Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

किस देवता ने आज मेरा दिल चुरा लिया

किस देवता ने आज मेरा दिल चुरा लिय
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया

रहता था पास में सदा लेकिन छिपा हुआ
करके दया दयाल ने पर्दा उठा लिया ।
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया


सूरज न था न चाँद था, बिजली न थी वहाँ
एकदम वो अजब शान का जलवा दिखा दिया
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया



फिर के जो आँख खोल कर ढूँढ़न लगा उसे
गायब था नजर से सोई फिर पास पा लिया ।
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया


करके कसूर माफ मेरे जनम जनम के
"ब्रहमानंद' अपने चरण में मुझको लगा लिया
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया

तेरा मेरा ये रिश्ता पुराना हैं

तेरा मेरा ये रिश्ता पुराना हैं
गुरुद्वार ही एक ठिकाना हैं।।धृ।।

एक साथ तू ही निभाता हैं 
गुरू शिष्य का पावन नाता हैं 
प्यारा हैं तू ही मेरा हैं तू ही
हैं खुदा तू मेरा
तेरा मेरा ये रिश्ता...

बालक हूँ तेरा गुरूवर 
दामन ना छोडूँगा
चाहे कठिनाई आए 
मुख ना मैं मोडूँगा
वीराना था ये जीवन
उजड़ा हुआ था ये मन
अमृत का झरना बनकर 
बनवाए मेरा जीवन 
तुम जो कहोगे वही करेंगे
ऐसा तेरा दीवाना हैं
तेरा मेरा ये रिश्ता...

तुमको ही चाहूँ गुरूजी 
तुमको ही पाऊँ मैं
तेरे ही सुमिरन में
जीवन बिताऊँ मैं
प्यार निराला तेरा 
ज्ञान निराला हैं
पड़ती नजर जिसपे 
वो किस्मत वाला हैं
मेरा अपना कोई नहीं हैं 
एक तेरा ही ठिकाना हैं
तेरा मेरा ये रिश्ता....

आलम ये रौशन तुमसे
तुमसे जहान हैं
तुमसा ना होगा कोई
ये हो तो भगवान हैं
जर्रे जर्रे में भी तेरी ही सत्ता
तेरी मर्जी के बिना हिलता न पत्ता हैं
रहमत बरसे जिनपे इनकी 
घट में अलख जगाता हैं
गुरू शिष्य का पावन नाता हैं
एक साथ तू ही निभाता हैं 

तेरा मेरा ये रिश्ता पुराना हैं
गुरुद्वार ही एक ठिकाना हैं
एक साथ तू ही निभाता हैं 
गुरू शिष्य का पावन नाता हैं 
प्यारा हैं तू ही मेरा हैं तू ही
हैं खुदा तू मेरा
तेरा मेरा ये रिश्ता...

मन में बसा के तेरी मूर्ति

मन में बसा के तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती

कृपा आपकी भव से हैं तारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...

ब्रह्म नाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरू
वेद पुराणों में भी हैं यहीं लिखा
ज्ञानियों के ज्ञानियों ने हैं यहीं कहा
गुरुमुख से बोलती हैं माँ भारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...

काम क्रोध मोह माया लोभ सताए
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाए
सतगुरू कृपा हैं तो काहे का हैं डर
सतगुरू के नाम का अनोखा हैं असर
गुरुकृपा ही पापों को हैं सँहारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...

देव दानव यक्ष मनुज सबकी भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहे तो कालरथ रूके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...
Audio

गुरू वो साँवरी सूरत

गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे
गुरू वो साँवरी मूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे।।धृ।।

बिरह की आग ने हमारा
जलाया हैं बदन सारा
गुरू के प्रेम पानी से
जलन वो कब बुझाओगे
गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे...

सुधि खाने व पीने की
रही हमको न सोने की
प्यास दर्शन की हैं मन में
गुरूजी कब दिखाओगे
गुरू वो साँवरी मूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे...

फिरे दिन रैन हम रोती
वो वृंदावन की कुँजन में 
मनोहर बाँसुरी की धुन 
हमें फिर कब सुनाओगे
गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे...

न हमको योग से मतलब
न मुक्ति की हमें चाह
वो ब्रह्मानंद सदगुरू से
हमें फिर कब मिलाओगे
गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे

मुझे तुमने बापू बहुत कुछ दिया हैं

मुझे तुमने बापू बहुत कुछ दिया हैं
मुझे तुमने साँई बहुत कुछ दिया हैं
तेरा शुक्रिया हैं तेरा शुक्रिया।।धृ।।

न मिलती अगर दी हुई दाद तेरी
तो क्या थी जमाने में औकाद मेरी
तुम्हीने तो जीने के काबिल किया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

मुझे हैं सहारा तेरी बंदगी का
हैं जिस पर गुजारा मेरी बंदगी का
मिला मुझको जो कुछ तुझीसे मिला हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

किया कुछ न मैंने शरमसार हूँ मैं
तेरी रहमतों का तलबगार हूँ मैं
दिया कुछ नहीं बस लिया ही लिया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

मिला मुझको जो कुछ बदौलत तुम्हारी
मेरा कुछ नही सब हैं दौलत तुम्हारी
उसे क्या कमी जो तेरा हो लिया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

मेरा ही नहीं तू सभी का हैं दाता
तू ही सब हैं देता तू ही हैं दिलाता
तेरी रहमतों ने ही रौशन किया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा

कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा
हरि गोविंद गोविंद नारायणा ।।धृ।।

हरि नारायणा गुरु नारायणा
कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा
हरि गोविंद गोविंद नारायणा

तू जो भी करे सबका मंगल करे
तू ही जग तारणा है जदगीश्वरा
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

