Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

रब्ब मेरा सतगुरु बन के आया

रब्ब मेरा सतगुरु बन के आया
 मैनू वेख लें दे।मैनू वेख लैन दे, 
मथ्था टेक लैन दे॥

बूटे बूटे पानी पावे,सूखे बूटे हरे बनावे।
नी ओ आया माली बन के,
मैनू वेख लें दे॥

जिथ्थे वी ओह चरण छुआवे,
पत्थर वी ओथे पिघलावे।
नी ओह आया तारणहारा,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी महिमा गाई ना जाए,
त्रिलोकी इथे झुक जावे।
नी ओ आया पार उतारण,
मैनू वेख लैन दे॥

ब्रह्म गायन दी मय पिलावे,
जो पी जावे ओह तर जावे।
एह ब्रह्म दा रस स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी सूरत रब दी सूरत,
कर दे मुरादे सब दी पुरन।
नी ओह रब दा पूरण स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी चरनी तीरथ सारे,
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे।
नी ओह आया पार उतारण,
मैनू वेख लैन दे॥

जनम मरण दे चक्कर कटदे,
जेहड़े इसदे दर दे झुकदे।
नी ओह रब्ब दा पूरण रूप,
मैनू देख लैन दे॥

नाम दी इसने प्याऊ लगाईं,
राम नाल दुनिया झुमाई।
एहदे नाम दा अमृत पी के
मैनू वेख लैन दे॥

सत्संग एस दा बड़ा निराला,
जीवन विच करदा है उजाला।
मेरे रब्ब दा ज्योति स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

प्रीत है उसदी बड़ी अनोखी,
नाम दी दौलत कदे ना फुट्दी।
नी ओह आया जग नू झुमावन,
मैनू वेख लैन दे॥

घट घट सब दे ज्योत जगावे,
मोह माया दे भरम मिटावे।
एह मिठ्ठी निगाह बरसावे,
मैनू वेख लैन दे॥
राम नाम  दी बोली प्यारी,
गंगा जी वी बनी पुजारी।
सब तीरथ होए निहाल,
मैनू वेख लैन दे॥

मेरे सद्गृरु प्यारे

मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

साँई लीलाशाह के मन का ये अनमोल है मोती
इनके नाम की सारे जग में जगती जगमग ज्योति
बड़ा ऊँचा इनका धाम ये पूरी आस करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

जनम जनम के पाप मिटाती इनकी अमृत वाणी
सत्संग में इनके आकरके बदल जाए जिंदगानी
ऐसा देते है पैगाम  ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

संत कबीर और तुलसी नानक नजर है इनमे आते
मुनि वसिष्ठ और वेद व्यास भी कभी है झलक दिखाते
कभी बनके राम और श्याम ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

प्राणों के पंछी चहके मधुर गुनगुनाए 
श्वासों की ये स्वर लहरी यहीं मंत्र गाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

जन्मों का लेखा जोखा पढ़ा नही जाए
जो कुछ भी सुख दुःख देखा कहा नही जाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

तेरे सर पे हाथ गुरु का क्यों घबराए
कर्म भूमि कर्म किये जा क्यों ललचाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

माया के मोह जाल में पंछी फँस जाए
राग द्वेष तृष्णा घेरे चैन न पाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

जीवन समर्पण करदे गुरु के चरण में 
सबकुछ मिलेगा तुमको उनकी शरण में
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

भाव दो भक्ति दो

भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
धर्म वरदान दो,सत्य का ज्ञान दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो..

मेरे गुरु है जहाँ वहाँ पे अँधेरा नही
है सदा सुख वहाँ दुःख का डेरा नही
जाऊँ तेरी शरण पाऊँ तेरे चरण
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए

तूने मुझको रचा ,मैं हुँ रचना तेरी
तू है मेरा कवि, मैं हुँ कविता तेरी
प्राण दीपक जले, साँस जबतक चले
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए

गुरु सुनते रहे और मैं सुनाता रहूँ
बीते सदियाँ यूँही ,गीत गाता रहूँ
मेरा बनके रहे मुझको अपना कहे
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए

भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
धर्म वरदान दो,सत्य का ज्ञान दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो..

मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया
मुरझाया था जीवन जो मेरा आज फिरसे खिल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

सत्संग के ही प्रताप से दुःख दर्द सारे टल गए
अगणित जनम के पाप का कूड़ा भरा वह जल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

कहते है कोई क्या मिला ,समझा उसे सकते नही
बिछुड़ा ना पलभर भी कभी था उससे मिलना हो गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

फूला हुआ फिरता सदा निज मूर्खता अभिमान में
मिली संत चरणों की कृपा,अभिमान असूर निकल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

बेहोश रहता था सदा सुख भोग की आसक्ति में
गुरुज्ञान के ही प्रकाश से मुरझा पड़ा वह खिल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

परमात्मा परिपूर्ण है सब देश मे सब काल में
सतरंगी सुंदर मन मेरा घनश्याम रंग में रंग गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया
मुरझाया था जीवन जो मेरा आज फिरसे खिल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये

हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

लीजिये हमको शरण में हम सदाचारी बने
ब्रम्हचारी धर्मरक्षक वीर व्रतधारी बने
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

निंदा किसीकी हम किसीसे भूलकर भी ना करें
ईर्षा किसीकी हम किसीसे भूलकर भी ना करें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

सत्य बोले झूठ त्यागे मेल आपस में करें
दिव्य जीवन हो हमारा यश तेरा गाया करें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

जाए हमारी आयु हे प्रभु लोक के उपकार में
हाथ डाले हम कभी ना भूलकर अपकार में
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

मातृ भूमि मातृ सेवा हो अधिक प्यारी हमें
देश में सेवा मिले निज देश हितकारी बनें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

कीजिये हमपर कृपा ऐसी ऐ परमात्मा
मोह मद मत्सर रहित होवे हमारी आत्मा
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

प्रेम से हम गुरुजनों की नित्य ही सेवा करें
प्रेम से हम दुःखी जनों की नित्य ही सेवा करें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये

हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये
हुँ अधम आधीन अशरण अब शरण में लीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

खा रहा गोते हुँ मैं भवसिंधु के मजधार में
आसरा कोई न देता, आप ही कुछ कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

मुझमे है जप-तप न साधन और ना कोई ज्ञान है
ज्ञान का दीपक जलाकर दिल को रौशन कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

पाप बोझे से लदी नैय्या भवर में आ रही
नाथ आओ अब बचाओ पार इसको कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

आप भी यदि छोड़ देंगे फिर कहाँ जाऊँगा मैं
जन्म के सारे दुःखों से मुक्त मुझको कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

सब जगह मैंने भटककर अब शरण ली आपकी
शरणागत की लाज रखलो, चरणों में रख लीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....
हुँ अधम आधीन अशरण अब शरण में लीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

बड़े प्रेम से सब मिल बोलो

बड़े प्रेम से सब मिल बोलो ,वाणी में अमृत घोलो
अंतर घट के पट खोलो, गुरुदेव की शरण में हो लो
फिर नयन मूंद कर बोलो,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

जब घोर अंधेरा छाए ,कोई राह नजर नही आये
जब मन तेरा घबराए,पीड़ा दुःख - दर्द डराए
मन बार बार दोहराए,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

मानव तन में हम आये,सपनों के महल सजाए
माया में मन ललचाए, जीवन यूँ ही ढल जाए
गुरुदेव ही पार लगाए,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

सत्कर्म ही ज्ञान सिखाए, सुमिरन से ही सुख पाए
जो दया धर्म अपनाए,वो जीवन सफल बनाए
नित झूम झूम कर गाए,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम

बड़े प्रेम से सब मिल बोलो ,वाणी में अमृत घोलो
अंतर घट के पट खोलो, गुरुदेव की शरण में हो लो
फिर नयन मूंद कर बोलो,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

भाव का भूखा हुँ मैं

भाव का भूखा हुँ मैं, बस भाव ही एक सार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है।।धृ।।

अन्न,धन अरु वस्त्र ,भूषण कुछ न मुझको चाहिए
आप हो जाए मेरा बस पूर्ण यह सत्कार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

भाव बिन सबकुछ भी दे तो मैं कभी लेता नही
भाव से एक फूल भी दे तो मुझे स्वीकार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

जो भी मुझमे भाव रखके आते है मेरी शरण
मेरे और उसके हृदय का एक रहता तार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

बाँध लेते भक्त मुझको प्रेम की एक डोर से
इसलिए इस भूमि पर होता मेरा अवतार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

भाव का भूखा हुँ मैं, बस भाव ही एक सार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है।

तुमही राम मेरे

तुमही राम मेरे,कन्हैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो ।।धृ।।

जिधर देखता हुँ नजर तुमही आते
सभी भक्त साधक तेरे गीत गाते
शब्दों की माला के गवैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....

न जानू मैं भक्ति , न जानू पूजा
सिवा तेरे सद्गुरु नही कोई दूजा
नसीबों के मेरे रचैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....

पाप को मिटा के धरम को सँवारा
मेरे प्यारे गुरुवर ने भक्तों को तारा
दुखड़ों की धूप में छैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....

पैश्चिम में बैठे,पूरब की जाने
उत्तर या दक्षिण हो सभी तुमको माने
चारों दिशाओं के रचैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....


तकदीर सँवर गयी म्हारी

तकदीर सँवर गयी म्हारी
तकदीर सँवर गयी म्हारी
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं।।धृ।।
मुझे रत्नों की मिल गयी ढेरी
मन्ने रत्नों की मिल गयी ढेरी
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...
हरि ॐ.. मेरी थी कोई नेक कमाई
मेरी थी कोई नेक कमाई
हो जी हो ..मेरी थी कोई नेक कमाई
जो आज मुझे ले आयी
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...
हरि ॐ..जीवन क्या है ये जाना
जीवन क्या है ये जाना
हो जी हो.. जीवन क्या है ये जाना
मैने खुद को पहचाना
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...
हरि ॐ.. शुभ वचन सुणे जब थारे
शुभ वचन सुणे जब थारे
हो जी हो..शुभ वचन सुणे जब थारे
मैने धाम देख लिए सारे
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...



