।।

पूर्ण स्वरुपा जय गुरुदेवा
निराकार रूपा जय गुरुदेवा
निरंजन रूपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ

केशव स्वरुपा जय गुरुदेवा
परम् स्वरुपा जय गुरुदेवा
आनंदरूपा जय गुरुदेवा
ब्रह्म स्वरुपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ

सदगुरू सा नही और जगत में
परम् दयालू परम् कृपालू
सदगुरू सा नही और जगत में
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ


सात समंदर पार ना

सात समंदर पार ना
सातवे आसमान में
मात-पिता गुरु सम ना कोई
इस सारे जहान में
वंदन है गुरु के चरणों में
वंदन गुरुवर के चरणों में
शत शत अभिनंदन
शत शत अभिनंदन

प्रथम गुरु है माता जिसने
हमको दूध पिलाया है
संस्कारों का सिंचन करके
उन्नत हमें बनाया है
माँ की महिमा शास्त्र बखाने
माँ ममता की खान है
वंदन है गुरु के चरणों में...

नन्हासा मैं फूल हूँ मैय्या
तो वृक्षों की डाली है
मैं तो हूँ छोटीसी बगिया
तू उसकी हरियाली है
बगिया के फूलों सी मैय्या
तेरी ये मुस्कान है
वंदन है गुरु के चरणों में..

पिता ने हमको पढ़ा लिखाकर
विद्यावान बनाया है
अपना साथी आप बनो ये
सुंदर सूत्र सिखाया है
कर्मयोग की शिक्षा का तो
करते हम गुणगान है
वंदन है गुरु के चरणों में...

मातृ पितृ भक्ति को जिसने
जीवन में अपनाया है
श्रवण कुमार भीष्म विघ्नेश्वर 
को आदर्श बनाया है
ऐसे मातृ पितृ भक्तों की 
महिमा अपरंपार है
वंदन है गुरु के चरणों में

बापू ने भी मातृ पितृ 
भक्ति से सबकुछ पाया है
स्वामी लीलाशाह गुरु का
ज्ञान प्रसाद लुटाया है
गुरुवर मेरे प्यारे जोगी
गुरु मेरे भगवान है
वंदन है गुरु के चरणों में..
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आज परम् आनंद मिला

आज परम् आनंद मिला
सच्चा सुख आज ही पाया है
मात-पिता के चरणों में जब
मैंने शीश झुकाया है

कर पूजन स्वीकार मेरा
दीजिए ये आशिर्वाद मुझे
जबतक मेरी सांस चले रहे
ये पावन दिन याद मुझे

आशीर्वाद हमारा बच्चों 
सदा तुम्हारे साथ रहे
दुआ हमारी और गुरुवर की
कृपा तुम्हारे साथ रहे
याद हमेशा तुम्हें हमारी
बच्चों बस ये बात रहे
मातृ पितृ भक्तों के सर पे
सदा गुरु का हाथ रहे
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ 
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पूजन करूँ मैं मात पिता का

पूजन करूँ मैं मात पिता का 
निज संस्कृति अपनाऊँ मैं
गुरुवर के संकेत पे चल के 
जीवन सफल बनाऊँ मैं

तिलक लगाओ हार पहनाओ
मेरी प्यारी मैय्या को
दीप जलाओ पुष्प चढ़ाओ
वंदन करता हूँ उनको
भारत पुण्य धरा की महिमा
निज आदर्श बनाऊँ मैं
पूजन करूँ...

शीश झुकाऊँ फेरे लगाऊँ
आपका आशीष पाऊँ मैं
तन मन अर्पित जीवन मेरा
चरणों में ही लगाऊँ मैं
कर्ज है मुझपर मात पिता का
कैसे उसे चुकाऊँ मैं
पूजन करूँ...

जिस माँ ने हमें नौ मास तक 
गर्भ में बहुत संभाला है
जीवन के सुख दुःख सह के भी
कैसे हमको पाला है
मात पिता गुरु चरणों में ही
मेरे चारों धाम है
पूजन करूँ...

गीले में ही खुद सोकर मुझको
सूखे में ही सुलाया है
भूखी रहकर उसने मुझको
अपना कौर खिलाया है
उस माँ का ऋण कैसे चुकाऊँ
माँ ममता की खान है
पूजन करूँ...

जीवन में सबकुछ मिल जाए
मात पिता ना मिलते है
मात पिता गुरु सेवा से 
किस्मत रेखा बदले है
उनकी आज्ञा में चलना ही 
मेरा सच्चा धर्म है
पूजन करूँ...