तू ही हरि रूप में तू ही गुरु रूप में
तू ही सब रूपों में समाया प्रभू
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

तू ही दीनदयाला तू ही भक्तकृपाला
तू ही मुरलीधरा है हे केशवा
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

गोविंद हरि बोलो गोपाल हरि बोलो
घनश्याम हरि बोलो मेरे राम हरि बोलो
गोविंद हरि बोलो गोपाल हरि बोलो...
Audio

दरबार में सच्चे सदगुरू के

दरबार में सच्चे सद्गुरु के 
दुःखदर्द मिटाए जाते हैं
दुनिया के सताए लोग यहाँ 
सीने से लगाए जाते है

ये महफ़िल है मस्तानों की
हर शख्स यहाँ पर मतवाला
भर भर के जाम इबादत के 
यहाँ सबको पिलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

ऐ जगवालों क्यों डरते हो
इस डर पर शीश झुकानेसे
ऐ नादानों ये वह दर है
सर भेंट चढ़ाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

इल्जाम लगानेवालों ने
इल्जाम लगाए लाख मगर
ओ तेरी सौगात समझ करके
हम सिर पे उठाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

जिन प्यारों पर ऐ जगवालों 
हो खास इनायत सद्गुरु की
उनको ही संदेशा जाता है
और वो ही बुलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

रद्राष्टकम्

श्री रद्राष्टकम्
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।

निराकारमोङकारमूलं तुरीयं
गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारूगंगा
लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा।।

चलत्कुण्डलमं भ्रू सुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुंडमालं
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहमं भवानीपतिं भावगम्यं।।

कलातीत कल्याण कल्पांतकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानंन संदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं
भजंतीह लोके परे वा नराणाम्।।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।
जरा जन्म दुःखौध तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।

रूद्राष्टकमिदं प्रोक्तू विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।

इति श्री गोस्वामि तुलसीदास कृतं श्री रूद्राष्टकं सम्पूर्णम्।
ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ ॐ ॐ।।

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर बाँधी है जीवन डोर
दिल मेरा लगा ही रहता हर पल तेरी ओर।।धृ।।

नैनों के दर्पण में गुरुवर तुमको सदा ही देखूँ
क्या से क्या बनाते हो हर पल यहीं मैं सोचूँ
मन आँगन में अब तो बाबा नाचे है खुशियों के मोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...

तुमने ही चमकाया गुरूवर तकदीर का ये सितारा
नाज करूँ मैं भाग्य पे अपने पाकर तेरा ही सहारा
तेरी निगाहों में हमने देखी स्वर्णिम युग की भोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...

तेरी एक नजर में हम तो जन्मों के सुख पाएँ
तेरी ही महिमा के गुरूवर गीत सदा हम गाएँ
पाके अनोखा प्यार तेरा हम हो गए भाव विभोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...






न जाने कौनसे गुण पर

न जाने कौनसे गुण पर दयानिधी रीझ जाते है।।धृ।।

नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर भोग छिलकों का लगाते हैं॥
न जाने कौनसे गुण पर ..

न आये मधुपुरी से गोपियों की दु:ख व्यथा सुनकर।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारिका से दौड़े आते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

न रोये वन गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आँसू बहाते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ बिन्दु विधिहर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

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ओ सबकी अँखियों में नीर भरे

ओ सबकी अँखियों में नीर भरे
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
सबकी अँखियों में नीर भरे
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
ओ मैं तो तेरे ही द्वार पड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
सबकी अँखियों में नीर भरे...

तुमसा जोगी ना कोई पाया
तुमही से मैंने नेह लगाया
ओ मेरी प्रीत है तुमसे लगी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी ...

सुन लो मेरे जोगी सलोना
तुम बिन रह गया बस हमें रोना
ओ मेरी अँखियों की प्यास बढ़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

कृपा करो हम दास पे स्वामी
घट घट वासी अंतर्यामी
हो अब टूटे न श्रध्दा लड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

दर्शन से तेरे सुख हमें मिलता
सत्संग से आपके जीवन है खिलता
ओ बोलो आएगी कब वो घड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

आत्मज्ञान की बातें तुम्हारी
पुलकित होते है नर और नारी
ओ तेरी शान है सर्वोपरी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

तुमसा जोगी ना कोई प्यारा
तुम ही हो जीने का एक सहारा
हो अब तो तुमको ही माना हरि
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

चाहे जैसे मुझे रख लो,कुछ ना कहूँगा मैं

चाहे जैसे मुझे रख लो,कुछ ना कहूँगा मैं
तेरा ही था, तेरा ही हूँ ,तेरा रहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तुम्हारे नाम का मोती ही मेरी दौलत है
ये रूतबा और ये शोहरत भी तेरी बदौलत है
तू है सागर मैं हूँ कतरा, तुझ संग बहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

मेरा मन अब नही लगता है जग की बातों में
अपनी उँगली थमा दी मैंने तेरे हाथों में
जिस तरफ ले चलो मुझको वही चलूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

गम की राते लगे की जैसे सुख का सवेरा है
बस तू एक बार जो कह दे कि हाँ तू मेरा है
फिर तो हर एक सितम हँसकर ही सहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

जिसकी अटकी है जान तुझमें मैं वो परिंदा हूँ
तू मेरे साथ है इस आस पे मैं तो जिंदा हूँ
हमारी आस जो टूटी तो जी ना सकूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तेरे दर्शन को नैना तरसते

तेरे दर्शन को नैना तरसते 
सबकी अँखियों से नीर बरसते
अब तो आ भी जाओ ऐसे ना तड़पाओ
धैर्य धरते हुए हम पुकारा करे
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