उमर चली खाली कर चली

उमर चली ,खाली कर चली 
हाँ ,हाँ , उमर चली, खाली कर चली 
काया की ये खोली...।।धृ।।
बस कुछ साँसे और बची है 
जाग मेरे हमजोली
उमर चली...

नैनों की खिड़की के काँच हुए मैले
अब वो चमक है कहाँ जो थी पहले 
मन के द्वार पे मैल है इतनी
देखके आत्मा डोली
उमर चली....

तुझको ये खोली हरि ने जब दी थी
नई नवेली थी साफ सुथरी थी
तूने इसके आँगन में पगले 
पाप की खेती बो ली
उमर चली....

माया के जाले कपट की है काई
तूने कभी की न इसकी सफाई
गया दशहरा गुजरी दिवाली
आके चली गयी होली
उमर चली...

नैनों की खिड़की के काँच हुए मैले
अब वो चमक है कहाँ जो थी पहले
मन के द्वार पे मैल है इतनी
देखके आत्मा डोली
उमर चली...



स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार

स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार
हमपर यूँ ही रहे बरसता सदा तुम्हारा प्यार...
साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हो,साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ

तेरे आँगन में मिलते हमें जीवन के सुख सारे 
तेरे ही दर्शन से कट जाते पाप हमारे
कहाँ मिलेगी ऐसी ज्योति इतना सुंदर द्वार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार....

मात-पिता तुम मेरे तुम संगी- साथी सहारे
अब मेरा यह जीवन चरणों में रहे तुम्हारे
तेरी पूजा कर न सका तो जीवन है बेकार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार...

जब जब कष्ट हुए है तुमने ही कष्ट निवारे
तुमही हो जीवन साथी तुम ही भगवान हमारे
इसी जनम में कर दो साँई हमको भव से पार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार....

ऋषि मुनि पाते है जो आनंद शांति अपार
वोही आनंद हमें मिलता है कर सतगुरु के दीदार
बापू का ये प्यार न रूठे ना छूटे गुरुद्वार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार
हमपर यूँ ही रहे बरसता सदा तुम्हारा प्यार
साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हो,साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ

सद्गुरु सा ना कोई जगत में

सद्गुरु सा ना कोई जगत में ,उनका ही गुण गान करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....

गुरु रूप में शिवजी आए, करने भक्तों का उद्धार
महिमा इनकी न जाने कोई, इनके तो है रूप हजार
दर्शन गुरु के करो हमेशा,सुबह सवेरे जाप करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....

मुनी पुत्र होकर शुकजी ने जनक को गुरु बनाया था
लहणा की थी भक्ति गुरु में गुरु अंगद कहलाया था
गुरुभक्ति में मन को लगाकर तृष्णाओं का नाश करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....

महँगीबा का आसू प्यारा देखो आज है संत महान
लाखों शीश शरण में झुकते हम सबके है वो है भगवान
ज्ञान गंग में गुरु के साधक सतत सभी स्नान करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
सद्गुरु सा ना कोई जगत में ,उनका ही गुण गान करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....


हे गुरुदेव मेरी कुटिया को

हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना
जैसे कृपा की थी शबरी पे वैसे दरस दिखा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना...

बनकर श्याम ,बनकर श्याम सुदामाजी को जैसे तुमने तारा था
बैठके नैय्या,बैठके नैय्यामें केवट की उसको पार उतारा था
अगर किसी दिन,अगर किसी दिन फुरसत हो तो 
मेरे भाग्य जगा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को.. 

पारस है,पारस है श्रीचरण तुम्हारे मुझको सोना कर देंगे
निर्मल पावन,निर्मल पावन इस कुटिया का 
हर एक कोना कर देंगे
अपने चरणों,अपने चरणों की रज
 देकर मेरा मान बढ़ा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना
जैसे कृपा की थी शबरी पे वैसे दरस दिखा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना...

गुरुदेव प्रार्थना है

गुरुदेव प्रार्थना है 
अज्ञानता मिटा दो,सच्ची डगर दिखा दो
श्री सतगुरु शरणम,श्री सतगुरु शरणम,श्री सतगुरु शरणम

हम है तुम्हारे बालक,कोई नही हमारा
मुश्किल पड़ी है जब भी,तुमने दिया सहारा
चरणों में अपने रख लो,चन्दन हमें बना दो
गुरुदेव प्रार्थना है ....

पूजन का तेरे गुरुवर अधिकार चाहते है
थोडासा हम भी तेरा बस प्यार चाहते है
मन में हमारे अपनी सच्ची लगन लगा दो
गुरुदेव प्रार्थना है ....