बापू ने लीलाशाहजी की 
सेवा कर यह फल पाया
ब्रम्हज्ञान को हँसते गाते
हम सबको है सिखलाया
लाखों मिलते मात पिता दिल
तब सद्गुरु दिल बनता है
पूजन करूँ...
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ॐ जय जय मात-पिता

ॐ जय जय मात-पिता
प्रभू गुरुजी मात-पिता
सद्भाव देख तुम्हारा
मस्तक झुक जाता
ॐ जय जय मात-पिता

कितने कष्ट उठाए 
हमको जन्म दिया
मैय्या पाला बड़ा किया
सुख देती दुःख सहती
पालनहारी माँ
ॐ जय जय मात-पिता

अनुशासित कर आपने
उन्नत हमें किया
पिता आपने जो हैं दिया
कैसे ऋण मैं चुकाऊँ 
कुछ न समझ आता
ॐ जय जय मात-पिता

सर्व तीर्थमई माता
सर्व देव में पिता
जो कोई इनको पूजे
पूजित हो जाता
ॐ जय जय मात-पिता

मात-पिता की पूजा
गणेशजी ने भी की
सर्व प्रथम गणपति को
ही पूजा जाता
ॐ जय जय मात-पिता

बलिहारी सद्गुरु की
मार्ग दिखा दिया
सच्चा मार्ग दिखा दिया
मातृ पितृ पूजन कर
जग जय जय गाता
ॐ जय जय मात-पिता

मात-पिता गुरु की
आरती जो गाता
है प्रेम सहित गाता
वो संयमी हो जाता
सदाचारी हो जाता
भव से तर जाता

लफंगे लफ़ंगियों की 
नकल छोड़
गुरु सा संयमी होता
गणेशजी सा संयमी होता
स्वयं आत्मसुख पता
औरों को पवाता

ॐ जय जय मात-पिता
प्रभू गुरुजी मात-पिता
सद्भाव देख तुम्हारा
मस्तक झुक जाता
ॐ जय जय मात-पिता

चाहे जैसे मुझे रख लो

चाहे जैसे मुझे रख लो कुछ ना कहूँगा मैं
तेरा ही था तेरा ही हूँ तेरा रहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तुम्हारे नाम का का मोती मेरी दौलत है
ये रुतबा और ये शोहरत भी तेरी बदौलत है
तू है सागर मैं हूँ कतरा तुझ संग बहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

मेरा मन अब नही लगता है जग की बातों में
अपनी उंगली थमा दी मैंने तेरे हाथों में
जिस तरफ ले चलो मुझको वही चलूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

गम की रातें लगें कि जैसे सुख का सवेरा है
बस तू एक बार कह दे कि हाँ तू मेरा है
फिर तो हर एक सितम हँस कर ही सहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

जिसकी अटकी है जान तुझमें मैं वो परिंदा हूँ
तू मेरे साथ है इस आस पे मैं तो जिंदा हूँ
हमारी आस जो टूटी तो जी ना सकूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...
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मेरे दिल में बसे गुरुदेव तुम हो


मेरे दिल में बसे गुरुदेव तुम हो
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

जमाना राह में काँटे बिछाता
मुझे क्या मैं तो तेरी राह चलता 
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

तुझे मिलने को दिल बैचैन रहता
तुझे देखे तो दिल को चैन पड़ता
मेरे मालिक मेरी दुनिया तुम हो
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

जुदा रहना गँवारा कैसे होगा
तेरी चाहत से मेरी झोली भरना
मेरे प्रियतम मेरे सरताज तुम हो
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...
जमाना राह में काँटे बिछाता
मुझे क्या मैं तो तेरी राह चलता 
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...
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साथ तुम ही हो

साथ तुम ही हो, पास तुम ही हो
हर साधक की आस तुम ही हो

जल बिन जैसे मछली तड़पती 
ऐसा अपना हाल है
देर न करियो ओ मेरे बापू
तुम बिन सब बेहाल है
जाने कहाँ उड़ी चैन हमारी
जिए भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

तरस रही हैं अखियाँ सबकी
हे गुरुवर अब आ भी जाओ
बरस बरस कर नैना पुकारें 
गुरुवर आ भी जाओ
धैर्य ना अब कहीं टूट जाए सब
 हमको ना तड़पाओ
सूना वीराना जीवन मेरा
रहे भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

ऐसी भी क्या गलती हो गई
दूर जो हमसे हो गए तुम
चाँद बिना चकोर रहे ना
स्वाति बिन जो चातक
बापू तुम बिन कैसे रहे हम
हम सारे तेरे साधक
तेरा सहारा जिसको मिला हो
भूले तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

देख तुझे हर दिल ये कहता
तुमसा ना कोई और जहाँ में
दामन छोड़ ना जाऊँगा मैं
तुमसे सच्चा नाता है
बिगड़ी सबकी बनाने वाले
तू ही पिता तू ही माता है
तेरा मेरा रिश्ता पुराना
कहे भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम 
रहे भी तो कैसे 
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गुरु मेरे

