Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

Search This Blog

संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

सदगुरू के चरणों में हमने

 सदगुरू के चरणों में हमने

जिस दिन से शीश झुकाया हैं

उस दिन से मेरा जन्म हुआ

और सफल हुई ये काया हैं


जग की मुझको परवाह नहीं

माया की भी कोई चाह नहीं

धनवान तरसते जिस धन को

उस धन को हमने पाया हैं

सदगुरू के चरणों में हमने...


हम मुक्त देश में रहते हैं

जहाँ प्रेम की गंगा बहती हैं

कोई मर के स्वर्ग जो पाता है

हम जीते जी स्वर्ग में रहते हैं

सदगुरू के चरणों में हमने...


हम चाल अनोखी चलते हैं

निराली मस्ती में रहते हैं

गुरू कृपा में शक्ति इतनी

भव बंधन से छुड़ाया हैं

सदगुरू के चरणों में हमने...


Audio

यह समय सदा न रहेगा

 यह समय सदा न रहेगा 

ये समय सदा न रहेगा 

परिवर्तनशील जगत में 

कबतक तू किसे चाहेगा

ये समय सदा न रहेगा ...


जो पुण्य कर सकें कर लें

सद्भावों से इह भर लें

सद्गुण का आश्रय धर लें

भव सागर से अब तर लें

ये कर न सका तो जीवन

माया से विवश बहेगा

ये समय सदा न रहेगा ...


यदि धन हैं तो दानी बन

विद्या हैं तो ज्ञानी बन

परमेश्वर का ध्यानी बन

अति सरल निरअभिमानी बन

चिंता न करे तू इसकी

कोई क्या मुझे कहेगा

ये समय सदा न रहेगा ...


अब सावधान हो जाना

अपना अज्ञान मिटाना

जो बिगड़ी उसे बनाना

अध्यात्म ज्ञान में आना

देहाभिमान वश प्राणी कर

जग में अति दुःख सहेगा

ये समय सदा न रहेगा ...


यह अवसर व्यर्थ न खोना

अपराधी कहीं न होना

मत मोहनिशा में सोना

ममतावश कहीं न रोना

वही पथिक अभय होगा जो

नित सदगुरू ज्ञान कहेगा

ये समय सदा न रहेगा ...


Audio

हम गुरू संदेश सुनाते हैं

 हम गुरू संदेश सुनाते हैं

इसको सब कोई क्या जाने

यह परम लाभ की बातें हैं

इसको सब कोई क्या जाने


ऐसा जग में संयोग नहीं

हो जिसका कभी वियोग नहीं

ऐसा कोई सुख भोग नहीं

जिसके पीछे दुःख रोग नहीं

भोगी बन सब पछताते हैं

इसको सब कोई क्या जाने

हम गुरू संदेश सुनाते हैं...


हैं सफल उसीका नर जीवन

जो रहता जग में त्यागी बन

जिसने जीता हैं अपना मन 

दैवी संपत्ति हैं जिसका धन

वे महापुरुष कहलाते हैं

इसको सब कोई क्या जाने

हम गुरू संदेश सुनाते हैं...


धन पाकर जो दानी न बने

जो सरल निरअभिमानी न बने

जो ईश्वर का ध्यानी न बने

जो आत्म तत्वज्ञानी न बने

वह जीवन व्यर्थ बिताते हैं

इसको सब कोई क्या जाने

हम गुरू संदेश सुनाते हैं...


जो व्यक्ति वस्तू का दास नहीं

दोषों का जिसमें वास नहीं

जिसमें दुर्वेश विलास नहीं

दुःख आते उसके पास नहीं

वह पथिक महतपद पाते हैं

इसको सब कोई क्या जाने

                हम गुरू संदेश सुनाते हैं...

Audio

सदा संत संगति में जाते रहोगे

 सदा संत संगति में जाते रहोगे

तो अज्ञान अपना मिटाते रहोगे

मिलेगी नहीं शांति तुमको कहीं भी

जो परमात्मा को भुलाते रहोगे


तुम्हें भी सभी ओर से सुख मिलेगा

जो दुखियों को सुख पहुँचाते रहोगे

तुम्हारी बनी और बनती रहेगी

जो बिगड़ी किसीकी बनाते रहोगे

सदा संत संगति में जाते रहोगे ...


सदा देने योग्य को देते रहे तुम

तो तुम भी वही यहाँ पाते रहोगे

न दोगे किसीको जो शुभ सुखद सुंदर 

कभी बैठे माखी उड़ाते रहोगे

सदा संत संगति में जाते रहोगे...


बनेंगे नहीं पाप तुमसे कही भी

जो पुण्यों की पूँजी बढ़ाते रहोगे

तभी तो निरंतर भजन हो सकेगा

जब द्वंद्वों से मन को बचाते रहोगे

सदा संत संगति में जाते रहोगे...


जो कुछ भी मिला हैं रहेगा न सब दिन

कहाँ तक यहाँ मन फँसाते रहोगे

पथिक अपने में अपने प्रियतम को पाकर

महोत्सव निरंतर मनाते रहोगे

सदा संत संगति में जाते रहोगे...

Audio


सब धनवान गरीब हैं

 सब धनवान गरीब हैं 

पहुँच मौत के पास

वो नर ही धनवान हैं

जो हैं हरि के दास


लंकेश्वर क्या ले गए 

क्या कपीस गए छोड़

सदा विराजे साथ में 

ऐसे धन को जोड़

रे मनवा ऐसे धन को जोड़


माया को सब जग भजे 

हरि को भजे न कोय

मनवा जो हरि को भजे 

तो माया चेरी होय

रे मनवा माया चेरी होय


बूँद बूँद में दया हरि की 

बरसे अंबरसे

क्यों तू जाकर छुप गया हैं 

भीजन के डर से

रे मनवा भीजन के डर से

क्यों तू जाकर छुप गया हैं 

भीजन के डर से

रे  पगले भीजन के डर से


वृथा डोल रहा बन बन में 

पूछत दर दर से

मन मंदिर में राम बसे हैं 

क्यों न चरण परसे

रे मनवा क्यों न चरण परसे


तरो तेरे पास हैं

अपने माही टटोल 

राई घटे ना तिल बढ़े

हरि बोलो हरि बोल

रे मनवा हरि बोलो हरि बोल


राम नाम की लूट हैं

लूट सके तो लूट

अंत समय पछताएगा 

प्राण जाएँगे छूट

रे मनवा प्राण जाएँगे छूट


राम नाम की लूट हैं

लूट सके तो लूट

रे मनवा लूट सके तो लूट

Audio



आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले

 आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले

मुझको तेरा सहारा सदा चाहिए।।धृ।।


चाँद तारे गगन में दिखे ना दिखे

चाँद तारे फलक में दिखे ना दिखे

मुझको तेरा नजारा सदा चाहिए

आसरा इस जहाँ का...