अच्छे है या बुरे है जैसे भी है तुम्हारे
मुमकिन नही है अब हम किसी और को पुकारे
अपना बना के हमको अपना वचन निभा दो 
गुरुदेव प्रार्थना है 
अज्ञानता मिटा दो,सच की डगर दिखा दो
ॐ सतगुरु शरणम,ॐ सतगुरु शरणम,ॐ सतगुरु शरणम


गुरुदेव मेरे प्यारे तेरे सहारे

गुरुदेव मेरे प्यारे तेरे सहारे
जीवन अपना बिताना है हमें
जिंदगी का साथ निभाना है हमें।।धृ।।
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे तेरे सहारे...

पल पल बीता जाए जीवन
हम कुछ कर ना पाए
मोह माया में फँस के रह गए
अब तो दिल ये चाहे
समय का डर और काल की चिंता
हमको नही सताए
राग द्वेष सब दूर हो मनसे
विपदा नही रुलाए
अज्ञानता मिटा दो,कोई ऐसी दवा दो
जिंदगी से दर्द को मिटाना है हमें
रोते हुए को हँसाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

ABCD याद रही अपनी भाषा ना जानी
सन 47 भूल गए पर भूले नही गुलामी
कोई किसीकी बात न माने सब करते मनमानी
पश्चिम के चक्कर में फँसकर करते रहे नादानी
है सबसे प्यारी, ये भाषा हमारी
सबके जुबान पे लाना है हमे
जीवन सफल बनाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

उनका कैसे होगा भला जो गुरुवर को ही भूले
बिना ज्ञान के कैसे कोई आसमान को छू लें
कलियुग का है असर के देखो दुनिया उल्टी घूमे
अहं की ऊँची डाल पे बाँधे अहंकार के झूले
है प्रार्थना हमारी ,करो रखवारी
सच्चाई का रास्ता दिखाना है हमें
चरणों में अपने बिठाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

गुरुवर तुम बिन मोक्ष न मिलता अब हमने ये जाना
सारी दुनिया ढूँढ के आखिर में तुमको पहचाना
गुरुवर सच्चा नाम ये तेरा सुखों का खजाना
नूरानी सूरत ने तेरी कर दिया हमें दिवाना
इंसाफ कर देना माफ कर देना
भटके को रास्ते पे लाना है हमें
जिंदगी का साथ निभाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

गुरु चरणों की करूँ वंदना

गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
गुरुचरणों की धूल बनू मैं
जीवन सफल बनाऊँ
यही मेरी कामना है।।धृ।।
गुरु के चरण को तजके
बोलो जहाँ में कहाँ जाऊँ मैं
आँखे खुले जो मेरी
दर्शन गुरु के सदा पाऊँ मैं
गुरु के चरण को तजके
बोलो जहाँ में कहाँ जाऊँ मैं
मन को अपने मंदिर कर लूँ
गुरुवर को बैठाऊँ
यही मेरी कामना है
गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
पापों का सागर दुनिया
गुरु का सहारा मुझे चाहिए
जानू ना जंतर मंतर
जानू ना जंतर मंतर
नाम तुम्हारा मुझे चाहिए
मैं अज्ञान के अंधकार में
ज्ञान का दीप जलाऊँ
यही मेरी कामना है
गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
दुनिया से टूटे नाता
गुरुवर से नाता नही तोडना
छूटे जमाना चाहे
छूटे जमाना चाहे 
गुरु के चरण को नही छोड़ना
दुनिया से टूटे नाता
गुरुवर से नाता नही तोडना
जब भी दूँ आवाज गुरु को
सदा सामने पाऊँ 
यही मेरी कामना है....
गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
गुरुचरणों की धूल बनू मैं
जीवन सफल बनाऊ
यही मेरी कामना है...

अटको अगर तुम भटको अगर तुम

अटको अगर तुम, भटको अगर तुम
ना बन पाए काम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...।।धृ।।
गम की सुबह हो ,दुःख की दोपहरी
या खुशियों की श्याम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...

वेद पुराण ने आदि काल से गुरुमहिमा गाई
ब्रम्हा हो या विष्णु सबको गुरुभक्ति भाई
गुरुचरणों की कृपा से माटी चंदन हो जाए
गुरुद्वार से भक्त गुरु का जो चाहे पाए
गुरुका, जो चाहे पाए
गुरुवंदन करूँ,गुरु को नमन करूँ
सुबह हो चाहे श्याम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...

गुरुकृपा से मन का सारा दोष निकल जाए
जैसे लोहा पारस छूकर कंचन बन जाए
गुरु चरणों में अर्पित कर दे हर सुख दुःख प्राणी
गुरु की महिमा को जो समझे वो सच्चा ज्ञानी
ज्ञानी,वो सच्चा ज्ञानी
जल में या थल में,चल में अचल में
गुरुवर आए काम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...

गुरुबिन ज्ञान नही मिलता है ,मनो ना मानो
ईश्वर को पाना है तो तुम गुरु को पहचानो
सच्चे मन से जो गुरुवर का सुमिरन कर लेता है
उसके मन में गुरुज्ञान अमृत भर देता है
राम ने पाया,कृष्ण ने पाया
गुरुचरणों से ज्ञान,ले लो तुम गुरुवर का नाम...
अटको अगर तुम...