तुमको पाया तो सबकुछ है पाया
मिट गई जन्मों की लौकिक माया
नाम जपता रहूँ तुमको ध्याता रहूँ
महिमा सभीको सुनाता रहूँ
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

अपनी सूरत हृदय में बसा दो
प्रीत करने की रीती सिखा दो
करके चरणों का ध्यान,पाए भक्ति और ज्ञान
गुरुभक्ति से मन को मिटाते रह
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

सारे साधक खड़े तेरे द्वारे 
आ भी जाओ महँगीबा दुलारे
सुन के करुण पुकार आ जाओ करतार
सत्संग अमृत की वर्षा कराते रहो
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय 
शिवाय नमः शिवाय।
तीन शब्द में सृष्टि सारी
सृष्टि सारी समाय
ॐ नमः शिवाय ।।धृ।।

पर्बत पर्बत क्यों चढ़े
नदी पार क्यों जाय
जो मिलना है यही है
जिन खोजा तिन पाय
ॐ नमः शिवाय...

हर सपना एक साँप है
मन से लिपटा जाय
विष अमृत कभी ना बने
लाखो जतन लगाय
ॐ नमः शिवाय...

तेरा दर मिल गया मुझको

तेरा दर मिल गया मुझको
सहारा हो तो ऐसा हो
तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो
तेरा दर मिल गया मुझको...

जमाने में नही देखा 
कोई सरकार के जैसा
मेरे दिलदार के जैसा
मेरे सरकार के जैसा
हमें ये नाज है रहबर
हमारा हो तो ऐसा हो 
तेरा दर मिल गया मुझको...

रहूँ मैं तरी चौखट पर
मेरे जोगी मेरे दिलबर
मेरे जोगी मेरे रहबर
मेरे जोगी मेरे दिलबर
रहें तू रूबरू मेरे
नजारा हो तो ऐसा हो
तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो
तेरा दर मिल गया मुझको...

मेरे साँसों में बहती है
तेरे ही नाम की खुशबू
महक जाए हर एक मंजर
जिकर जब भी तुम्हारा हो

तेरा दर मिल गया मुझको
सहारा हो तो ऐसा हो

तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो

हमें ये नाज है रहबर
हमारा हो तो ऐसा हो 

रहें तू रूबरू मेरे
नजारा हो तो ऐसा हो

महक जाए हर एक मंजर
जिकर जब भी तुम्हारा हो

जिकर जब भी तुम्हारा हो
सहारा हो तो ऐसा हो....

कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे

कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
नींद चुराके मोहे अपना बनावे
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

प्रीत लगाके तोसे बड़ा दुःख पाया रे
एक पल भी मोहे चैन न आया
तेरे बिन मन घबराए, एक पल चैन न आए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

छुप छुप रोऊँ कान्हा दुनिया से चोरी रे
टूट न जाए कहीं प्रीत की डोरी
नैना भर भर आए तेरी याद सताए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

भक्त तुम्हारा कान्हा तुमको पुकारें
दरश दिखा दे मोहे आँखों के तारे
तेरा दर्शन पाया जीवन बीता प्यारा
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

तेरे बिन मन घबराए एक पल चैन न आए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
नींद चुराके मोहे अपना बनाए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

प्रीत लगाके तोसे बड़ा दुःख पाया रे
एक पल भी मोहे चैन न आया
नैना भर भर आए तेरी याद सताए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

हे मेरे शिवरूप गुरुजी

हे मेरे शिवरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
रुद्र महा शिवरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी।।धृ।।

नाम है तेरा तारणहारा
सबके दुखड़े हरते हो तुम
प्रेम सुधा का पान करा के
सबको पावन करते हो
तुमही हो सब रूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

पावन सबसे ज्ञान की गंगा
आपके मुख से बहती है
ब्रह्म गुरु के वचनों में है
सारी श्रुतियाँ कहती है
सबमें तेरा रूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

मंगल दर्शन गुरुवर तेरा
जिसने भी कभी पाया है
जनम जनम की प्यास मिटी
जो तेरे दर पे आया है
रुद्र महा शिवरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

सिंधु दया के प्रेम के सागर
विनती मेरी सुन लेना
सेवक जान सदा चरणों में
मुझको अपने रख लेना
तेरे रहूँ अनुरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

कैलाशी काशी के वासी
घट घट वासी अविनाशी हो
ह्रदय बिहारी भव भयहारी
त्रिपुरारी तुम सुखराशी हो
तुम ही हो सब रूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

गुरु सुखकारक गुरु दुःखवारक

गुरु सुखकारक
गुरु दुःखवारक
मुख मुद्रा मनोहारी
गुरु की महिमा भारी
मेरे गुरु की महिमा भारी।।धृ।।

गुरु का संग मिला है जबसे
तबसे बात बनी है न्यारी
प्रगट सुबुद्धि गुरु के वचन से
वाणी लगे मोहे प्यारी
गुरु की महिमा भारी...

धर्म सिखाया मार्ग दिखाया
गुरुवर है मेरे परम् उपकारी
गुरु ने ही गोविंद बतायो
निर्बलता को निवारी
गुरु की महिमा भारी...

जय गुरु जय गुरु जय हो तुम्हारी
एक अर्जी तुम सुन लो हमारी
सारी उमर करूँ चरणों की पूजा
बेड़ो लगा दियो पारी
गुरु की महिमा भारी...

