Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है
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देख लिया संसार हमने देख लिया

 देख लिया संसार हमने देख लिया 

सब मतलब के यार हमने देख लिया  


 तन निरोग धन जेब में जबतक 

 मन से सेवा केरेंगे तबतक

मानेगा परिवार हमने देख लिया 

देख लिया संसार हमने देख लिया 

देख लिया संसार हमने देख लिया 

सब मतलब के यार हमने देख लिया   


जिस जिस पे विश्वास किया

उसने हमें निराश किया 

बनके रिश्ते दार हमने देख लिया 

देख लिया संसार हमने देख लिया 

बनके रिश्ते दार हमने देख लिया 

सब मतलब के यार हमने देख लिया


प्रतिभा का कोई मोल नहीं 

सफल सिद्ध अनमोल वहीं 

जिसका प्रबल प्रचार हमने देख लिया 

देख लिया संसार हमने देख लिया 

जिसका प्रबल प्रचार हमने देख लिया 

सब मतलब के यार हमने देख लिया 


सरल संत का मूल न आँके

कुटिलों के दरवाजे झाँके 

हो जाए दीदार हमने देख लिया

देख लिया संसार हमने देख लिया 

हो जाए दीदार हमने देख लिया

देख लिया संसार हमने देख लिया 


सतगुरू का उपदेश यहीं हैं

महामंत्र भक्तों यहीं हैं 

हरि स्मरण हैं सार हमने देख लिया

देख लिया संसार हमने देख लिया 

हरि  स्मरण हैं सार हमने देख लिया

देख लिया संसार हमने देख लिया 


देख लिया संसार हमने देख लिया 

सब मतलब के यार हमने देख लिया  

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दर्शन दे रे दे रे भगवंता

 दर्शन दे रे दे रे भगवंता

सुंदर स्वरूप तेजस्वी काया

लागे जशी मातेची छाया

छाया सदा राहो हे दयावंता

दर्शन दे रे....


प्रेमळ मधुर स्वभाव तुमचा

मिळे सदा आंनद कृपेचा

कृपा सदा रहो हे कृपावंता

दर्शन दे रे....


आले धरावर अवतार घेऊनी

बापू आशाराम बनूनी

भवपार केले हे भगवंता

दर्शन दे रे....


देऊनी दीक्षा गुरू मंत्राची

पूर्ण हो केली इच्छा अंतरीची

अर्पण जीवन तुम्हा माझ्या संता

दर्शन दे रे....


लीला तुमची कुणाला न कळली

जीवनाची दिशा माझी वळली

नामाचे धन दिले हे धनवंता

दर्शन दे रे....

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दुनिया के इस मेले में

 दुनिया के इस मेले में आना हैं और जाना हैं

मेरा तेरा कुछ भी नहीं हरि नाम साथ में जाना हैं।।


दुनिया एक तमाशा हैं यहाँ पूरी न होती आशा हैं

जोड़-जोड़  सब चले गए मिलती यहाँ निराशा हैं

माल खजाना कुछ भी नहीं गुरू नाम साथ में जाना हैं

गुरू मंत्र साथ में जाना हैं,गुरू ज्ञान साथ में जाना हैं

दुनिया के इस मेले में...


सूरज जो उदय हुआ साँझ को वो ढल जाता हैं

खिला जो फूल बगिया में एक दिन वो मुरझाता हैं

बसंत बहार कुछ भी नहीं आना हैं सो जाना हैं

दुनिया के इस मेले में...


खिला-पिला के देह बढ़ाई वो भी अग्नि जलाना हैं 

कर सत्संग अभी से प्यारे नहीं तो फिर पछताना हैं

पड़ा रहेगा माल खजाना ,छोड़ त्रिया-सुत जाना हैं

दुनिया के इस मेले में आना हैं और जाना हैं

सोना चाँदी कुछ भी नहीं हरि नाम साथ में जाना हैं

मेरा तेरा कुछ भी नहीं गुरू ज्ञान साथ में जाना हैं

गुरू मंत्र साथ में जाना हैं,गुरू ज्ञान साथ में जाना हैं

प्रभु नाम साथ में जाना हैं, तेरा कर्म साथ में जाना हैं

माल खजाना कुछ भी नहीं गुरू नाम साथ में जाना हैं

हरि ॐ, ह्री ॐ.....

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देखी बहुत निराली हैं महिमा

 देखी बहुत निराली हैं महिमा 

देखी अजब निराली हैं महिमा 

संतो के सत्संग की,साँई के सत्संग की


सत्संग अंदर हीरे मोती 

मिलते लेकिन धीरे धीरे

हैं जिसने खोज निकाला

हैं महिमा सत्संग की

संतो के सत्संग की,साँई के सत्संग की..