श्री हनुमान चालीसा

हनुमानचालीसा


                   दोहा

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।।

                चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥

लाय संजीवन लखन जियाए
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥

सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

जै जै जै हनुमान गोसाई
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई॥३८॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

                     दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

जिसने दर्शन इनका पाया वो तो धन्य हुए है

जिसने दर्शन इनका पाया ,वो तो धन्य हुए है
वो तो धन्य हुए है
भवसागर में डूबे थे जो वो तो पार हुए है
वो तो पार हुए है
रहम सब पे करे है, रहम सब पे करे है मेरे गुरुदेव....

सब पे कृपा करते गुरुवर, भक्ति सबमे भरे है
भक्ति सबमे भरे है
चरणों में हम वन्दन करते,भक्त यहाँ तड़पे है
भक्त यहाँ तड़पे है
सबका भाग्य बनाते,सबका भाग्य बनाते है मेरे गुरुदेव
अवतार लेके,अवतार लेके ,अवतार लेके आये है मेरे गुरुदेव
कृपा सबपे करें मेरे गुरुदेव....

इनके जैसा ना कोई दूजा,केवल एक यहीं है
केवल एक यहीं है
दाता विधाता है ये हमारे,दूजी न आस कोई है
दूजी न आस कोई है
सारे जग से निराले है,सारे जग से निराले है मेरे गुरुदेव
कृपा सबपे बरसाते है मेरे गुरुदेव...

गुरु के बताये मार्ग पे तो जो भी शिष्य चले है
जो भी शिष्य चले है
उसकी विपदाएँ और संकट गुरुकृपा से टले है
गुरुकृपा से टले है
सबकी बिगड़ी बनाते है,सबकी बिगड़ी बनाते है मेरे गुरुदेव
अवतार लेके,अवतार लेके ,अवतार लेके आये है मेरे गुरुदेव
कृपा सबपे करें मेरे गुरुदेव....



गुरुवर तू ही है प्यारा

गुरुदेव तू ही है प्यारा,तेरा नाम हरे दुःख सारा
गुरुवर तू ही है प्यारा ,तेरा नाम हरे दुःख सारा।।धृ।।

तू ही कृष्ण श्याम ,पुरुषोत्तम राम,तेरा ही पसारा सारा
गुरुवर तू ही है प्यारा....

काँटों में फूल खिलाते हो,तुम ज्ञान की गंगा बहाते हो
तुम प्रेम के दीप जगाते हो,तुम जीना हमें सिखाते हो
तुमको प्रणाम,तुमको सलाम,तू ही सबसे है न्यारा
गुरुवर तू ही है प्यारा....

चरणों में शीश नवाएँ हम,इस मन में तुम्हें बसायें हम
चाहे जीवन में हो कितने गम,पर प्रीत बढ़े कभी हो न कम
तू सुबह शाम खुशियों का जाम,तेरा ही पसारा सारा
गुरुवर तू ही है प्यारा....

आँखों में नूर तेरा ही है, इस दिल में धड़कन तुझसे है
तुझसे ही साँसे चलती है, तेरी कृपा बिन सब मिटटी है
मन पे लगाम देते पैगाम तुमने ही हमें सँवारा
गुरुवर तू ही है प्यारा....

तेरे नाम की महिमा क्या गाए, वाणी ये वहाँ तक ना जाए
जो भी प्रीती से है ध्याये दुर्लभ को प्राप्त वो कर पाए
शांति विश्राम देता ये नाम जिसने भी इसे पुकारा
गुरुवर तू ही है प्यारा....


हर हर भोले नमः शिवाय


हर हर भोले, हर हर भोले, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

हे गुरुदेवा हे महादेवा, हर हर भोले नमः शिवाय | पुण्यपुंज तुम हो भयहारी, हर हर भोले नमः शिवाय

हे रामेश्वर महाकालेश्वर, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

तुम ही हो भक्तो के आधार, हर हर भोले नमः शिवाय  | सब की पीडा हर ने वाले, हर हर भोले नमः शिवाय

हे नागेश्वर हे त्रयम्बकेश्वर, हर हर भोले नमः शिवाय | नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



आप हो सारे जग के दाता, हर हर भोले नमः शिवाय

आप हो सब के भाग्यविधाता, हर हर भोले नमः शिवाय

हे सोमनाथ केदारनाथ, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



हे गुरुदेवा हे महादेवा, हर हर भोले नमः शिवाय | आप हो सारे जग का सहारा, हर हर भोले नमः शिवाय

हम तेरे और तू है हमारा, हर हर भोले नमः शिवाय | विश्वनाथ जय वैद्यनाथ जय, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



बापू रूप में तुम साकार हो, हर हर भोले नमः शिवाय

आपकी मूरत सबसे प्यारी, हर हर भोले नमः शिवाय

हे त्रिपुरारी गंगाधारी, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



निर्वाणरूपम ब्रह्मस्वरूपं, हर हर भोले नमः शिवाय

नीलकंठ शुभ नेत्रविशालं, हर हर भोले नमः शिवाय

हे भिमाशंकर मल्लिकार्जुन, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



अजर अमर तुम हो अविनाशी, हर हर भोले नमः शिवाय

अंतरयामि सबउर्वासी, हर हर भोले नमः शिवाय

हे माम्लेश्वर हे गुश्मेश्वर, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