गुरु सुखकारक, 
गुरु दुःखवारक
मुख मुद्रा मनोहारी,
गुरु की महिमा भारी,
मेरे गुरु की महिमा भारी

आनंदरूपा जय गुरुदेवा

आनंदरूपा जय गुरुदेवा
परम् स्वरूपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ ।।धृ।।

पूर्ण स्वरुपा जय गुरुदेवा
निराकार रूपा जय गुरुदेवा
निरंजन रूपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ

केशव स्वरुपा जय गुरुदेवा
परम् स्वरुपा जय गुरुदेवा
आनंदरूपा जय गुरुदेवा
ब्रह्म स्वरुपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ

सदगुरू सा नही और जगत में
परम् दयालू परम् कृपालू
सदगुरू सा नही और जगत में
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ


सात समंदर पार ना

सात समंदर पार ना
सातवे आसमान में
मात-पिता गुरु सम ना कोई
इस सारे जहान में
वंदन है गुरु के चरणों में
वंदन गुरुवर के चरणों में
शत शत अभिनंदन
शत शत अभिनंदन

प्रथम गुरु है माता जिसने
हमको दूध पिलाया है
संस्कारों का सिंचन करके
उन्नत हमें बनाया है
माँ की महिमा शास्त्र बखाने
माँ ममता की खान है
वंदन है गुरु के चरणों में...

नन्हासा मैं फूल हूँ मैय्या
तो वृक्षों की डाली है
मैं तो हूँ छोटीसी बगिया
तू उसकी हरियाली है
बगिया के फूलों सी मैय्या
तेरी ये मुस्कान है
वंदन है गुरु के चरणों में..

पिता ने हमको पढ़ा लिखाकर
विद्यावान बनाया है
अपना साथी आप बनो ये
सुंदर सूत्र सिखाया है
कर्मयोग की शिक्षा का तो
करते हम गुणगान है
वंदन है गुरु के चरणों में...

मातृ पितृ भक्ति को जिसने
जीवन में अपनाया है
श्रवण कुमार भीष्म विघ्नेश्वर 
को आदर्श बनाया है
ऐसे मातृ पितृ भक्तों की 
महिमा अपरंपार है
वंदन है गुरु के चरणों में

बापू ने भी मातृ पितृ 
भक्ति से सबकुछ पाया है
स्वामी लीलाशाह गुरु का
ज्ञान प्रसाद लुटाया है
गुरुवर मेरे प्यारे जोगी
गुरु मेरे भगवान है
वंदन है गुरु के चरणों में..
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आज परम् आनंद मिला

आज परम् आनंद मिला
सच्चा सुख आज ही पाया है
मात-पिता के चरणों में जब
मैंने शीश झुकाया है

कर पूजन स्वीकार मेरा
दीजिए ये आशिर्वाद मुझे
जबतक मेरी सांस चले रहे
ये पावन दिन याद मुझे

आशीर्वाद हमारा बच्चों 
सदा तुम्हारे साथ रहे
दुआ हमारी और गुरुवर की
कृपा तुम्हारे साथ रहे
याद हमेशा तुम्हें हमारी
बच्चों बस ये बात रहे
मातृ पितृ भक्तों के सर पे
सदा गुरु का हाथ रहे
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ 
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पूजन करूँ मैं मात पिता का

पूजन करूँ मैं मात पिता का 
निज संस्कृति अपनाऊँ मैं
गुरुवर के संकेत पे चल के 
जीवन सफल बनाऊँ मैं

तिलक लगाओ हार पहनाओ
मेरी प्यारी मैय्या को
दीप जलाओ पुष्प चढ़ाओ
वंदन करता हूँ उनको
भारत पुण्य धरा की महिमा
निज आदर्श बनाऊँ मैं
पूजन करूँ...

शीश झुकाऊँ फेरे लगाऊँ
आपका आशीष पाऊँ मैं
तन मन अर्पित जीवन मेरा
चरणों में ही लगाऊँ मैं
कर्ज है मुझपर मात पिता का
कैसे उसे चुकाऊँ मैं
पूजन करूँ...

जिस माँ ने हमें नौ मास तक 
गर्भ में बहुत संभाला है
जीवन के सुख दुःख सह के भी
कैसे हमको पाला है
मात पिता गुरु चरणों में ही
मेरे चारों धाम है
पूजन करूँ...

गीले में ही खुद सोकर मुझको
सूखे में ही सुलाया है
भूखी रहकर उसने मुझको
अपना कौर खिलाया है
उस माँ का ऋण कैसे चुकाऊँ
माँ ममता की खान है
पूजन करूँ...

जीवन में सबकुछ मिल जाए
मात पिता ना मिलते है
मात पिता गुरु सेवा से 
किस्मत रेखा बदले है
उनकी आज्ञा में चलना ही 
मेरा सच्चा धर्म है
पूजन करूँ...

बापू ने लीलाशाहजी की 
सेवा कर यह फल पाया
ब्रम्हज्ञान को हँसते गाते
हम सबको है सिखलाया
लाखों मिलते मात पिता दिल
तब सद्गुरु दिल बनता है
पूजन करूँ...
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ॐ जय जय मात-पिता

ॐ जय जय मात-पिता
प्रभू गुरुजी मात-पिता
सद्भाव देख तुम्हारा
मस्तक झुक जाता
ॐ जय जय मात-पिता

कितने कष्ट उठाए 
हमको जन्म दिया
मैय्या पाला बड़ा किया
सुख देती दुःख सहती
पालनहारी माँ
ॐ जय जय मात-पिता

अनुशासित कर आपने
उन्नत हमें किया
पिता आपने जो हैं दिया
कैसे ऋण मैं चुकाऊँ 
कुछ न समझ आता
ॐ जय जय मात-पिता

सर्व तीर्थमई माता
सर्व देव में पिता
जो कोई इनको पूजे
पूजित हो जाता
ॐ जय जय मात-पिता

मात-पिता की पूजा
गणेशजी ने भी की
सर्व प्रथम गणपति को
ही पूजा जाता
ॐ जय जय मात-पिता

