गुरूदेव से निराला कोई और नहीं रे
बेड़ा पार लगानेवाला कोई और नहीं रे
माया के वो बंधन तोड़े प्रभु चरणों से प्रीति जोड़े
सारे दुःख हटानेवाला कोई और नहीं रे
गुरूदेव से निराला कोई और नहीं रे
उपनिषद की कथा सुनावे, मेरे दिल की व्यथा मिटावे
जनम मरण को मिटाने वाला कोई और नहीं रे
गुरूदेव से निराला कोई और नहीं रे
जीवन दर्शन हमें करावे ,सद्चित आनंद रूप बतावें
मुक्तिधाम दिलाने वाला कोई और नहीं रे
गुरूदेव से निराला कोई और नहीं रे
ऐसे सदगुरू के गुण गाओ, चरणों में तुम शीश नवाओ
भव के बंध छुडानेवाला कोई और नहीं रे
गुरूदेव से निराला कोई और नहीं रे
बेड़ा पार लगानेवाला कोई और नहीं रे
गुरूदेव से निराला कोई और नहीं रे
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