द्वादसलिंगम कैलाशवासी, हर हर भोले नमः शिवाय

माया तो है इन की दासी, हर हर भोले नमः शिवाय 

जय अमरनाथ कैलाशनाथ जय, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



त्रिगुणस्वामी हैं सुखकारी, हर हर भोले नमः शिवाय

पतित पावन हैं दुखहारी, हर हर भोले नमः शिवाय

शक्तिदाता शान्तिदाता, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय



हम सब तो प्रभु बालक तेरे, हर हर भोले नमः शिवाय

आपको अनंत वंदन मेरे, हर हर भोले नमः शिवाय

भक्तिदाता मुक्तिदाता, हर हर भोले नमः शिवाय

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय | नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय | हर हर भोले, ॐ नमः शिवाय







ॐॐॐ बापू जल्दी बाहर आयें


ॐॐॐ बापू जल्दी बाहर आयें। बापू जल्दी बाहर आयें।

ये संकल्प हमारा, जल्दी दरश दिखायें।।
 बापू जल्दी बाहर आयें…

भक्तों के लिए तुमने कितने कष्ट सहे। बापू कितने कष्ट सहे।

जब-जब तुम्हें पुकारा, दौड़े चले आये। 
बापू जल्दी बाहर आयें।।

मात-पिता हम सबके, बंधु सखा तुम्हीं। बापू बंधु-सखा तुम्हीं।
तुम बिन कौन हमारा, विनती सुन लो मेरी।
 बापू जल्दी बाहर आयें।।
ज्ञान भक्तिमय अमृत आपने हमको दिया। बापू आपने हमको दिया।
निंदा-अपयश जैसे, विष को स्वयं पिया।
 बापू जल्दी बाहर आयें।।
संस्कृति रक्षा हेतु, है अवतार लिया। बापू ने अवतार लिया।
दोषरहित होकर भी, बँधना स्वीकार किया। 
बापू जल्दी बाहर आयें।।
करूणा सागर गुरुवर लीला कर ये रहे। बापू लीला कर ये रहे।
अंतर्यामी होकर, सब कुछ देख रहे। 
बापू जल्दी बाहर आयें।।
तुमसे हम हैं बापू और न कोई जग में। बापू और न कोई जग में।
तुम ही दूर हुए तो, जायें कहाँ बच्चे ? 
बापू जल्दी बाहर आयें।।
भक्त पुकारें बापू ! अब तो दरश दिखाओ। बापू अब तो दरश दिखाओ।
राह निहारें हम सब, अब न देर करो। 
बापू जल्दी बाहर आओ।।
ॐॐॐ बापू जल्दी बाहर आयें।…

तुलसी माता की आरती



ॐ जय तुलसी माता,जय तुलसी माता
सब जग की सुख दाता, जय तुलसी माता ।।
ॐ जय तुलसी माता...

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर।
रुग्ण से रक्षा करती, माँ तू भव त्राता।।
ॐ जय तुलसी माता...

बटु पुत्री हे श्यामा, सुर बल्ली ग्रामा।
विष्णु प्रिये जो सेवे, सो नर तर जाता।।
ॐ जय तुलसी माता...

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से वंदित।
पतित जनो की तारिणी, तुम हो विख्याता।।
ॐ जय तुलसी माता...

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन।
मानवलोक तुम्ही से, सुख संपति पाता।।
ॐ जय तुलसी माता...

हरि को तुम अति प्यारी, श्यामवरण तुम्हारी।
पावन प्रेम हैं प्रभु का, भक्तों से नाता।।
ॐ जय तुलसी माता...

सब जग की सुख दाता, जय तुलसी माता ।।
ॐ जय तुलसी माता...

उलझ मत दिल बहारों में

उलझ मत दिल बहारों में ,बहारों का भरोसा क्या
सहारे टूट जाते है,सहारों का भरोसा क्या

तमन्नायें जो तेरी है फुहारे है ये सावन की
फुहारे सूख जाती है फुहारों का भरोसा क्या

दिलासे जो जहाँ के है,सभी रंगी बहारें है
बहारे रूठ जाती है,बहारों का भरोसा क्या

तू इन फूले गुब्बारों पर अरे दिल क्यों फ़िदा होता
गुब्बारे फूट जाते है,गुब्बारों का भरोसा क्या

तू सम -बल नाम का लेकर किनारों से किनारा कर
किनारे टूट जाते है किनारों का भरोसा क्या

तू अपनी अक्लमंदी पर विचारों पर न इतराना
जो लहरों की तरह चंचल विचारों का भरोसा क्या

परम प्रभू की शरण लेकर विकारों से सजग रहना
कहाँ कब मन बिगड़ जाए विकारों का भरोसा क्या

उलझ मत दिल बहारों में ,बहारों का भरोसा क्या
सहारे टूट जाते है,सहारों का भरोसा क्या


तोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा सो जायेगा

तोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा सो जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा
धन दौलत और रिश्ते नाते सब पल में छुट जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा।।धृ।।

जिनको तू अपना कहता है,ये न तेरे अपने है
तू रही है जीवन पथ का,ये सब सारे सपने है
टूटेगा जब सपना तेरा,सब अपना हो जायेगा
एक दिन ऐसा आयेगा....