यहाँ ख़ुशियाँ हैं कम और ज्यादा हैं गम

जहाँ देखो वहीं पे भरम ही भरम

मेरी महफ़िल में शम्मा जले ना जले

मेरे दिल में उजाला तेरा चाहिए

आसरा इस जहाँ का...


कभी वैराग्य हैं कभी अनुराग हैं

यहाँ बदलते हैं माली,यही बाग हैं

मेरी चाहत की दुनिया बसे ना बसे

मेरे दिल में बसेरा तेरा चाहिए

आसरा इस जहाँ का...


मेरी धीमी हैं चाल और पथ हैं विशाल

हर कदम पर मुसीबत अब तू ही संभाल

पैर मेरे थके हैं चले ना चले

मुझको तेरा सहारा सदा चाहिए

हो मेरे दिल में इशारा तेरा चाहिए

आसरा इस जहाँ का...

Audio

तुम हमारे थे प्रभुजी

तुम हमारे थे प्रभुजी, तुम हमारे हो

तुम हमारे ही रहोगे, ओ मेरे प्रियतम॥धृ।।


हम तुम्हारे थे प्रभुजी, हम तुम्हारे हैं

हम तुम्हारे ही रहेंगे,ओ मेरे प्रियतम॥


तुम्हें छोड़ सुन नंद दुलारे,कोई न मीत हमारो

किसके द्वारे जाएँ पुकारूँ,और न कोई सहारो 

अब तो आके बाँह पकड़ लो ,ओ मेरे प्रियतम

तुम हमारे थे प्रभुजी...


तेरे कारण सब जग छोड़ा,तुझ संग नाता जोड़ा… प्यारे 

एक बार प्रभु हँस कर कह दो,तू मेरा मैं तेरा … प्यारे 

साँची प्रीत की  रीत लगा लो ,ओ मेरे प्रियतम

तुम हमारे थे प्रभुजी…


दास की बिनती सुनलीजो,ओ ब्रिजराज दुलारे

आखरी आस यही जीवन की,पूरण करना प्यारे

एक बार हृदय से लगालो,ओ मेरे प्रियतम

तुम हमारे थे प्रभुजी  ...

Audio


मंगल फैलाए तेरा नाम हरि

मंगल फैलाए तेरा नाम हरि

तेरे नाम में आनंद आ जाए

दुःख चिंता सब मिट जाए

तेरे नाम में मन जो लग जाए


निर्मलता हरि नाम से मिलती

जप से भाग्य की रेखा बदलती

उसका जीवन धन्य हैं होता

गुरुदीक्षा जिसे मिल जाए

हरि नाम में आनंद आ जाए


जो भी मुख से नाम हैं जपता

नाम जपने से पाप हैं मिटता

बिगड़ी बने उसकी जीवन में

हरि हरि जो जपता जाए 

तेरे नाम में आनंद आ जाए


तारे हरि का नाम उसे जो

गुरूमुख हो हरि नाम जपे जो

हरि हरि प्रेम से जपता जाए

उद्धार हैं उसका हो जाए

हरि नाम में आनंद आ जाए


उसको शांति मिल जाती हैं

उसकी भ्रांति मिट जाती हैं

सब दोषों से मुक्त रहे वो

श्वासों में नाम जो बस जाए

हरि नाम में आनंद आ जाए


हितकारी तेरा नाम हैं जग में

असली धन यहीं हैं जीवन में

पावनकारी नाम हरि का

मंगलकारी नाम हरि का

सब सुखों की खान यहीं हैं

ये साधन जो आ जाए

हरि नाम में आनंद आ जाए


प्रेम गुरू का हैं जिस मन में

वो ही सफल हैं इस जीवन में

गुरू शरण में आए हैं जो भी

गुरूकृपा हैं मिल जाए

हरि नाम में आनंद आ जाए


मंगल करें हरि नाम सभी का

मंगल करें हरि नाम


राम नाम की हैं महिमा भारी

खुद जपते हैं शिव त्रिपुरारी

राम नाम की महिमा बताने

हनुमान बन आ जाए

हरि नाम में आनंद आ जाए

Audio


पंछिडा ओ पंछिडा

पंछिडा ओ पंछिडा

पंछिडा तू उड़ के जाना जोधपुर रे

मेरे साँई बापू से मिलके कहना जल्दी आओ रे

मेरे प्यारे बापू से मिलके कहना जल्दी आओ रे

पंछिडा ओ पंछिडा...


मेरे गाँव के साधक भाई जल्दी आओ रे

मेरे प्यारे बापू के लिए सुंदर हार लाओ रे

अच्छा लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे

मेरे प्यारे बापू से मिलके कहना जल्दी आओ रे

पंछिडा ओ पंछिडा...


मेरे गाँव के प्यारे भाई जल्दी आओ रे

ओ रायपुर के साधक भाई जल्दी आओ रे

मेरे प्यारे बापू के लिए सुंदर तिलक लाओ रे

अच्छा लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे

मेरे प्यारे बापू से मिलके कहना जल्दी आओ रे

पंछिडा ओ पंछिडा...


मेरे गाँव के प्यारे भाई जल्दी आओ रे

मेरे प्यारे बापू के लिए श्वेत वस्त्र लाओ रे

अच्छा लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे

मेरे प्यारे बापू से मिलके कहना जल्दी आओ रे

पंछिडा ओ पंछिडा...

Audio



ऐसा कोई संत मिले

 मेरा तार प्रभु से जोड़े 

ऐसा कोई संत मिले।।धृ।।


संत दरश के बडे महातम

दुर्लभ जग में संत समागम

मन का रास्ता मोड़े 

कि ऐसा कोई संत मिले

मेरा तार प्रभु से जोड़े ...


भटकत भटकत पथ नहीं मिलता

मन मेरा रोके नहीं रुकता

मेरे मन के भ्रम को तोड़े

कि ऐसा कोई संत मिले

मेरा तार प्रभु से जोड़े ...

Audio

जय तुलसी माता

जय जय जय तुलसी माता

जय तुलसी माता तुम्हारी 

जय तुलसी माता...


हे वृंदा श्यामा 

हरि चरणों की तुम प्यारी

जय तुलसी माता...


जिस घर के आँगन में तेरी हो बगिया

महके तेरी खुशबू से सारी दुनिया

तेरा सेवन जो भी नित नित करता हैं

बुद्धि शक्ति बढ़ती होता मन पावन

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार

विष्णुप्रिया वृंदा श्यामा विष्णुपूजिता माँ

जय तुलसी माता...


पूजन तेरा करते जो नित जल अर्पण

प्रभु भक्ति बढ़ती हैं होता निर्मल मन

तेरी माला करते हैं नित जो धारण

वो मुक्ति पाते करते सफल जीवन

देव करें हैं नमन तुम्हारी करते जयजयकार

विश्वपावनी माँ तुम्हारी जय करता संसार

जय तुलसी माता...


