Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है
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जय सद्गुरु देवन देव वरं-गुरू वंदना

जय सद्गुरु देवन देव वरं, निज भक्तन रक्षण देह धरं ।

पर दुःख हरं सुख शांति करं, निरुपाधि निरामय दिव्य परं ।।1।।


जय काल अबाधित शांतिमयं, जन पोषक शोषक ताप त्रयं ।

भय भंजन देत परम अभयं, मन रंजन भाविक भाव प्रियं ॥2॥


ममातादिक दोष नशावत है, शम आदिक भाव सिखावत हैं ।

जग जीवन पाप निवारत है, भवसागर पार उतारत हैं ||3||


कहूँ धर्म बतावत ध्यान कहीं, कहूँ भक्ति सिखावत ज्ञान कहीं ।

उपदेशत नेम अरु प्रेम तुम्हीं, करते प्रभु योग अरु क्षेम तुम्हीं ॥4॥


मन इन्द्रिय जाही न जान सके, नहीं बुद्धि जिसे पहचान सके ।

नहीं शब्द जहाँ पर जाय सके, बिनु सद्गुरु कौन लखाय सके ॥5॥


नहीं ध्यान न ध्यातृ न ध्येय जहाँ, नहीं ज्ञातृ न ज्ञान न ज्ञेय जहाँ ।

नहीं देश न काल न वस्तु तहाँ, बिनु सद्गुरु को पहुँचाय वहाँ ॥6॥


नहीं रूप न लक्षण ही जिसका, नहीं नाम न धाम कहीं जिसका ।

नहीं सत्य असत्य कहाय सके, गुरुदेव ही ताही जनाय सके ॥7॥


गुरु कीन कृपा भव त्रास गयी, मिट भूख गयी छुट प्यास गयी ।

नहीं काम रहा नहीं कर्म रहा, नहीं मृत्यु रहा नहीं जन्म रहा ॥8॥


भग राग गया हट द्वेष गया, अघ चूर्ण भया अणु पूर्ण भया ।

नहीं द्वैत रहा सम एक भया, भ्रम भेद मिटा मम तोर गया ॥9॥


नहीं मैं नहीं तू नहीं अन्य रहा, गुरु शाश्वत आप अनन्य रहा ।

गुरु सेवत ते नर धन्य यहाँ, तिनको नहीं दुःख यहाँ न वहाँ ॥10॥


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