Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

आरती श्री आसारामायण जी की

आरती श्री आसारामायण जी की
शिष्यों की हृदयमल हारणी जी की
कर दे प्रभु परायण जी की

बापू ने किये है जप तप व्रत जो
इसमें लिखित है गुरु चरित वो
सुखकारी मंगल करणी की, आरती श्री - - -

इक इक शब्द पूर्ण है इनका
दोष मिटे जैसे अग्नि में तिनका
शाँति और आनंद दात्री की, आरती श्री - - -

रामायण और गीता के सम
नही है ये किसी शास्त्र से भी कम
छोती सी है पर बड़े लाभ की, आरती श्री - - -

इसे पढ़कर गुरु याद बढ़े है
विघ्न हटे जो राह में खड़े हैं
दोष निवारक, चितपूर्णी की, आरती श्री - - -

सरल सहज और मधुर है भाषा
पूर्ण करती हर अभिलाषा
कष्ट निवारक, दुख हरणी की, आरती श्री - - -

पढकर चढ़े, निराली ही मस्ती
खो जाए प्राणी, मिट जाए हस्ती
ज्ञान भक्ति और योग त्रिवेणी की, आरती श्री - - -

न कोई और है इनके जैसा
कंचन कर दे पारस ऐसा
भव- तारक प्रिय है ये सभी की, आरती श्री - - -

पाठ करे जो निशदिन इसका

पूर्ण करे जो काज हो जिसका

वरदानी, कल्याणी जी की

आरती श्री आसारामायण जी की

कौन कहता है

कौन कहता है पास वो रहते नही
वो तो इक पल जुदा हमसे होते नही
कौन कहता है कृपा वो करते नही
हम ही रहमत को उनकी समझते नही
कौन कहता है मित्र वो बनते नही
हम तत्परता अर्जुन सी रखते नही
कौन कहता है अपने वो बनते नही
हम ही कोशिश रिझाने की करते नही

कौन कहता है नैया ये तरती नही
हम अटलता ही अपनी है रखते नही
कौन कहता है मन में वो बसते नही
हम ही मीरा के जैसे बसाते नही
कौन कहता है प्रेम वो करते नही
हम ही संशय ये अपने मिटाते नही
कौन कहता है किस्मत सँवरती नही
हम ही गुरु ज्ञान जीवन में लाते नही
कौन कहता है दीदार होते नही
हम ही श्रद्धा को अपनी बढ़ाते नही
कौन कहता है दुख दोष भागे नही
हम क्युँ अज्ञान निद्रा से जागे नही
कौन कहता है दूरी ये मिटती नही
हम मिटाने की चाहत जगाते नही
कौन कहता है ईश्वर है दिखते नही
हम क्युँ मन की ही आँखों से देखे नही
दिल में धड़कन है बन के धड़कते वही
कौन कहता है ईश्वर बचाते नही
हम क्यूँ प्रहलाद सम है पुकारे नही
कौन कहता है वो हितकारी नही

उनके जैसा कोई उपकारी नही

हे हरि हे हरि, जय-जय नाराय़ण हरि



हे हरि हे हरि, जय-जय नाराय़ण हरि
तुमने लाखों को है तारा, तू कहे वो खरी
तुमसा साथी न कोई, तुमही ईश्वर मेरे
तुम ही प्राणों से प्यारे, मुझको गुरुवर मेरे
तन दिया, मन दिया, तुमने जीवन दिया
तुमपे सब कुछ वारे, तू कहे वो खरी
तू ही सबका सहारा, तू ही मालिक मेरा
दिल में तू ही है रहता, रूप पावन तेरा
आए जो, दर तेरे, अपनी झोली भरे
नाथ तुम ही हो हमारे, तू कहे वो खरी
तेरे ज्ञान से दुर्गुण, मन के मिटते गए
तेरे ध्यान से परदे, सारे हटते गये
तू करे, जो करे, सबका मंगल करे
सबके तुम रखवारे, तू कहे वो खरी

तेरा प्रेम निराला, है ये हितकर बड़ा
तेरे बिन था ये जीवन, खाली बोझिल
तू कहे जो कहे सबके हित में कहे
तू ही तीर्थ धाम सारे, तू कहे वो खरी
तू ही सबको संभाले, दूर दिखते भले
सँवरे तकदीर उसकी, तेरी राह जो चले
आके दर पे तेरे, जन्म सार्थक हुआ
तुम तो सबसे हो न्यारे, तू कहे वो खरी

सत्य हो शिव हो, सबसे सुन्दर तुम्ही
तुम ही साँसों में बसते, साथ हर दम तुम्ही
कहती है, धड़कनें, सुन लो मालिक मेरे
तुमसे सूरज चाँद तारे, तू कहे वो खरी

ब्रम्हा हो विष्णु हो, तुम ही शंकर मेरे
पाये शाश्वत की पूँजी, आए जो दर तेरे
दाता हो, माता हो, तुम विधाता भी हो
तुम ही सबके सहारे, तू कहे वो खरी
तेरे प्रेम ने कितनों, को निहाल किया
पल में बदली मेरी दुनियां, क्या कमाल किया
आगे अब, क्या कहें, मेरे स्वामी तुम्ही
दिल से तुम को पुकारे, तू कहे वो खरी

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय


ॐ नमो भगवते वासुदेवाय -2
तुम्ही आसरा हो, तुम्ही हो सहारा
तुम्ही मेरी मँजिल, तुम्ही हो किनारा
तुम बिन न चाहे कुछ भी तुम्हे चाहते हैं
झोली फैलाकर तुमसे, तुम्हे माँगते हैं गुरुदेव -
आपकी चरण रज करती है पावन
आपकी ही मूरत ये, है मन भावन
नयनों में अपना ही, नूर अब भर दो
अज्ञान के अँधेरे, दूर अब कर दो गुरुदेव -
जीवन हमारा बीते, भक्ति में तेरी
कृपा बनाये रखना, प्रार्थना है मेरी
हानि-लाभ दुख सुख, हँस के सहे हम
अटलता रखे तेरी, शरण में रहे हम गुरुदेव -
आपका ही रिश्ता ये, सबसे अटल है
आपका सहारा ही, सबसे सबल है
आप तो किसी का भी, साथ नही छोड़ते
कभी भी किसी से भी, मुँह नही मोड़ते गुरुदेव -
तुमसे ही जीवन ये महका हमारा
कैसे चुकायेंगे, अहसां तुम्हारा
तुम पे ही तन-मन, धन हम वारे
तुम पे न्यौछावर है, सुख ये हमारे
जड़ और चेतन में, तू ही है समाया

बड़भागी है हम जो, मिला तेरा साया

दर्श से तेरे सारे दुख दर्द भागे

आपके ही ज्ञान से, सदगुण जागे