तिलक लगाएँ तुमको पुष्प चढ़ाते हम

धूप दीप दिखाएँ आरती करते हम

मंगलकारी परिक्रमा करते हैं हम

गुरुभक्ति बढ़ती रहें ये दो वरदान

तन मन स्वस्थ रहें जो तेरा सेवन नित्य करें

हरिप्रिया वृंदा श्यामा विष्णुपूजिता माँ

जय तुलसी माता...

Audio

तुलसी माँ

तुलसी माँ, तुलसी माँ...

जग में छाई तेरी महिमा


पूजन करूँ वंदन करूँ माँ

घर घर तुम्हें हम बसाएँगे

मिट्टी से रंग दिए हाथ अपने

तुलसी के पौधे लगाएँगे

संस्कृति की हो शान

भारत की पहचान

तुलसी माँ ...


हरिनाम की हरियाली छाई

उत्सव ये पावन आया

देवों ने ऋषियों ने किया

तुम्हारा गुणगान माँ

विष्णुप्रिया कहलाए 

जग में माधुर्य फैलाए

हो तुम प्राचीन इतिहास

औषध में तुम खास

तुलसी माँ....

Audio

तेरी महिमा हैं अपरंपार

ठंडी छाँव भरा तेरा दरबार

सारा ऑंगन हैं खुशबूदार

तेरी महिमा हैं अपरंपार

तुम्हें पूजे हैं सारा संसार

हे तुलसी मैय्या महिमा हैं अपरंपार

तुम्हें पूजे हैं सारा संसार


तेरा दरश जो करें,नित्य सेवन करें

पल में मिट जाते,रोग शोक पाप सारे

तीनों लोक में हैं जयजयकार

तेरी महिमा हैं अपरंपार...


शुक शौनकादि शेष योगी-भोगी दरवेश

तुम्हें पूजते सुरेश ब्रम्हा विष्णु महेश

वेद शास्त्र पुराण युग चार

तेरी महिमा हैं अपरंपार...


मैय्या तेरा जहाँ वास,यम आवै नहीं पास

सुख संपत्ति बढ़े,घर में भक्ति का वास

श्रीहरि दरश देते साकार

तेरी महिमा हैं अपरंपार...

Audio

तुलसीमाता तुम्हें प्रणाम

तुलसीमाता तुम्हें प्रणाम

महिमा तेरी अपरंपार

विष्णुप्रिया वृंदा हैं नाम

जाने तुमको हैं संसार


चन्दन तिलक लगाएँ तुमको

अक्षद पुष्प चढाएँ हम

करें आरती श्रद्धा से हम

गुरू प्रीति न होवै कम


जिसके घर में वास तुम्हारा 

प्रभु सदा हैं उसके पास

तेरे पूजन से बढ़ता हैं

हरि भक्ति में दृढ़ विश्वास


प्रातःकाल तुमको जल अर्पित 

करता हैं जो नित्य प्रणाम

परिक्रमा तुलसी की करता

उसके होते पूरण काम


रोगनाशिनी गुणकारी हैं

औषधों में तुलसी नाम

नित्य सुबह जो सेवन करता

उसके मिटते रोग तमाम


तुलसी महके वृदांवन में

मधुमय पावन हो चितवन

ब्रह्मज्ञान अमृत रस पीकर

पावन होता हैं तन मन 


तुलसीमाता तुम्हें प्रणाम

महिमा तेरी अपरंपार

विष्णुप्रिया वृंदा हैं नाम

जाने तुमको हैं संसार

Audio


आरती श्री तुलसी माता की

आरती श्री तुलसी माता की

विष्णुप्रिया वृंदावनजी की


सुर नर मुनिजन महिमा गाए

नारद शारद शीश नवाए

सब मिलकर जयकार लगाए

तुलसीमाता की आरती गाए

आरती श्री तुलसी माता की...


निशदिन प्रेम से जल जो चढ़ाते

आरोग्य आनंद सहज ही पाते

प्रभु के ह्रदय में वो बस जाते

भक्ति फल का आनंद पाते

आरती श्री तुलसी माता की...


तुलसी सेवन नित्य जो करता

बल बुद्धि और तेज हैं बढ़ता

तुलसी हैं सब रोग मिटाए

घर-घर सुख समृद्धि लाए

आरती श्री तुलसी माता की...

Audio


हाथ जोड़कर तुझे पुकारूँ स्वामी आसाराम

 हाथ जोड़कर तुझे पुकारूँ स्वामी आसाराम

आ जा तेरी राह निहारूँ स्वामी आसाराम

हाथ जोड़कर..


तेरे पावन चरणों में ही बीते मेरा जीवन

आजा तुझपर सबकुछ वारूँ स्वामी आसाराम

हाथ जोड़कर..


अपनी दया का हाथ अगर तू 

रख दे मेरे सिर पे

कोई बाजी कभी न हारूँ स्वामी आसाराम

हाथ जोड़कर..


दे ऐसा वर चलूँ मैं तेरे बतलाए रस्ते पे

मन में तेरे वचन उतारूँ स्वामी आसाराम

हाथ जोड़कर..

Audio


भूल पे भूल सदा हूँ करता

भूल पे भूल सदा हूँ करता

पापों से झोली हूँ भरता

आके मुझे बचा ले सदगुरु आसाराम

सच्ची राह दिखा दे सदगुरु आसाराम

भूल पे भूल सदा हुँ करता...


काम का रावण बैठा हैं तन में

क्रोध का कंस हैं रहता मन में

दुष्कर्मों से मैं नहीं डरता

धन दौलत पे मैं हुँ मरता

आके मुझे बचा ले ...


पर निंदा का मैं हुँ दिवाना

हरि भक्ति से हुँ अनजाना

छल की नगरी में हुँ विचरता

पुण्य गली में पैर न धरता

आके मुझे बचा ले ...


लोभ ने मुझको घेर लिया हैं

मोह ने मुझमें डेरा किया हैं

धर्म की बातें मैं नहीं करता

बड़ा अधम हुँ नहीं सुधरता

आके मुझे बचा ले ...

Audio

बंदे अगर हैं तुझे कमाना

बंदे अगर हैं तुझे कमाना

इस धरती पर पुण्य

संत शिरोमणि आसाराम की

अमृतवाणी सुन...


उसके ज्ञान कमल की खुशबू 

फैली चारों ओर

उसकी तरफ मन यूँ खिंचता

ज्यूँ चाँद की ओर चकोर

जीवन को मत व्यर्थ गँवा

मत पाप की चादर बुन

बंदे अगर हैं तुझे कमाना...


वो पारस हैं लोहे को भी

सोना बना हैं लेता

वो गंगा हैं जैसा पावन

पाप सभी हर लेता

कर देती मन निर्मल उसकी

हरि ॐ की धुन

बंदे अगर हैं तुझे कमाना...


उसका दर्शन करनेवाला

परमानंद हैं पाता

तोड़ के सब बंधन माया के

भगवन के गुण गाता

भटक रहा तू उसकी बनाई

सच्ची राह को चुन

बंदे अगर हैं तुझे कमाना...