बलिहारी सद्गुरु की
मार्ग दिखा दिया
सच्चा मार्ग दिखा दिया
मातृ पितृ पूजन कर
जग जय जय गाता
ॐ जय जय मात-पिता

मात-पिता गुरु की
आरती जो गाता
है प्रेम सहित गाता
वो संयमी हो जाता
सदाचारी हो जाता
भव से तर जाता

लफंगे लफ़ंगियों की 
नकल छोड़
गुरु सा संयमी होता
गणेशजी सा संयमी होता
स्वयं आत्मसुख पता
औरों को पवाता

ॐ जय जय मात-पिता
प्रभू गुरुजी मात-पिता
सद्भाव देख तुम्हारा
मस्तक झुक जाता
ॐ जय जय मात-पिता

चाहे जैसे मुझे रख लो

चाहे जैसे मुझे रख लो कुछ ना कहूँगा मैं
तेरा ही था तेरा ही हूँ तेरा रहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तुम्हारे नाम का का मोती मेरी दौलत है
ये रुतबा और ये शोहरत भी तेरी बदौलत है
तू है सागर मैं हूँ कतरा तुझ संग बहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

मेरा मन अब नही लगता है जग की बातों में
अपनी उंगली थमा दी मैंने तेरे हाथों में
जिस तरफ ले चलो मुझको वही चलूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

गम की रातें लगें कि जैसे सुख का सवेरा है
बस तू एक बार कह दे कि हाँ तू मेरा है
फिर तो हर एक सितम हँस कर ही सहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

जिसकी अटकी है जान तुझमें मैं वो परिंदा हूँ
तू मेरे साथ है इस आस पे मैं तो जिंदा हूँ
हमारी आस जो टूटी तो जी ना सकूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...
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मेरे दिल में बसे गुरुदेव तुम हो


मेरे दिल में बसे गुरुदेव तुम हो
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

जमाना राह में काँटे बिछाता
मुझे क्या मैं तो तेरी राह चलता 
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

तुझे मिलने को दिल बैचैन रहता
तुझे देखे तो दिल को चैन पड़ता
मेरे मालिक मेरी दुनिया तुम हो
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

जुदा रहना गँवारा कैसे होगा
तेरी चाहत से मेरी झोली भरना
मेरे प्रियतम मेरे सरताज तुम हो
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...
जमाना राह में काँटे बिछाता
मुझे क्या मैं तो तेरी राह चलता 
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...






साथ तुम ही हो

साथ तुम ही हो, पास तुम ही हो
हर साधक की आस तुम ही हो

जल बिन जैसे मछली तड़पती 
ऐसा अपना हाल है
देर न करियो ओ मेरे बापू
तुम बिन सब बेहाल है
जाने कहाँ उड़ी चैन हमारी
जिए भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

तरस रही हैं अखियाँ सबकी
हे गुरुवर अब आ भी जाओ
बरस बरस कर नैना पुकारें 
गुरुवर आ भी जाओ
धैर्य ना अब कहीं टूट जाए सब
 हमको ना तड़पाओ
सूना वीराना जीवन मेरा
रहे भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

ऐसी भी क्या गलती हो गई
दूर जो हमसे हो गए तुम
चाँद बिना चकोर रहे ना
स्वाति बिन जो चातक
बापू तुम बिन कैसे रहे हम
हम सारे तेरे साधक
तेरा सहारा जिसको मिला हो
भूले तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

देख तुझे हर दिल ये कहता
तुमसा ना कोई और जहाँ में
दामन छोड़ ना जाऊँगा मैं
तुमसे सच्चा नाता है
बिगड़ी सबकी बनाने वाले
तू ही पिता तू ही माता है
तेरा मेरा रिश्ता पुराना
कहे भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम 
रहे भी तो कैसे 
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गुरु मेरे

गुरु मेरे ,गुरु मेरे, गुरु मेरे, दाता मेरे, दाता मेरे
भरोसा मेरा नही हारेगा, है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा ,है भरोसा मुझे
गुरु मेरे ,गुरु मेरे, गुरु मेरे, दाता मेरे, दाता मेरे 

अपनों का बदल जाना ,दुनिया का है दस्तूर
अपनों को निभाने में मेरा गुरु बड़ा मशहूर
मुझे भी अपना तू बनाएगा, है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा, है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

इतिहास गवाह है जब जिसने पुकारा है
जीता ही भरोसा ही जब गुरु सहारा है
मेरा भी गुलशन तू निखरेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

जो कुछ था पास मेरे सब अर्पण कर डाला
अब हाथ उठा करके समर्पण कर डाला
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

भरोसा मेरा नही हारेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे गुरु मेरे गुरु मेरे दाता मेरा गुरु मेरे 

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सुनो न बापू

सुनो न बापू एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
फिर चले गए क्यों जोगी यहाँ कोई नही है अपना

सुनो न बापू एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
सुनो न जोगी एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
फिर चले गए क्यों जोगी यहाँ कोई नही है अपना
फिर चले गए क्यों बापू यहाँ कोई नही है अपना
मीरा ने भक्ति की थी, शबरी ने भक्ति की थी
श्रीराम जी में जितना ,कैसे बताए बापू...

बापू कब आओगे अब तो ये भी हमें बता दो
अब वृक्ष लताएँ भी है कहते बापू को लौटा दो
अब क्या कहूँ मैं उनसे हम भी तड़पे है कितना
श्रीराम जी बिन तड़पे थे भरत जी जितना
कैसे बताए...

एक ही दिल था जोगी मेरा वो भी तुम्हें दिया है
मैंने मोल न जाना था तुमने अनमोल किया है
दिल के बदले तुम्हें माँगे हमें कीमत दो बस इतना
शबरी ने भक्ति की थी,मीरा ने भक्ति की थी
नन्दलाल जी में जितना,कैसे बताए बापू...