गुरु मेरे ,गुरु मेरे, गुरु मेरे, दाता मेरे, दाता मेरे
भरोसा मेरा नही हारेगा, है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा ,है भरोसा मुझे
गुरु मेरे ,गुरु मेरे, गुरु मेरे, दाता मेरे, दाता मेरे 

अपनों का बदल जाना ,दुनिया का है दस्तूर
अपनों को निभाने में मेरा गुरु बड़ा मशहूर
मुझे भी अपना तू बनाएगा, है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा, है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

इतिहास गवाह है जब जिसने पुकारा है
जीता ही भरोसा ही जब गुरु सहारा है
मेरा भी गुलशन तू निखरेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

जो कुछ था पास मेरे सब अर्पण कर डाला
अब हाथ उठा करके समर्पण कर डाला
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

भरोसा मेरा नही हारेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे गुरु मेरे गुरु मेरे दाता मेरा गुरु मेरे 

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सुनो न बापू

सुनो न बापू एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
फिर चले गए क्यों जोगी यहाँ कोई नही है अपना

सुनो न बापू एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
सुनो न जोगी एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
फिर चले गए क्यों जोगी यहाँ कोई नही है अपना
फिर चले गए क्यों बापू यहाँ कोई नही है अपना
मीरा ने भक्ति की थी, शबरी ने भक्ति की थी
श्रीराम जी में जितना ,कैसे बताए बापू...

बापू कब आओगे अब तो ये भी हमें बता दो
अब वृक्ष लताएँ भी है कहते बापू को लौटा दो
अब क्या कहूँ मैं उनसे हम भी तड़पे है कितना
श्रीराम जी बिन तड़पे थे भरत जी जितना
कैसे बताए...

एक ही दिल था जोगी मेरा वो भी तुम्हें दिया है
मैंने मोल न जाना था तुमने अनमोल किया है
दिल के बदले तुम्हें माँगे हमें कीमत दो बस इतना
शबरी ने भक्ति की थी,मीरा ने भक्ति की थी
नन्दलाल जी में जितना,कैसे बताए बापू...

कितना गाऊँ कितना सुनाऊँ आप तो बस सुनते हो
कहते ना हो कुछ बस यूँ ही आप तो चुप बैठे हो
कुछ तो बोलो मेरे जोगी कि धैर्य धरे हम कितना
मीरा ने भक्ति की थी, शबरी ने भक्ति की थी
श्रीराम जी में जितना ,कैसे बताए बापू....

फिरसे बहारें आएँगी जब बापू आएँगे
नाँच उठेंगा हर दिल जब हम दर्शन पाएँगे
ऐसे दिन पर कब आएँगे सोचे सदा बस इतना
श्रीराम जी बिन तड़पे थे भरत जी जितना
कैसे बताए बापू....

तसवीर को निहारूँ

तसवीर को निहारूँ ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
गुरुवर तुम्हें पुकारू,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ।।धृ।।

कब आओगे गुरुजी,कबसे टेर लगाऊँ
तसवीर को निहारूँ...

हम सब भटक रहे है, तुम बिन अनाथ होकर
तुम दूर जा बसे हो, औरों के साथ होकर
अब तुमही ये बताओ कैसे तुम्हें बुलाऊँ
तसवीर को निहारूँ...

नियमों को दिल न माने,कानून भी न जाने
दुनिया समझ रही है हम हो गए दिवाने
है अब ये जिद हमारी वापस तुम्हें ले आऊँ
तसवीर को निहारूँ...

निर्दोष हो प्रभूजी ,हम सब ये जानते है
जग माने या न माने, साधक तो मानते है
अब तुमही ये बताओ कैसे तुम्हें बुलाएँ
तसवीर को निहारूँ....

लीला तुम्हारी प्रभूजी जानी है कब किसीने
संतों की सत्य वाणी मानी है कब सभी ने
दुनिया की रीत है ये चाहूँ न बदल पाऊँ

तसवीर को निहारुँ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
कब आओगे गुरुजी,कबसे टेर लगाऊँ
गुरुवर तुम्हें पुकारुँ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
तसवीर को निहारुँ....
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अब तो प्रभू आ जाओ

अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ

नैना झरझर बहते हैं मोरे दूरी अब तो मिटाओ
चुपके चुपके चुपके  देखते हो तुम 
यूँ ना मोहे सताओ,यूँ ना मोहे सताओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ

तुम बिन सूना आँगन ये मेरा ताके बाँट तिहारी
कलियाँ तुम बिन मुरझा गई है गुमसुम ये फुलवारी
गुमसुम ये फुलवारी,गुमसुम ये फुलवारी
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ

नैना झरझर बहते हैं मोरे दूरी अब तो मिटाओ
चुपके चुपके चुपके  देखते हो तुम 
यूँ ना मोहे सताओ,यूँ ना मोहे सताओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ
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तुम न आए प्रभूजी

तुम न आए प्रभूजी कि शाम हो गई
मेरी पूजा की थाली सजी रह गई
भोग रखा फूल रखे मुरझा गए
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

हमसे रूठे हो क्या आप आते नही
भूल अपराध मेरे बताते नही
तेरे चरणों में बैठे बैठे शाम हो गई
मन में दर्शन की इच्छा बनी रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

ध्यान भी कर लिया ज्ञान भी सुन लिया
तेरे चरणों मे रहकर के सब मिल गया
मन में आशा अब ये ही बनी रह गई
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए गुरुजी...