Audio


बड़ा है पावन जिसका नाम

बड़ा है पावन जिसका नाम

जिसको चरण कमल सुखधाम

वो हैं सदगुरु आसाराम

वो हैं बापू आसाराम


मरी गाय जब देखी बापू ने

एक सज्जन को दिया तब जल

कहा इसे गैय्या पे छिड़कना

मैं जाऊँ जब दूर निकल

जल पड़ने पर गाय जी उठी

हुआ करिश्मा था उस शाम

वो हैं सदगुरु आसाराम...


बाढ़ आई साबरमती में

आश्रम पर संकट छाया

खींची संत ने लक्ष्मण रेखा

पानी नहीं आगे आया

जय जय की सबने बापू की

जो थे वहाँ पर लोग तमाम

वो हैं सदगुरु आसाराम...


विद्यालय में बाँटना था

पर प्रसाद लगता था कम

बाल्टी अक्षयपात्र सी बनी

जब बापू ने किया करम

था प्रसाद बच गया बहुतसा

बन गया बिगड़ा काम

वो हैं सदगुरू आसाराम...

Audio


ऐसी माँ का हम सब पे उपकार होता हैं

लेना होता जो अवतार परमेश्वर को बारंबार

होना होता जो साकार निराकार को बारंबार

उनको भी एक माता का आधार होता हैं

ऐसी माँ का हम सब पे उपकार होता हैं

ऐसी प्यारी अम्मा का आभार होता हैं

हे माँ महँगीबा तेरे चरण पखारुँ मैय्या

माता महँगीबा तेरानाम उच्चारूँ मैय्या

धन्य धन्य अम्मा का नाम जिनके घर में आए राम

जय जय साँई आशाराम प्यारे साईं आशाराम


राम बनें जब नारायण तब माँ कौशल्या आती हैं

कृष्ण बनें तब माँ यशोदा ब्रिज में शोभा पाती हैं

हम सबके तारणहारे को माँ महँगीबा भाती हैं

ऐसी माँ के सुमिरण से उद्धार होता हैं

ऐसी माँ का हम सब पे उपकार होता हैं

हे माँ महँगीबा...


जगजननी माता ही होती सबका सृजन करती हैं

अपनी ममता और करुणा से सबका सिंचन करती हैं

जगजीवन के स्वामी का भी माँ ही पालन करती हैं

ऐसी माँ से निराकार साकार होता हैं

जयजय माता महँगीबा तेरे चरण पखारुँ मैय्या

धन्य धन्य अम्मा का नाम..


माँ जिसने अपने ही पुत्र में ईश्वर दर्शन कर पाया

सबका पोषण जो करते हैं उनको दूध पिला पाया

माँ महँगीबा नाम अमर हैं जिसने बापू को पाया

ऐसी माँ का ऋणी का सदा संसार होता हैं

ऐसी प्यारी अम्मा का उपकार होता हैं

ऐसी माँ के सुमिरण से उद्धार होता हैं

ऐसी माँ की यादों से भी प्यार होता हैं

ऐसी माँ से निराकार साकार होता हैं

धन्य धन्य अम्मा का नाम जिनके घर में आए राम

जय जय साँई आशाराम प्यारे साईं आशाराम

Audio

नारायण हैं नाथ

नारायण हैं नाथ जगत का 

नारायण हैं नाथ

भज ले नारायण सुख धाम

सुख धाम,नारायण सुख धाम


अंतर का आराम वही हैं

मन बुद्धि से पार वही हैं

जड़ चेतनमय इस दुनिया का

जग जीवन अभिराम 

भज ले नारायण सुख धाम

नारायण सुख धाम


ज्ञान की ज्योत जगानेवाला

भक्त को शक्ति दिलानेवाला

अंत समय का साथी सच्चा

भज ले नारायण सुख धाम

नारायण सुख धाम

Audio




आजाओ गुरूदेव मेरे

 आजाओ गुरूदेव मेरे 

हमें दर्शन करने आना है

सदगुरू प्यारे दया करो

अब तुमसे दूर न रहना हैं


प्रभु हमारी बिनती सुन लो

तुम बिन कैसे जीते हैं

पल-पल क्षण क्षण बीते सदियाँ

विरह के आँसू पीते हैं

जल्दी बाहर आओ बापू

वचन ये तुम्हें निभाना हैं

आजाओ गुरूदेव मेरे...


ना सोचा था सपने में भी

ऐसे दिन भी आएँगे

दूर हो फिर भी साँस चलेगी

बिन तेरे हम जी लेंगे

छोड़के दुनिया की बातों को

लगन तुम्हीसे लगाना हैं

आजाओ गुरूदेव मेरे...


ब्रह्म भाव से भक्ति करके

सदगुरू सेवा करनी हैं

गुरुआज्ञा पालन हो हमसे

निष्ठा पूरी रखनी हैं

श्रद्धा हमारी बढ़ती जाए

तुझमें खुद को मिटाना हैं

आजाओ गुरूदेव मेरे...


आजाओ गुरूदेव मेरे 

हमें दर्शन करने आना है

सदगुरू प्यारे दया करो

हमें प्यार तुम्हारा पाना हैं


आजाओ गुरूदेव मेरे 

हमें दर्शन करने आना है

सदगुरू प्यारे दया करो

अब तुमसे दूर न रहना हैं

Audio


मेरा नाथ तू हैं

 मेरा नाथ तू हैं..

नहीं मैं अकेला मेरे साथ तू हैं

मेरा नाथ तू हैं..।।धृ।।


चला जा रहा हूँ मैं राहों पे तुम्हारी

राहों पे आए जो तूफान भारी

थामे हुए हैं मेरा हाथ तू हैं

नहीं मैं अकेला...


तेरा दास हूँ मैं तेरे गीत गाऊँ

तुझे भूल के भी ना कभी भूल पाऊँ

तू ही हैं तात-बंधू, पिता-माता तू हैं

नहीं मैं अकेला...


ठाकुर हैं तू मैं तेरा पुजारी

तेरा खेल हूँ मैं तू मेरा खिलाड़ी

मेरी जिंदगी की हर एक बात तू हैं

नहीं मैं अकेला मेरे साथ तू हैं

मेरा नाथ तू हैं..

Audio


सदगुरू सा नहीं और जगत में

सदगुरू सा नहीं और जगत में

परम् दयालू परम् कृपालू

सदगुरू सा नहीं और जगत में


कितने सहज हैं कितने सरल हैं

प्रेम की मूरत प्यारी

सदगुरू सा नहीं और जगत में..


ज्ञान का अमृत सबको पिलाते

भव बंधन से सबको छुड़ाते

करुणा करें अति भारी

सदगुरू सा नहीं और जगत में..


कईं जन्मों से भटक रहा था

मनमानी कर अटक रहा था

गुरू शरण उद्धारी

सदगुरू सा नहीं और जगत में..