सत्संग ही सब कष्टों को तारे

डूब रहे को सत्संग तारे

दिनोंदिन खुशहाली

हैं महिमा सत्संग की

संतो के सत्संग की,साँई के सत्संग की..


सत्संग सच्चा तीरथ भाई

करते जिसकी नेक कमाई

करम हीन रहे खाली

हैं महिमा सत्संग की

संतो के सत्संग की,साँई के सत्संग की..


देखी बहुत निराली हैं महिमा 

देखी अजब निराली हैं महिमा 

संतो के सत्संग की,साँई के सत्संग की


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दरबार में सच्चे सतगुरू के

 दरबार में सच्चे सद्गुरू के

दुःख दर्द मिटाए जाते हैं

दुनिया के सताए लोग यहाँ

सीने से लगाए जाते हैं

दरबार में सच्चे सद्गुरू के...


ये महफ़िल हैं मस्तानों की

हर शख्स यहाँ पर मतवाला

भर-भर के जाम इबादत के

यहाँ सबको पिलाए जाते हैं

दरबार में सच्चे सद्गुरू के...


ऐ जगवालों क्यों डरते हो

इस दर पर शीश झुकाने से

ऐ नदानों ये वह दर हैं 

सर भेंट चढ़ाए जाते है

दरबार में सच्चे सद्गुरू के...


इल्जाम लगाने वालों ने

इल्जाम लगाए लाख मगर

तेरी सौगात समझ कर के

हम सिर पे उठाए जाते हैं

दरबार में सच्चे सद्गुरू के...


जिन प्यारों पर ऐ जगवालों

हो खास इनायत सतगुरू की

उनको ही संदेशा आता हैं

और वोही बुलाए जाते हैं

दरबार में सच्चे सद्गुरू के...


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दरबार में सच्चे सदगुरू के

दरबार में सच्चे सद्गुरु के 
दुःखदर्द मिटाए जाते हैं
दुनिया के सताए लोग यहाँ 
सीने से लगाए जाते है

ये महफ़िल है मस्तानों की
हर शख्स यहाँ पर मतवाला
भर भर के जाम इबादत के 
यहाँ सबको पिलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

ऐ जगवालों क्यों डरते हो
इस डर पर शीश झुकानेसे
ऐ नादानों ये वह दर है
सर भेंट चढ़ाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

इल्जाम लगानेवालों ने
इल्जाम लगाए लाख मगर
ओ तेरी सौगात समझ करके
हम सिर पे उठाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

जिन प्यारों पर ऐ जगवालों 
हो खास इनायत सद्गुरु की
उनको ही संदेशा जाता है
और वो ही बुलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

दीप जलाकर ज्ञान के

दीप जलाकर ज्ञान के,दूर करो अंधकार
समता,करुणा,स्नेह से भरो दिल के भण्डार
दिप जलाकर ज्ञान के...

राग द्वेष ना मोह हो हमको,दूर हो विषय विकार
कर उपकार उनपर सदा,जो दीन हीन लाचार
दिप जलाकर ज्ञान के....

हरदम रहता साथ सदा वो,फिर भी है निःसंग
तन मन पावन हो जाता है,पी जब नाम की भंग
दिप जलाकर ज्ञान के...

लीन हुआ चित् नाम नशे में,पाया प्रेम का सार
निज आनंद में मस्त रहे मन,सपना ये संसार
दिप जलाकर ज्ञान के...

वन में तू खोजे ईश कहाँ है,साहिब सब के संग
स्व से मिलने की दिल में जागे तीव्र तरंग
दिप जलाकर ज्ञान के...

भेद भरम संशय को मिटाकर छूट गया अहंकार
रोम रोम में छा गयी है हरि रस की खुमार
दिप जलाकर ज्ञान के...

पा लिया मन के मन्दिर में दिलबर का दीदार
छलका दरिया आनंद का,खुला जो दिल का द्वार
दिप जलाकर ज्ञान के...

मन बुद्धि वाणी से परे है ना रूप रंग आकार
साक्षी सद्गुरु वेश में मेरे प्रभु आये साकार
दिप जलाकर ज्ञान के...

दीप जलाकर ज्ञान के,दूर करो अंधकार
समता,करुणा,स्नेह से भरो दिल के भण्डार
दिप जलाकर ज्ञान के...