जबसे जग को अपना समझा, जबसे रब को भूल गया
जन्मों से तू आता रहा हर बार गर्भ में झूल गया
अब भी वक्त है सुन ले बन्दे बाद में तू पछतायेगा
एक दिन ऐसा आएगा....

बचपन तेरा बीत गया और जाती तेरी जवानी है
ये जीवन तो कलकल बहता एक नदिया का पानी है
हाथ गुरु का थाम ले वरना बीच भवर डुब जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा....

नही जायेगा लख चौरासी जिसने गुरु को पाया है
बड़भागी है  गुरु संग जिसने जीवन सफल बनाया है
गुरुचरणों से प्रीती कर ले अंत गुरु में समाएगा
एक दिन ऐसा आएगा....

तोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा सो जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा
धन दौलत और रिश्ते नाते सब पल में छुट जायेगा
एक दिन ऐसा आएगा,एक दिन ऐसा आएगा....


ओ सतगुरु प्यारे अपना हमें बना ले

ओ सतगुरु प्यारे अपना हमें बना ले
चरणों में अब लगा ले।।धृ।।

तुम बिन नही है कोई सुध -बुध जो ले हमारी
है खूब खोज देखा मतलब की दुनिया सारी
धोखे के जाल से अब भगवन हमे छुड़ा ले
चरणों में अब लगा ले

कोई नही है संगी,दिन चार के है मेले
सम्बन्ध इस जगत के सब झूठ के झमेले
तू ही न बाह पकड़े तो कौन फिर संभाले
चरणों में अब लगा ले

सत् और असत् का भी भगवान ज्ञान दे दे
अभिलाषा अब ये है,भक्ति का दान दे दे
हम प्रेम के है प्यासे ,दे प्रेम के प्याले
चरणों में अब लगा ले

कृपा से अब मिटा दे दुःख दर्द गम बखेड़ा
बस एक नजर से तेरी हो जाये पार बेडा
भव सिंधु है भयानक,दासों को अब तरा ले
चरणों में अब लगा ले

ओ सतगुरु प्यारे अपना हमें बना ले
चरणों में अब लगा ले





जब जब युग परिवर्तन होता हर युग में अवतारा है

जब जब युग परिवर्तन होता,हर युग में अवतारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है
गुरु चरणों में शीश झुकाया,ये सौभाग्य हमारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है।।धृ।।


मै तो काशी गया ,मैं तो मथुरा गया,
गुरु दर सा न कोई सहारा मिला
रब प्यारा लगे,जग भी प्यारा लगे
गुरुवर जैसा न कोई प्यारा मिला
गुरु चरणों में मेरा मन्दिर,मस्जिद,और गुरुद्वारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है

गुरु माता मेरे,गुरु पिता मेरे,
गुरु बन्धु ,गुरु मेरी आत्मा
गुरु भक्ति मेरी,गुरु शक्ति मेरी
गुरु जीवन मेरे परमात्मा
कण कण में गुरु तत्व समाया
जग की जीवन धारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है

जग के स्वामी मेरे,अंतर्यामी मेरे
हर पल हर घडी तेरा दीदार हो
एक रहमत करो हे दयालु मेरे
मौत आये वहाँ जो गुरुद्वार हो
गुरुवर ज्ञान का दीप जलाये
गुरुवर से उजियारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है

जब जब युग परिवर्तन होता,हर युग में अवतारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है
गुरु चरणों में शीश झुकाया,ये सौभाग्य हमारा है
गुरु ही ब्रम्हा,गुरु ही विष्णु,गुरु ही शिव ओमकारा है।

जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे

जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे
चौरासी से चल रही तेरी भागमभाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे।।धृ।।

बचपन बीता खेल कूद में जग में मौज मनाई है
धन को जोड़ा तन को जोड़ा जबसे जवानी आई है
जाये जवानी आये बुढ़ापा फिर भी जग में सोया है
धिक्कारे है दुनिया उसको व्यर्थ में जीवन खोया है
मौत से पहले अमृत पी ले काल है विषधर नाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे...

भूल गया तू उसको जिसने गर्भ में तुझे खिलाया है
तेरी राह में माँ के तन से जिसने दूध बहाया है
जल अग्नि और अन्न पवन सब तेरे लिए बनाये है
तुझपे अमृत वर्षा करने गुरु रूप में आए है
गुरुचरणों में आजा बन्दे जागे सोये भाग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे....

तन भी छूटा धन भी छूटा छोड़ जगत ये जायेगा
खाली हाथ से आया था और खाली हाथ से जायेगा
मोह माया और धन दौलत में फिर क्यों जीवन खोता है
तूही ब्रम्ह का अंश सनातन फिर काहे को रोता है
अब भी वक्त है हाथ में तेरे फिर लग जाये आग रे
जाग रे जाग रे हे मानव तू जाग रे....