गुरू की शरण में दृढ़ता से लग जा

गुरू सेवा कर नींद से जग जा

हैं मोहन गिरधारी

सदगुरू सा नहीं और जगत में..


मोहमाया का फंद न छुटता

गुरूकृपा बिन ये न सुलझता

दाता हैं उपकारी

सदगुरू सा नहीं और जगत में..


गुरू दाता हैं अमोलक धन के

मोह छूटे गुरूकृपा से मन के

सच्चे कृष्ण मुरारी

सदगुरू सा नहीं और जगत में..


गुरू गोविंद हैं दर्शन कर ले

भटक न दर- दर भाई

गुरू की शरण सुखदाई...


गुरू के ज्ञान से मुक्ति हैं मिलती

सुमति सहज में आई

गुरू की शरण सुखदाई...


माँ तुलसी तुम वंदनीय

 विश्वपावनी वृंदावनी माँ तुलसी तुम वंदनीय

विश्वपावनी वृंदावनी माँ कृष्णजीवनी..


भक्तिमयी शक्तिमयी माँ वृंदा

भक्तिमयी शक्तिमयी तुम आरोग्य प्रदायिनी

तुमसे ही मिटती व्याधियाँ 

दुःख-क्लेश कष्ट निवारिणी

विश्वपावनी वृंदावनी तुम कृष्णजीवनी..


तुम्हें देख हर्षित हो नयन माँ वृंदा

तुम्हें छू के पुलकित हो पवन 

तुम हो धरा की रौशनी

तुम से हरि का हो स्मरण

 विश्वपावनी वृंदावनी तुम कृष्णजीवनी..


भगवदप्रिया विष्णुप्रिया माँ वृंदा

भगवदप्रिया विष्णुप्रिया अनुपम हैं माँ तेरी दया

कर्मों के बंधन काँटती 

मुक्ति दिलाए सर्वदा

विश्वपावनी वृंदावनी माँ कृष्णजीवनी..

Audio

आरती उतारूँ मैं तो स्वामी आसाराम की

 आरती उतारूँ मैं तो स्वामी आसाराम की

आशा पूरी करनेवाले स्वामी आसाराम की

आरती उतारूँ मैं तो स्वामी आसाराम की


मनभावन मुखड़ा हैं मधुर मधुर वाणी

सुनके वाणी होता हैं मंत्रमुग्ध प्राणी

जिसने सदा राह दिखाई हैं भक्तिधाम की

आरती उतारूँ मैं तो स्वामी आसाराम की


नैनों से करुणा के झरने हैं झरते

जिसके पास आने से पाप सभी डरते

ज्ञान की बातें बताता जो हैं बड़े काम की

आरती उतारूँ मैं तो स्वामी आसाराम की


जिसकी दया से हैं कष्ट दूर होते

संकटों के पर्बत हैं चूर चूर होते

हर दिशा में फैली हैं महिमा जिसके नाम की

आरती उतारूँ मैं तो स्वामी आसाराम की

आशा पूरी करनेवाले स्वामी आसाराम की

आरती उतारूँ मैं तो स्वामी आसाराम की

Audio


गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

 गुरूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

बापूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

चरण में पड़े हैं उद्धार कीजिए


नैनों के दीपक में संजोए भक्ति भाव की बाती

आँसुओं का तेल भरा उम्मीद की लौ जलाती

ये ज्योत हृदय की उजियार कीजिए

बापूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


तरस रही अखियाँ व्यथित हुआ मन

लगी हुई हैं दिल को दरश की लगन

अब देके शीघ्र दर्शन कृतार्थ कीजिए

जोगीजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


जग में भटक रहे हैं दर-दर ठोकर तुम बिन खाते

याद हैं आती हमको गुरूवर की प्यारी बातें

मिले गुरू दीदार ये उपकार कीजिए

स्वामीजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


जीवन की ये काली रातें तुम बिन ऐसी बीते

चाँद दरश बिना चातक जैसे रहे रीत के रीते

दे के दरश हमको उबार लीजिए

साँई जी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


जैसे भी हैं तेरे ही हैं सारा जग ये जाने

सारे जग को छोड़के बापू तुमको अपना माने

व्यथा मेरी प्रभुजी अब देख लीजिए

प्रभुजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए


प्रभु की बाते होती जब हम संग जोगी के होते 

बिन तेरे हे बापू हम सब हर पल हैं कुछ खोते

आके हमको खुशियाँ बेशुमार दीजिये

बापूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

जोगीजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

साँई जी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

बापूजी मेरी आरती स्वीकार कीजिए

Audio

कोई जाए मथुरा काशी

 कोई जाए मथुरा काशी कोई वृंदावन जाए

हमने तो सारे तीरथ गुरू के चरणों में पाए


आकाश से भी ऊँची पाताल से बड़ी

सद्गुरु की शक्ति अपार हैं कोई पार ना पाए

हमने तो सारे तीरथ गुरू के चरणों में पाए

कोई जाए मथुरा काशी


नादान हूँ मैं बालक नाराज ना होना

जाने अनजाने मुझसे जो कोई भूल हो जाए

हमने तो सारे तीरथ गुरू के चरणों में पाए

कोई जाए मथुरा काशी


तैतिस करोड़ देवों के सरताज हैं गुरूवर

जिसने शरणागत ले ली वो पार हो जाए

हमने तो सारे तीरथ गुरू के चरणों में पाए

कोई जाए मथुरा काशी


किस देवता ने आज मेरा दिल चुरा लिया

किस देवता ने आज मेरा दिल चुरा लिय
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया

रहता था पास में सदा लेकिन छिपा हुआ
करके दया दयाल ने पर्दा उठा लिया ।
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया


सूरज न था न चाँद था, बिजली न थी वहाँ
एकदम वो अजब शान का जलवा दिखा दिया
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया



फिर के जो आँख खोल कर ढूँढ़न लगा उसे
गायब था नजर से सोई फिर पास पा लिया ।
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया


करके कसूर माफ मेरे जनम जनम के
"ब्रहमानंद' अपने चरण में मुझको लगा लिया
दुनिया की खबर ना रही, तन को भुला दिया

तेरा मेरा ये रिश्ता पुराना हैं

तेरा मेरा ये रिश्ता पुराना हैं
गुरुद्वार ही एक ठिकाना हैं।।धृ।।

एक साथ तू ही निभाता हैं 
गुरू शिष्य का पावन नाता हैं 
प्यारा हैं तू ही मेरा हैं तू ही
हैं खुदा तू मेरा
तेरा मेरा ये रिश्ता...

बालक हूँ तेरा गुरूवर 
दामन ना छोडूँगा
चाहे कठिनाई आए 
मुख ना मैं मोडूँगा
वीराना था ये जीवन
उजड़ा हुआ था ये मन
अमृत का झरना बनकर 
बनवाए मेरा जीवन 
तुम जो कहोगे वही करेंगे
ऐसा तेरा दीवाना हैं
तेरा मेरा ये रिश्ता...