दिल में प्रेम की ज्योत जलाई

दिल में प्रेम की ज्योत जलाई
दिल में प्रेम की ज्योत जलाई
गुरु से ऐसी प्रीत लगाई
मेरी प्रीत कभी ना टूटे
ऐसा वर दे दो

शबरी के घर आए थे
जूठे बेर जो खाए थे
भक्ति का वरदान दिया
उसका भी कल्याण किया
तेरा दर है सबसे प्यारा
तेरा दर है सबसे प्यारा
कर दो रेहमत साँई 
दिल में.....

मीरा को भी तार दिया
विषधर को भी हार किया
तुम सबके रखवारे हो
जग में सबसे प्यारे हो
तुम हो कृपा के सिंधु गुरुवर
तुम हो कृपा के सिंधु गुरुवर
कर दो रेहमत साँई
दिल में.....

साथ तेरा ये छूटे ना
मेरी श्रद्धा टूटे ना
गुरुवर का दीदार किया
मुझको भव से पार किया
खेल अजब है तेरा साँई
खेल अजब है तेरा साँई 
मोहे समझ ना आई
दिल में......

गुरुवर ही संसार है
गुरु ब्रम्ह का सार है
गुरुवर तारणहारे है
गुरु ही भव से तारे है
धन्य हुआ मैं इस जीवन में
धन्य हुआ मैं इस जीवन में
कर दो रेहमत साँई

                                                                                   

देखो किसने क्या पाया ?


देखो किसने क्या पाया, मानव क्यों जग में आया
हरि , हरि , हरि , हरि

आनेवालों को देखो, क्या लेकर वे आते हैं
जानेवालों को देखो, क्या संग लेकर जाते हैं
कुछ पुण्य किये हैं या यूँ ही यह नर तन व्यर्थ गंवाया
हरि , हरि , हरि , हरि

उस लोभी को भी देखो संचय का जिसे व्यसन है
कितनी ही संपत्ति जोड़ी पर, तृप्त ना होता मन है
कोई ना साथ जाएगा, फिर किसके लिए कमाया
हरि , हरि , हरि , हरि

उस मोही को भी देखो, सबकी ममता में भूला
निज देह गेह में फंसकर, उस परमेश्वर को भूला
यह मोह दुखों की जड़ है, इसने किसको ना रुलाया
हरि , हरि , हरि , हरि

उस अभिमानी को भी देखो, यह वैभव रहेगा कब तक
उससे भी बढकर जग में हो गए करोड़ों अब तक
मिटटी में मिल गयी, उनकी जो दर्शनीय थी काया
हरि , हरि , हरि , हरि

उस दानी को भी देखो, जितना कोटा जाता है
वह कई गुना बढ़कर ही उसके सन्मुख आता है
उसने जितने दे डाला, उतना ही लाभ उठाया
हरि , हरि , हरि , हरि

उस त्यागी को भी देखो जो दुखद दोष को तजकर
निर्द्वंद शांति पाता है, परमेश्वर को भजकर
भोगी ने राग बढाया, त्यागी ने प्रेम बढाया
हरि , हरि , हरि , हरि

दरबार तेरा है सॉंचा


दरबार तेरा है सॉंचा, यहॉं कोई न खाली जाता,
झोली भर-भर ले जाता, बिन मॉंगे सब कुछ पाता,
गुरू की कृपा है अनमोली,
कृपा से भर लो झोली, जय-जय गुरूदेव

1 जिन राहों से भी गुजरते हो
तुम सबके दिल में उतरते हो
रहमत करते निराली
तुमसे ही है खुशहाली

2 तुम क्षमा – अभय के दाता हो
तुम पूर्ण पुरूष विधाता हो
कितनी मधुर तेरी बोली
सूरत कितनी है भोली

3 तुम सागर हम तो तरंगें हैं
तुमसे ही सारी उमंगें हैं
हम उपवन तुम माली
हम तेरे वृक्ष की डाली

4 ईश्‍वर हो मानव दिखते हो
बड़े पुण्‍यों से तुम मिलते हो
खेलो न ऑंख मिचौली
सबके हो हमजोली

5 पारस हो सोना कर देते
बदले में कुछ भी न लेते
सूर्य में तेरी ही लाली
रोशन रातें ये काली

6 चाहे संकट ने हमको घेरा हो
चाहे चारों ओर अंधेरा हो
जिसने भक्ति है पाली
अपनी बिगड़ी बनाली

7 मझधार फॅंसी गर नैया हो
और कोई भी न खेवैया हो
गुरू करें रखवाली
इनसे जो प्रीत लगा ली