प्रथम यज्ञ भूखंड धरा पे हरि ॐ का नाद हैं
ब्रह्मज्ञान की वर्षा करने आए संत महान हैं
साँई आशाराम हैं, साँई आशाराम हैं.....
दीन दुखियों के तारणहारे
रोग शोक से सहज उबारे
एक बार जो इनको ध्यावे
कोटी जन्म के दुःख बिसरावै
साँई आशाराम हैं, साँई आशाराम हैं.....
धर्म का ये हैं राजमुकुट हो हो हो
धर्म का ये हैं राजमुकुट
सनातनियों का नाज हैं
बड़भागी पाए गुरूरूप में
साँई आशाराम हैं, साँई आशाराम हैं.....
संस्कृति पर जो किए
विधर्मियों ने प्रहार यहाँ
दूर नहीं अब वो घडी
गिन गिन के होगा हिसाब यहाँ
शंखनाद ऐलान हैं आए परशुराम हैं
शंखनाद ऐलान हैं आए परशुराम हैं
धर्मध्वजा लहराने को आए हो हो हो
धर्मध्वजा लहराने को आए साँई आशाराम हैं
भारत विश्वगुरु हो जाए
प्रण ये इनका महान हैं
साँई आशाराम हैं, साँई आशाराम हैं.....
सदगुरू लीलाशाह ने माँगे
एक सौ आठ ब्रह्मज्ञानी
सहज ही आज्ञा सिर पे धारी
मुख से वचन कहे गिरिधारी
साँई आशाराम हैं, साँई आशाराम हैं
एक से मैं सवा लाख जगाऊँ
हरि हरि ॐ
तभी श्री आशाराम कहाऊँ
ऐसे संत शिरोमणि इनको
बारं बारं प्रणाम हैं , बारं बारं प्रणाम हैं
साँई आशाराम हैं, साँई आशाराम हैं.....