तुमको ही चाहूँ गुरूजी 
तुमको ही पाऊँ मैं
तेरे ही सुमिरन में
जीवन बिताऊँ मैं
प्यार निराला तेरा 
ज्ञान निराला हैं
पड़ती नजर जिसपे 
वो किस्मत वाला हैं
मेरा अपना कोई नहीं हैं 
एक तेरा ही ठिकाना हैं
तेरा मेरा ये रिश्ता....

आलम ये रौशन तुमसे
तुमसे जहान हैं
तुमसा ना होगा कोई
ये हो तो भगवान हैं
जर्रे जर्रे में भी तेरी ही सत्ता
तेरी मर्जी के बिना हिलता न पत्ता हैं
रहमत बरसे जिनपे इनकी 
घट में अलख जगाता हैं
गुरू शिष्य का पावन नाता हैं
एक साथ तू ही निभाता हैं 

तेरा मेरा ये रिश्ता पुराना हैं
गुरुद्वार ही एक ठिकाना हैं
एक साथ तू ही निभाता हैं 
गुरू शिष्य का पावन नाता हैं 
प्यारा हैं तू ही मेरा हैं तू ही
हैं खुदा तू मेरा
तेरा मेरा ये रिश्ता...

मन में बसा के तेरी मूर्ति

मन में बसा के तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती

कृपा आपकी भव से हैं तारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...

ब्रह्म नाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरू
वेद पुराणों में भी हैं यहीं लिखा
ज्ञानियों के ज्ञानियों ने हैं यहीं कहा
गुरुमुख से बोलती हैं माँ भारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...

काम क्रोध मोह माया लोभ सताए
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाए
सतगुरू कृपा हैं तो काहे का हैं डर
सतगुरू के नाम का अनोखा हैं असर
गुरुकृपा ही पापों को हैं सँहारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...

देव दानव यक्ष मनुज सबकी भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहे तो कालरथ रूके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरूवर तेरी आरती
मन में बसा के ...
Audio

गुरू वो साँवरी सूरत

गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे
गुरू वो साँवरी मूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे।।धृ।।

बिरह की आग ने हमारा
जलाया हैं बदन सारा
गुरू के प्रेम पानी से
जलन वो कब बुझाओगे
गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे...

सुधि खाने व पीने की
रही हमको न सोने की
प्यास दर्शन की हैं मन में
गुरूजी कब दिखाओगे
गुरू वो साँवरी मूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे...

फिरे दिन रैन हम रोती
वो वृंदावन की कुँजन में 
मनोहर बाँसुरी की धुन 
हमें फिर कब सुनाओगे
गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे...

न हमको योग से मतलब
न मुक्ति की हमें चाह
वो ब्रह्मानंद सदगुरू से
हमें फिर कब मिलाओगे
गुरू वो साँवरी सूरत 
हमें फिर कब दिखाओगे

मुझे तुमने बापू बहुत कुछ दिया हैं

मुझे तुमने बापू बहुत कुछ दिया हैं
मुझे तुमने साँई बहुत कुछ दिया हैं
तेरा शुक्रिया हैं तेरा शुक्रिया।।धृ।।

न मिलती अगर दी हुई दाद तेरी
तो क्या थी जमाने में औकाद मेरी
तुम्हीने तो जीने के काबिल किया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

मुझे हैं सहारा तेरी बंदगी का
हैं जिस पर गुजारा मेरी बंदगी का
मिला मुझको जो कुछ तुझीसे मिला हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

किया कुछ न मैंने शरमसार हूँ मैं
तेरी रहमतों का तलबगार हूँ मैं
दिया कुछ नहीं बस लिया ही लिया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

मिला मुझको जो कुछ बदौलत तुम्हारी
मेरा कुछ नही सब हैं दौलत तुम्हारी
उसे क्या कमी जो तेरा हो लिया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

मेरा ही नहीं तू सभी का हैं दाता
तू ही सब हैं देता तू ही हैं दिलाता
तेरी रहमतों ने ही रौशन किया हैं
तेरा शुक्रिया हैं...

कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा

कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा
हरि गोविंद गोविंद नारायणा ।।धृ।।

हरि नारायणा गुरु नारायणा
कृष्ण गोविंद गोविंद नारायणा
हरि गोविंद गोविंद नारायणा

तू जो भी करे सबका मंगल करे
तू ही जग तारणा है जदगीश्वरा
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

तू ही हरि रूप में तू ही गुरु रूप में
तू ही सब रूपों में समाया प्रभू
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

तू ही दीनदयाला तू ही भक्तकृपाला
तू ही मुरलीधरा है हे केशवा
कृष्ण गोविंद गोविंद ...

गोविंद हरि बोलो गोपाल हरि बोलो
घनश्याम हरि बोलो मेरे राम हरि बोलो
गोविंद हरि बोलो गोपाल हरि बोलो...
Audio

दरबार में सच्चे सदगुरू के

दरबार में सच्चे सद्गुरु के 
दुःखदर्द मिटाए जाते हैं
दुनिया के सताए लोग यहाँ 
सीने से लगाए जाते है

ये महफ़िल है मस्तानों की
हर शख्स यहाँ पर मतवाला
भर भर के जाम इबादत के 
यहाँ सबको पिलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

ऐ जगवालों क्यों डरते हो
इस डर पर शीश झुकानेसे
ऐ नादानों ये वह दर है
सर भेंट चढ़ाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

इल्जाम लगानेवालों ने
इल्जाम लगाए लाख मगर
ओ तेरी सौगात समझ करके
हम सिर पे उठाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

जिन प्यारों पर ऐ जगवालों 
हो खास इनायत सद्गुरु की
उनको ही संदेशा जाता है
और वो ही बुलाए जाते है
दरबार में सच्चे सद्गुरु के...

रद्राष्टकम्

श्री रद्राष्टकम्
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।

निराकारमोङकारमूलं तुरीयं
गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारूगंगा
लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा।।

चलत्कुण्डलमं भ्रू सुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुंडमालं
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहमं भवानीपतिं भावगम्यं।।

कलातीत कल्याण कल्पांतकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानंन संदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं
भजंतीह लोके परे वा नराणाम्।।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।
जरा जन्म दुःखौध तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।

रूद्राष्टकमिदं प्रोक्तू विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।

इति श्री गोस्वामि तुलसीदास कृतं श्री रूद्राष्टकं सम्पूर्णम्।
ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ ॐ ॐ।।

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर बाँधी है जीवन डोर
दिल मेरा लगा ही रहता हर पल तेरी ओर।।धृ।।

नैनों के दर्पण में गुरुवर तुमको सदा ही देखूँ
क्या से क्या बनाते हो हर पल यहीं मैं सोचूँ
मन आँगन में अब तो बाबा नाचे है खुशियों के मोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...