कितना गाऊँ कितना सुनाऊँ आप तो बस सुनते हो
कहते ना हो कुछ बस यूँ ही आप तो चुप बैठे हो
कुछ तो बोलो मेरे जोगी कि धैर्य धरे हम कितना
मीरा ने भक्ति की थी, शबरी ने भक्ति की थी
श्रीराम जी में जितना ,कैसे बताए बापू....

फिरसे बहारें आएँगी जब बापू आएँगे
नाँच उठेंगा हर दिल जब हम दर्शन पाएँगे
ऐसे दिन पर कब आएँगे सोचे सदा बस इतना
श्रीराम जी बिन तड़पे थे भरत जी जितना
कैसे बताए बापू....

तसवीर को निहारूँ

तसवीर को निहारूँ ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
गुरुवर तुम्हें पुकारू,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ।।धृ।।

कब आओगे गुरुजी,कबसे टेर लगाऊँ
तसवीर को निहारूँ...

हम सब भटक रहे है, तुम बिन अनाथ होकर
तुम दूर जा बसे हो, औरों के साथ होकर
अब तुमही ये बताओ कैसे तुम्हें बुलाऊँ
तसवीर को निहारूँ...

नियमों को दिल न माने,कानून भी न जाने
दुनिया समझ रही है हम हो गए दिवाने
है अब ये जिद हमारी वापस तुम्हें ले आऊँ
तसवीर को निहारूँ...

निर्दोष हो प्रभूजी ,हम सब ये जानते है
जग माने या न माने, साधक तो मानते है
अब तुमही ये बताओ कैसे तुम्हें बुलाएँ
तसवीर को निहारूँ....

लीला तुम्हारी प्रभूजी जानी है कब किसीने
संतों की सत्य वाणी मानी है कब सभी ने
दुनिया की रीत है ये चाहूँ न बदल पाऊँ

तसवीर को निहारुँ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
कब आओगे गुरुजी,कबसे टेर लगाऊँ
गुरुवर तुम्हें पुकारुँ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
तसवीर को निहारुँ....
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अब तो प्रभू आ जाओ

अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ

नैना झरझर बहते हैं मोरे दूरी अब तो मिटाओ
चुपके चुपके चुपके  देखते हो तुम 
यूँ ना मोहे सताओ,यूँ ना मोहे सताओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ

तुम बिन सूना आँगन ये मेरा ताके बाँट तिहारी
कलियाँ तुम बिन मुरझा गई है गुमसुम ये फुलवारी
गुमसुम ये फुलवारी,गुमसुम ये फुलवारी
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ

नैना झरझर बहते हैं मोरे दूरी अब तो मिटाओ
चुपके चुपके चुपके  देखते हो तुम 
यूँ ना मोहे सताओ,यूँ ना मोहे सताओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ
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तुम न आए प्रभूजी

तुम न आए प्रभूजी कि शाम हो गई
मेरी पूजा की थाली सजी रह गई
भोग रखा फूल रखे मुरझा गए
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

हमसे रूठे हो क्या आप आते नही
भूल अपराध मेरे बताते नही
तेरे चरणों में बैठे बैठे शाम हो गई
मन में दर्शन की इच्छा बनी रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

ध्यान भी कर लिया ज्ञान भी सुन लिया
तेरे चरणों मे रहकर के सब मिल गया
मन में आशा अब ये ही बनी रह गई
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए गुरुजी...

कईं जन्मों से नाता मेरा आपका
आप मेरे प्रभु मैं हूँ अब आपका
तेरी करूणा से नई जिंदगी मिल गई
मन में दर्शन की इच्छा बनी रह गई
तुम न आए गुरुजी...

राहों में तेरे पलकें बिछा रहे
आ जाओ गुरुदेव हम बुला रहे
तेरे बिन ये जीवन वीरान हो गए
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

कब आओगे अब तो बता दो जरा
राह आने की अब तो दिखा दो जरा
झलक कैसे मिले अँखियाँ तरस गई
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...
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स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर 
बाँधी है जीवन डोर
दिल मेरा लगा ही रहता 
हर पल तेरी ओर ।।धृ।।

नैनों के दर्पण में गुरुवर 
तुमको सदा ही देखूँ
क्या से क्या बनाते हो 
हर पल यहीं मैं सोचूँ
मन आँगन में अब तो बाबा 
नाचे है खुशियों के मोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...

तुमने ही चमकाया गुरुवर 
तकदीर का ये सितारा
नाज करूँ मैं भाग्य पे अपनी 
पाकर तेरा ही सहारा
तेरी निगाहों में हमने देखी
स्वर्णिम युग की भोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...

तेरी एक नजर में हम तो
जन्मों के सुख पाए
तेरी ही महिमा के गुरुवर 
गीत सदा हम गाए
पाके अनोखा प्यार तेरा हम 
हो गए भावविभोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...
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अब सुन लो हम सबकी पुकार

अब सुन लो हम सबकी पुकार 
कि करते है हम इंतज़ार
आ जाओ हे मेरे भगवान 
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार।।धृ।।

हर बंधन को तोड़ने वाले 
इस बंधन पर आओ
तरस गई है अखियाँ सबकी 
आ के दरश दिखाओ
बाँध रखी है तुमसे ही आस 
कि होगा तेरा दीदार
सुन लो मेरी अब तो पुकार
कि करते है हम इंतज़ार

नम हुई अखियाँ आज भी प्यारे 
करती है तेरा इंतज़ार
कैसे कहे हम कैसे बताए
 इनको तेरी ही आस
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है हम इंतज़ार