गुरुवर की रहमत से बन्दे

गुरुवर की रहमत से बन्दे ,जग बन्धन सब टूटे
गुरु का प्यार न रूठे,गुरु दरबार न छूटे।।धृ।।

गुरु चरणों से गंगा यमुना निशदिन बहती जाए
गुरु उदर में सात समन्दर दशो दिशा समाए
गुरु हृदय में ब्रम्हा विष्णु,गुरु महिमा को गाए,
गुरु कंठ से ब्रम्ह ज्ञान की नित वर्षा बरसाए
गुरुवर से है रिश्ता सच्चा,बाकि सब है झूठे
गुरु का प्यार न रूठे....

रोम रोम गुरुवर का तीरथ, आँखें सूरज चन्दा
गुरुमुख से अमृत बरसे,छूटे यम का फंदा
गुरु नाम को जप ले प्यारे,गुरु में सब है समाया
राम तभी भगवान कहाए जब वशिष्ठ को पाया
गुरु कृपा सब कुछ दे देती ,माया सब को लूटे
गुरु का प्यार न रूठे...

ईश कृपा मुझपे बरसी तो गुरुदेव को पाया
जैसे सूरज की गर्मी में मिल गयी शीतल छाया
गुरुवर के संतोष मात्र से आत्मज्ञान मिल जाए
गुरुकृपा जो बरस गयी तो भवसागर तर जाए
गुरु ॐ गुरु ॐ जपते जाओ ,लख चौरासी छूटे
गुरु का प्यार न रूठे...

गुरुभक्ति है जिसने पायी उसका बेडा पार है
धन्य हुई ये धरती माता धन्य हुआ संसार है
गुरु मिल जाये सब मिल जाये,बिन सतगुरु ना कोई
मात पिता सुत बान्धव ये सब हर घर घर में होई
ब्रम्ह ज्ञान का रूप है गुरुवर ,नित्य है एक अनूठे
गुरु का प्यार न रूठे....

गुरुवर की रेहमत से बन्दे ,जग बन्धन सब टूटे
गुरु का प्यार न रूठे,गुरु दरबार न छूटे...

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दीप जलाकर ज्ञान के

दीप जलाकर ज्ञान के,दूर करो अंधकार
समता,करुणा,स्नेह से भरो दिल के भण्डार
दिप जलाकर ज्ञान के...

राग द्वेष ना मोह हो हमको,दूर हो विषय विकार
कर उपकार उनपर सदा,जो दीन हीन लाचार
दिप जलाकर ज्ञान के....

हरदम रहता साथ सदा वो,फिर भी है निःसंग
तन मन पावन हो जाता है,पी जब नाम की भंग
दिप जलाकर ज्ञान के...

लीन हुआ चित् नाम नशे में,पाया प्रेम का सार
निज आनंद में मस्त रहे मन,सपना ये संसार
दिप जलाकर ज्ञान के...

वन में तू खोजे ईश कहाँ है,साहिब सब के संग
स्व से मिलने की दिल में जागे तीव्र तरंग
दिप जलाकर ज्ञान के...

भेद भरम संशय को मिटाकर छूट गया अहंकार
रोम रोम में छा गयी है हरि रस की खुमार
दिप जलाकर ज्ञान के...

पा लिया मन के मन्दिर में दिलबर का दीदार
छलका दरिया आनंद का,खुला जो दिल का द्वार
दिप जलाकर ज्ञान के...

मन बुद्धि वाणी से परे है ना रूप रंग आकार
साक्षी सद्गुरु वेश में मेरे प्रभु आये साकार
दिप जलाकर ज्ञान के...

दीप जलाकर ज्ञान के,दूर करो अंधकार
समता,करुणा,स्नेह से भरो दिल के भण्डार
दिप जलाकर ज्ञान के...



आओ प्रेम से गुरु चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ाये हम

आओ प्रेम से गुरु चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम
तन मन सब अर्पण कर गुरु को उनके ही हो जाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

कृपा सिंधु है बापू अपने,सबका मंगल करते है
जो भी आता शरण में इनकी,सबका दुःख ये हरते है
सद्गुरु जी की कृपा दृष्टि से भव सागर तर जाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

ये संसार है सपने जैसा,मिथ्या खेल यहाँ सारा
जो इसमें आसक्त हुआ वो जीवन की बाजी हारा
तारणहार गुरु ही केवल इनकी शरण में जाए हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

विषयों से अपना मन मोड़ो,ये तो है अति दुःखदायी
दिल के तार प्रभु से जोड़ो,परम सुहृद वे सुखदायी
भजन और चिंतन से प्रभु की सात्विक भक्ति पाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

अहंकार और राग द्वेष से मन को शांति नही मिलती
बिना शांति के प्रभु प्रेम की कली हृदय में नही खिलती
जीव मात्र को अपना समझे,अपने प्रिय को पाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम

आओ प्रेम से गुरु चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम
तन मन सब अर्पण कर गुरु को उनके ही हो जाये हम
गुरुवर की आज्ञा में चलकर जीवन सफल बनाये हम