तुमने ही चमकाया गुरूवर तकदीर का ये सितारा
नाज करूँ मैं भाग्य पे अपने पाकर तेरा ही सहारा
तेरी निगाहों में हमने देखी स्वर्णिम युग की भोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...

तेरी एक नजर में हम तो जन्मों के सुख पाएँ
तेरी ही महिमा के गुरूवर गीत सदा हम गाएँ
पाके अनोखा प्यार तेरा हम हो गए भाव विभोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर...






न जाने कौनसे गुण पर

न जाने कौनसे गुण पर दयानिधी रीझ जाते है।।धृ।।

नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर भोग छिलकों का लगाते हैं॥
न जाने कौनसे गुण पर ..

न आये मधुपुरी से गोपियों की दु:ख व्यथा सुनकर।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारिका से दौड़े आते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

न रोये वन गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आँसू बहाते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ बिन्दु विधिहर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
न जाने कौनसे गुण पर ...

Audio

ओ सबकी अँखियों में नीर भरे

ओ सबकी अँखियों में नीर भरे
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
सबकी अँखियों में नीर भरे
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
ओ मैं तो तेरे ही द्वार पड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी
सबकी अँखियों में नीर भरे...

तुमसा जोगी ना कोई पाया
तुमही से मैंने नेह लगाया
ओ मेरी प्रीत है तुमसे लगी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी ...

सुन लो मेरे जोगी सलोना
तुम बिन रह गया बस हमें रोना
ओ मेरी अँखियों की प्यास बढ़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

कृपा करो हम दास पे स्वामी
घट घट वासी अंतर्यामी
हो अब टूटे न श्रध्दा लड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

दर्शन से तेरे सुख हमें मिलता
सत्संग से आपके जीवन है खिलता
ओ बोलो आएगी कब वो घड़ी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

आत्मज्ञान की बातें तुम्हारी
पुलकित होते है नर और नारी
ओ तेरी शान है सर्वोपरी
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

तुमसा जोगी ना कोई प्यारा
तुम ही हो जीने का एक सहारा
हो अब तो तुमको ही माना हरि
गुरुजी मैं तो कबसे खड़ी...

चाहे जैसे मुझे रख लो,कुछ ना कहूँगा मैं

चाहे जैसे मुझे रख लो,कुछ ना कहूँगा मैं
तेरा ही था, तेरा ही हूँ ,तेरा रहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तुम्हारे नाम का मोती ही मेरी दौलत है
ये रूतबा और ये शोहरत भी तेरी बदौलत है
तू है सागर मैं हूँ कतरा, तुझ संग बहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

मेरा मन अब नही लगता है जग की बातों में
अपनी उँगली थमा दी मैंने तेरे हाथों में
जिस तरफ ले चलो मुझको वही चलूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

गम की राते लगे की जैसे सुख का सवेरा है
बस तू एक बार जो कह दे कि हाँ तू मेरा है
फिर तो हर एक सितम हँसकर ही सहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

जिसकी अटकी है जान तुझमें मैं वो परिंदा हूँ
तू मेरे साथ है इस आस पे मैं तो जिंदा हूँ
हमारी आस जो टूटी तो जी ना सकूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तेरे दर्शन को नैना तरसते

तेरे दर्शन को नैना तरसते 
सबकी अँखियों से नीर बरसते
अब तो आ भी जाओ ऐसे ना तड़पाओ
धैर्य धरते हुए हम पुकारा करे
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

तुमको पाया तो सबकुछ है पाया
मिट गई जन्मों की लौकिक माया
नाम जपता रहूँ तुमको ध्याता रहूँ
महिमा सभीको सुनाता रहूँ
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

अपनी सूरत हृदय में बसा दो
प्रीत करने की रीती सिखा दो
करके चरणों का ध्यान,पाए भक्ति और ज्ञान
गुरुभक्ति से मन को मिटाते रह
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

सारे साधक खड़े तेरे द्वारे 
आ भी जाओ महँगीबा दुलारे
सुन के करुण पुकार आ जाओ करतार
सत्संग अमृत की वर्षा कराते रहो
गुरुदेवा ओ गुरुदेवा,बापू ओ मेरे बापू

ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय 
शिवाय नमः शिवाय।
तीन शब्द में सृष्टि सारी
सृष्टि सारी समाय
ॐ नमः शिवाय ।।धृ।।

पर्बत पर्बत क्यों चढ़े
नदी पार क्यों जाय
जो मिलना है यही है
जिन खोजा तिन पाय
ॐ नमः शिवाय...

हर सपना एक साँप है
मन से लिपटा जाय
विष अमृत कभी ना बने
लाखो जतन लगाय
ॐ नमः शिवाय...

तेरा दर मिल गया मुझको

तेरा दर मिल गया मुझको
सहारा हो तो ऐसा हो
तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो
तेरा दर मिल गया मुझको...

जमाने में नही देखा 
कोई सरकार के जैसा
मेरे दिलदार के जैसा
मेरे सरकार के जैसा
हमें ये नाज है रहबर
हमारा हो तो ऐसा हो 
तेरा दर मिल गया मुझको...

रहूँ मैं तरी चौखट पर
मेरे जोगी मेरे दिलबर
मेरे जोगी मेरे रहबर
मेरे जोगी मेरे दिलबर
रहें तू रूबरू मेरे
नजारा हो तो ऐसा हो
तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो
तेरा दर मिल गया मुझको...

मेरे साँसों में बहती है
तेरे ही नाम की खुशबू
महक जाए हर एक मंजर
जिकर जब भी तुम्हारा हो

तेरा दर मिल गया मुझको
सहारा हो तो ऐसा हो

तेरी किरपा पे पलता हूँ
गुजारा हो तो ऐसा हो

हमें ये नाज है रहबर
हमारा हो तो ऐसा हो 

रहें तू रूबरू मेरे
नजारा हो तो ऐसा हो

महक जाए हर एक मंजर
जिकर जब भी तुम्हारा हो

जिकर जब भी तुम्हारा हो
सहारा हो तो ऐसा हो....

कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे

कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
नींद चुराके मोहे अपना बनावे
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

प्रीत लगाके तोसे बड़ा दुःख पाया रे
एक पल भी मोहे चैन न आया
तेरे बिन मन घबराए, एक पल चैन न आए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

छुप छुप रोऊँ कान्हा दुनिया से चोरी रे
टूट न जाए कहीं प्रीत की डोरी
नैना भर भर आए तेरी याद सताए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

भक्त तुम्हारा कान्हा तुमको पुकारें
दरश दिखा दे मोहे आँखों के तारे
तेरा दर्शन पाया जीवन बीता प्यारा
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

तेरे बिन मन घबराए एक पल चैन न आए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे
नींद चुराके मोहे अपना बनाए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

प्रीत लगाके तोसे बड़ा दुःख पाया रे
एक पल भी मोहे चैन न आया
नैना भर भर आए तेरी याद सताए
ओ कान्हा तेरी बाँसुरी नींद चुरावे...