कईं जन्मों से नाता मेरा आपका
आप मेरे प्रभु मैं हूँ अब आपका
तेरी करूणा से नई जिंदगी मिल गई
मन में दर्शन की इच्छा बनी रह गई
तुम न आए गुरुजी...

राहों में तेरे पलकें बिछा रहे
आ जाओ गुरुदेव हम बुला रहे
तेरे बिन ये जीवन वीरान हो गए
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

कब आओगे अब तो बता दो जरा
राह आने की अब तो दिखा दो जरा
झलक कैसे मिले अँखियाँ तरस गई
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...
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स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर 
बाँधी है जीवन डोर
दिल मेरा लगा ही रहता 
हर पल तेरी ओर ।।धृ।।

नैनों के दर्पण में गुरुवर 
तुमको सदा ही देखूँ
क्या से क्या बनाते हो 
हर पल यहीं मैं सोचूँ
मन आँगन में अब तो बाबा 
नाचे है खुशियों के मोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...

तुमने ही चमकाया गुरुवर 
तकदीर का ये सितारा
नाज करूँ मैं भाग्य पे अपनी 
पाकर तेरा ही सहारा
तेरी निगाहों में हमने देखी
स्वर्णिम युग की भोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...

तेरी एक नजर में हम तो
जन्मों के सुख पाए
तेरी ही महिमा के गुरुवर 
गीत सदा हम गाए
पाके अनोखा प्यार तेरा हम 
हो गए भावविभोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...
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अब सुन लो हम सबकी पुकार

अब सुन लो हम सबकी पुकार 
कि करते है हम इंतज़ार
आ जाओ हे मेरे भगवान 
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार।।धृ।।

हर बंधन को तोड़ने वाले 
इस बंधन पर आओ
तरस गई है अखियाँ सबकी 
आ के दरश दिखाओ
बाँध रखी है तुमसे ही आस 
कि होगा तेरा दीदार
सुन लो मेरी अब तो पुकार
कि करते है हम इंतज़ार

नम हुई अखियाँ आज भी प्यारे 
करती है तेरा इंतज़ार
कैसे कहे हम कैसे बताए
 इनको तेरी ही आस
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है हम इंतज़ार

विरह की घड़ियाँ कटती नही है
अब ना देर लगाओ
दर्शन सत्संग देकर बापू 
हमको पार लगाओ
विरह अगन को अब तो बुझाओ
सुन लो हमारी पुकार
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार

दिल की सबकी सुनने वाले
क्यों न सुनते हमारी 
हर पल हर घड़ी मेरे जोगी
आस लगी है तुम्हारी
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार
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ऐ मेरे तारणहारे

ऐ मेरे तारणहारे तू ही बता दे 
तेरा दर्शन कब होगा
अब और ना सताओ

तुमसे जुड़ी है साँसे हमारी
हर धड़कन में छवि है तुम्हारी
तुम ही तीरथ धाम हमारे
हर पल बापू बापू पुकारें
तू ही बता दे तेरा दर्शन कब होगा
अब और ना सताओ
ऐ मेरे तारणहारे...

आपके बिन सूनी दुनिया हमारी
इस जीवन में तुम ही मुरारी
दर्शन के बिन चैन न आए
आपके बिन अब प्रभु रहा नही जाए
तू ही बता दे ...

हालत अपनी क्या हम बताएँ
आपके बिन अब कहीं चैन न पाए 
हर पल आपकी याद सताए
आपके बिन प्रभु जिया नही जाए
तू ही बता दे ...

राह में बैठे पलकें बिछाएँ

राह में बैठे पलकें बिछाएँ
है तरसती दरश को निगाहें

आज सतगुरु हमारे कहाँ है
दिल हमारे उनके बिन तन्हा है
रो रही रूह बाँहें फैलाएँ
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

ये खुशी है तो कैसी खुशी है
बेबसी और बेचारगी है
अश्क आँखों से अब रुक न पाए
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

भाव कैसा ये भक्त मिलन का
रात का था पता ना ही दिन का
वो वक्त भुलाए तो कैसे
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

साधक सब याद करते है तुमको
अपनी सूरत तो दिखला दो हमको
दूर पलभर रहा अब न जाए
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...