विरह की घड़ियाँ कटती नही है
अब ना देर लगाओ
दर्शन सत्संग देकर बापू 
हमको पार लगाओ
विरह अगन को अब तो बुझाओ
सुन लो हमारी पुकार
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार

दिल की सबकी सुनने वाले
क्यों न सुनते हमारी 
हर पल हर घड़ी मेरे जोगी
आस लगी है तुम्हारी
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार
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ऐ मेरे तारणहारे

ऐ मेरे तारणहारे तू ही बता दे 
तेरा दर्शन कब होगा
अब और ना सताओ

तुमसे जुड़ी है साँसे हमारी
हर धड़कन में छवि है तुम्हारी
तुम ही तीरथ धाम हमारे
हर पल बापू बापू पुकारें
तू ही बता दे तेरा दर्शन कब होगा
अब और ना सताओ
ऐ मेरे तारणहारे...

आपके बिन सूनी दुनिया हमारी
इस जीवन में तुम ही मुरारी
दर्शन के बिन चैन न आए
आपके बिन अब प्रभु रहा नही जाए
तू ही बता दे ...

हालत अपनी क्या हम बताएँ
आपके बिन अब कहीं चैन न पाए 
हर पल आपकी याद सताए
आपके बिन प्रभु जिया नही जाए
तू ही बता दे ...

राह में बैठे पलकें बिछाएँ

राह में बैठे पलकें बिछाएँ
है तरसती दरश को निगाहें

आज सतगुरु हमारे कहाँ है
दिल हमारे उनके बिन तन्हा है
रो रही रूह बाँहें फैलाएँ
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

ये खुशी है तो कैसी खुशी है
बेबसी और बेचारगी है
अश्क आँखों से अब रुक न पाए
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

भाव कैसा ये भक्त मिलन का
रात का था पता ना ही दिन का
वो वक्त भुलाए तो कैसे
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

साधक सब याद करते है तुमको
अपनी सूरत तो दिखला दो हमको
दूर पलभर रहा अब न जाए
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

जगमग जगमग ज्योत जले-आरती

जगमग जगमग ज्योत जले
मेरे बापू के दरबार में
आओ रे भक्तों
आओ रे भक्तों भक्ति कर लो
बापू के दरबार में
जगमग जगमग ज्योत जले
 मेरे बापू के दरबार में...

निशदिन तेरा नाम पुकारें
निशदिन तेरी ज्योत जलावे
आओ रे भक्तों...

ऐसी अंतर ज्योत जलाओ
हम दिनों को पार लगाओ
आओ रे भक्तों...

निराकार है ज्योत तुम्हारी
तीन लोक फैली उजियारी
आओ रे भक्तों….

जिसने बापू का नाम पुकारा
दूर हुआ उसका अंधियारा
आओ रे भक्तों...

नील गगन के चाँद सितारे
ऐसे लगे बापू नयन तुम्हारे
आओ रे भक्तों....

प्रेम सहित जो आरती गावे
दुःख-दारिद्र्य निकट नही आवे
आओ रे भक्तों,आओ रे भक्तों भक्ति कर लो
बापू के दरबार में...
जगमग जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में...

ज्योत से ज्योत जगाओ आरती

ज्योत से ज्योत जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ
मेरा अंतर तिमिर मिटाओ 
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ..

हे योगेश्वर,हे परमेश्वर
हे ज्ञानेश्वर, हे सर्वेश्वर
निज किरपा बरसाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

हम बालक तेरे द्वार पे आए
मंगल दरस दिखाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

शीश झुकाए करें तेरी आरती
प्रेमसुधा बरसाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

साँची ज्योत जगे जो हृदय में
सोहं नाद जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

अंतर में युग-युग से सोई 
चित शक्ति को जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

जीवन में श्रीराम अविनाशी
चरणन शरण लगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

ज्योत से ज्योत जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ
मेरा अंतर तिमिर मिटाओ 
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ



तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी

तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा।।धृ।।

माता पिता सम तुमही हो मेरे
तुम्हारी सेवा में समर्पित रहूँगा

तुमही सारथी हो जीवन के रथ के
तुम्हें मित्र हरदम बनाए रहूँगा

मैं हूँ आज तुम हो अहोभाग्य मेरे
तुम्हें दिल में अपने बिठाए रहूँगा
तुमही मेरे सतगुरु....

भले आँधियाँ आए तूफान आए
चरणों की पतवार पकड़े रहूँगा

संभाले ही रहना मेरी डोर सतगुरु
तुम्हारी पतंग बनके उड़ता रहूँगा

मैं जो कुछ भी जैसा तुम्हारा हूँ स्वामी
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा

करो मुझको स्वीकार हे मेरे बापू
तुम्हारे लिए मैं समर्पित रहूँगा

तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा

माता पिता सम तुमही हो मेरे
तुम्हारी सेवा में समर्पित रहूँगा

तुमही सारथी हो जीवन के रथ के
तुम्हें मित्र हरदम बनाए रहूँगा

भले आँधियाँ आए तूफान आए
चरणों की पतवार पकड़े रहूँगा

मैं जो कुछ भी जैसा तुम्हारा हूँ स्वामी
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा

करो मुझको स्वीकार ओ मेरे बापू
तुम्हारे लिए मैं समर्पित रहूँगा

तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा
माता पिता सम तुमही हो मेरे
तुम्हारी सेवा में समर्पित रहूँगा
तुमही सारथी हो जीवन के रथ के
तुम्हें मित्र हरदम बनाए रहूँगा
भले आँधियाँ आए तूफान आए
चरणों की पतवार पकड़े रहूँगा
मैं जो कुछ भी जैसा तुम्हारा हूँ स्वामी
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा
तुम्हारे लिए में समर्पित रहूँगा

