पूज्य संत श्री आशाराम जी लीला किस विधि गाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ, मैं बार-बार सिर नाऊँ
पूज्य संत श्री आशाराम जी लीला किस विधि गाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ,मैं बार-बार सिर नाऊँ
चमत्कार भयोग सिद्धि से ना समझूँ समझाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ, मैं बार-बार सिर नाऊँ
सर्प विषैले प्यार से बस में बाबा तेरे आगे
बादल भी बरसात से पहले तेरी ही आज्ञा माँगे
ऐसा अनुग्रह कर दे बाबा निशदिन दर्शन पाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ, मैं बार-बार सिर नाऊँ
पूज्य संत श्री आशाराम जी लीला किस विधि गाऊँ
सावरमती की बाढ़ का पानी चरण स्पर्श से रुकता
हाथ लिए हथियार खड़े सब कोई ना आगे बढ़ता
जीव में शिव के दर्शन करते सबको गले लगाते
पंथ भूले राही को बाबा सच्ची राह बताते
भटक भटक मैं हार के बाबा तेरो ही सत्संग चाहूँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ, मैं बार-बार सिर नाऊँ
पूज्य संत श्री आशाराम जी लीला किस विधि गाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ
चमत्कार भयोग सिद्धि से ना समझूँ समझाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ, मैं बार-बार सिर नाऊँ
अक्षय पात्र दिया बाबा ने दिया प्रसाद लुटाने
विद्यालय में घूम-घूम के बाँटते फिरे सयाने
फिर भी ना वह खत्म हुई थी बाल्टी पूरी आधी
अनगिन लोगों ने खाई जब बाबा की वो प्रसादी
भक्ति वश बाबा ने चलती गाड़ी को भी रोक लिया
दर्शन करने वालों को खुद हाथों से ही प्रसाद दिया
दुख दर्दी का दुख वे हरते दूर सभी के पीड़ा करते
बाबा मौत का भी मुख मोड़े अजब अनेकों क्रीड़ा करते
काम विकार से विजयी बनाए दुर्गुण से कर दूर
नर नारी में देख सकूँ मैं नारायण का नूर
भर बुध गिरी हो या हो हिमालय या कोई भी धाम
राम का चिंतन कबहु ना छूटे बन गए आशाराम
दो कर जोडू विनती करूँ तोहे तेरी ही अर्जी मैं गाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ, मैं बार-बार सिर नाऊँ
पूज्य संत श्री आशारामजी लीला किस विधि गाऊँ
मैं बार-बार सिर नाऊँ, मैं बार-बार सिर नाऊँ
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