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श्री सद्गुरु चालीसा

।। अथ श्री सद्गुरु चालीसा ।।

दोहा
ॐ नमो गुरुदेव जी, सबके सरजन हार।
व्यापक अंतर बाहर में, पार ब्रह्म करतार ।।1।।
देवन के भी देव हो, सिमरू मैं बारम्बार।
आपकी किरपा बिना, होवे न भव से पार ।।2।।
ऋषि-मुनि सब संत जन, जपें तुम्हारा जाप।
आत्मज्ञान घट पाय के, निर्भय हो गये आप ।।3।।
गुरु चालीसा जो पढ़े, उर गुरु ध्यान लगाय।
जन्म-मरण भय दुःख मिटे, काल कबहुँ नहीं खाय ।।4।।
गुरु चालीसा पढ़े सुने, रिद्धि-सिद्धि सुख पाय।
मन वांछित कारज सरें, जन्म सफल हो जाय ।।5।।

चौपाई
ॐ नमो गुरुदेव दयाला, भक्तजनों के हो प्रतिपाला ।।1।।
पर उपकार धरो अवतारा, डूबत जग में हंस1 (जीवात्मा) उबारा ।।2।।
तेरा दरख करें बड़भागी, जिनकी लगन हरि से लागी ।।3।।
नाम जहाज तेरा सुखदाई, धारे जीव पार हो जाई ।।4।।
पारब्रह्म गुरु हैं अविनाशी, शुद्ध स्वरूप सदा सुखराशी ।।5।।
गुरु समान दाता कोई नाहीं, राजा प्रजा सब आस लगायी ।।6।।
गुरु सन्मुख जब जीव हो जावे, कोटि कल्प के पाप नशावे ।।7।।
जिन पर कृपा गुरु की होई, उनको कमी रहे नहीं कोई ।।8।।
हिरदय में गुरुदेव को धारे, गुरु उसका है जन्म सँवारें ।।9।।
राम-लखन गुरु सेवा जानी, विश्व-विजयी हुए महाज्ञानी ।।10।।
कृष्ण गुरु की आज्ञा धारी, स्वयं जो पारब्रह्म अवतारी ।।11।।
सद्गुरु कृपा है अति भारी, नारद की चौरासी टारी ।।12।।
कठिन तपस्या करें शुकदेव, गुरु बिना नहीं पाया भेद ।।13।।
गुरु मिले जब जनक विदेही, आत्मज्ञान महासुख लेही ।।14।।
व्यास, वसिष्ठ मर्म गुरु जानी, सकल शास्त्र के भये अति ज्ञानी ।।15।।
अनंत ऋषि मुनि अवतारा, सदगुरु चरण-कमल चित्त धारा ।।16।।
सद्गुरु नाम जो हृदय धारे, कोटि कल्प के पाप निवारे ।।17।।
सद्गुरु सेवा उर में धारे, इक्कीस पीढ़ी अपनी वो तारे ।।18।।
पूर्व जन्म की तपस्या जागे, गुरु सेवा में तब मन लागे ।।19।।
सद्गुरु-सेवा सब सुख होवे, जनम अकारथ क्यों है खोवे ।।20।।
सद्गुरु सेवा बिरला जाने, मूरख बात नहीं पहिचाने ।।21।।
सद्गुरु नाम जपो दिन-राती, जन्म-जन्म का है यह साथी ।।22।।
अन्न-धन लक्ष्मी जो सुख चाहे, गुरु सेवा में ध्यान लगावे ।।23।।
गुरुकृपा सब विघ्न विनाशी, मिटे भरम आतम परकाशी ।।24।।
पूर्व पुण्य उदय सब होवे, मन अपना सद्गुरु में खोवे ।।25।।
गुरु सेवा में विघ्न पड़ावे, उनका कुल नरकों में जावे ।।26।।
गुरु सेवा से विमुख जो रहता, यम की मार सदा वह सहता ।।27।।
गुरु विमुख भोगे दुःख भारी, परमारथ का नहीं अधिकारी ।।28।।
गुरु विमुख को नरक न ठौर, बातें करो चाहे लाख करोड़ ।।29।।
गुरु का द्रोही सबसे बूरा, उसका काम होवे नहीं पूरा ।।30।।
जो सद्गुरु का लेवे नाम, वो ही पावे अचल आराम ।।31।।
सभी संत नाम से तरिया, निगुरा नाम बिना ही मरिया ।।32।।
यम का दूत दूर ही भागे, जिसका मन सद्गुरु में लागे ।।33।।
भूत, पिशाच निकट नहीं आवे, गुरुमंत्र जो निशदिन ध्यावे ।।34।।
जो सद्गुरु की सेवा करते, डाकन-शाकन सब हैं डरते ।।35।।
जंतर-मंतर, जादू-टोना, गुरु भक्त के कुछ नहीं होना ।।36।।
गुरु भक्त की महिमा भारी, क्या समझे निगुरा नर-नारी ।।37।।
गुरु भक्त पर सद्गुरु बूठे2 (बरसे), धरमराज का लेखा छूटे ।।38।।
गुरु भक्त निज रूप ही चाहे, गुरु मार्ग से लक्ष्य को पावे ।।39।।
गुरु भक्त सबके सिर ताज, उनका सब देवों पर राज ।।40।।

दोहा
यह सद्गुरु चालीसा, पढ़े सुने चित्त लाय।
अंतर ज्ञान प्रकाश हो, दरिद्रता दुःख जाय ।।1।।
गुरु महिमा बेअंत है, गुरु हैं परम दयाल।
साधक मन आनंद करे, गुरुवर करें निहाल ।।2।।
1 जीवात्मा 2 बरसे
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