हे मेरे शिवरूप गुरुजी

हे मेरे शिवरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
रुद्र महा शिवरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी।।धृ।।

नाम है तेरा तारणहारा
सबके दुखड़े हरते हो तुम
प्रेम सुधा का पान करा के
सबको पावन करते हो
तुमही हो सब रूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

पावन सबसे ज्ञान की गंगा
आपके मुख से बहती है
ब्रह्म गुरु के वचनों में है
सारी श्रुतियाँ कहती है
सबमें तेरा रूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

मंगल दर्शन गुरुवर तेरा
जिसने भी कभी पाया है
जनम जनम की प्यास मिटी
जो तेरे दर पे आया है
रुद्र महा शिवरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

सिंधु दया के प्रेम के सागर
विनती मेरी सुन लेना
सेवक जान सदा चरणों में
मुझको अपने रख लेना
तेरे रहूँ अनुरूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

कैलाशी काशी के वासी
घट घट वासी अविनाशी हो
ह्रदय बिहारी भव भयहारी
त्रिपुरारी तुम सुखराशी हो
तुम ही हो सब रूप गुरुजी
सत्य सदा सुखरूप गुरुजी
हे मेरे शिवरूप गुरुजी...

गुरु सुखकारक गुरु दुःखवारक

गुरु सुखकारक
गुरु दुःखवारक
मुख मुद्रा मनोहारी
गुरु की महिमा भारी
मेरे गुरु की महिमा भारी।।धृ।।

गुरु का संग मिला है जबसे
तबसे बात बनी है न्यारी
प्रगट सुबुद्धि गुरु के वचन से
वाणी लगे मोहे प्यारी
गुरु की महिमा भारी...

धर्म सिखाया मार्ग दिखाया
गुरुवर है मेरे परम् उपकारी
गुरु ने ही गोविंद बतायो
निर्बलता को निवारी
गुरु की महिमा भारी...

जय गुरु जय गुरु जय हो तुम्हारी
एक अर्जी तुम सुन लो हमारी
सारी उमर करूँ चरणों की पूजा
बेड़ो लगा दियो पारी
गुरु की महिमा भारी...

गुरु सुखकारक, 
गुरु दुःखवारक
मुख मुद्रा मनोहारी,
गुरु की महिमा भारी,
मेरे गुरु की महिमा भारी

आनंदरूपा जय गुरुदेवा

आनंदरूपा जय गुरुदेवा
परम् स्वरूपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ ।।धृ।।

पूर्ण स्वरुपा जय गुरुदेवा
निराकार रूपा जय गुरुदेवा
निरंजन रूपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ

केशव स्वरुपा जय गुरुदेवा
परम् स्वरुपा जय गुरुदेवा
आनंदरूपा जय गुरुदेवा
ब्रह्म स्वरुपा जय गुरुदेवा
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ

सदगुरू सा नही और जगत में
परम् दयालू परम् कृपालू
सदगुरू सा नही और जगत में
गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ


सात समंदर पार ना

सात समंदर पार ना
सातवे आसमान में
मात-पिता गुरु सम ना कोई
इस सारे जहान में
वंदन है गुरु के चरणों में
वंदन गुरुवर के चरणों में
शत शत अभिनंदन
शत शत अभिनंदन

प्रथम गुरु है माता जिसने
हमको दूध पिलाया है
संस्कारों का सिंचन करके
उन्नत हमें बनाया है
माँ की महिमा शास्त्र बखाने
माँ ममता की खान है
वंदन है गुरु के चरणों में...

नन्हासा मैं फूल हूँ मैय्या
तो वृक्षों की डाली है
मैं तो हूँ छोटीसी बगिया
तू उसकी हरियाली है
बगिया के फूलों सी मैय्या
तेरी ये मुस्कान है
वंदन है गुरु के चरणों में..

पिता ने हमको पढ़ा लिखाकर
विद्यावान बनाया है
अपना साथी आप बनो ये
सुंदर सूत्र सिखाया है
कर्मयोग की शिक्षा का तो
करते हम गुणगान है
वंदन है गुरु के चरणों में...

मातृ पितृ भक्ति को जिसने
जीवन में अपनाया है
श्रवण कुमार भीष्म विघ्नेश्वर 
को आदर्श बनाया है
ऐसे मातृ पितृ भक्तों की 
महिमा अपरंपार है
वंदन है गुरु के चरणों में

बापू ने भी मातृ पितृ 
भक्ति से सबकुछ पाया है
स्वामी लीलाशाह गुरु का
ज्ञान प्रसाद लुटाया है
गुरुवर मेरे प्यारे जोगी
गुरु मेरे भगवान है
वंदन है गुरु के चरणों में..
Audio


आज परम् आनंद मिला

आज परम् आनंद मिला
सच्चा सुख आज ही पाया है
मात-पिता के चरणों में जब
मैंने शीश झुकाया है

कर पूजन स्वीकार मेरा
दीजिए ये आशिर्वाद मुझे
जबतक मेरी सांस चले रहे
ये पावन दिन याद मुझे

आशीर्वाद हमारा बच्चों 
सदा तुम्हारे साथ रहे
दुआ हमारी और गुरुवर की
कृपा तुम्हारे साथ रहे
याद हमेशा तुम्हें हमारी
बच्चों बस ये बात रहे
मातृ पितृ भक्तों के सर पे
सदा गुरु का हाथ रहे
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ 
Audio

पूजन करूँ मैं मात पिता का

पूजन करूँ मैं मात पिता का 
निज संस्कृति अपनाऊँ मैं
गुरुवर के संकेत पे चल के 
जीवन सफल बनाऊँ मैं

तिलक लगाओ हार पहनाओ
मेरी प्यारी मैय्या को
दीप जलाओ पुष्प चढ़ाओ
वंदन करता हूँ उनको
भारत पुण्य धरा की महिमा
निज आदर्श बनाऊँ मैं
पूजन करूँ...

शीश झुकाऊँ फेरे लगाऊँ
आपका आशीष पाऊँ मैं
तन मन अर्पित जीवन मेरा
चरणों में ही लगाऊँ मैं
कर्ज है मुझपर मात पिता का
कैसे उसे चुकाऊँ मैं
पूजन करूँ...

जिस माँ ने हमें नौ मास तक 
गर्भ में बहुत संभाला है
जीवन के सुख दुःख सह के भी
कैसे हमको पाला है
मात पिता गुरु चरणों में ही
मेरे चारों धाम है
पूजन करूँ...

गीले में ही खुद सोकर मुझको
सूखे में ही सुलाया है
भूखी रहकर उसने मुझको
अपना कौर खिलाया है
उस माँ का ऋण कैसे चुकाऊँ
माँ ममता की खान है
पूजन करूँ...

जीवन में सबकुछ मिल जाए
मात पिता ना मिलते है
मात पिता गुरु सेवा से 
किस्मत रेखा बदले है
उनकी आज्ञा में चलना ही 
मेरा सच्चा धर्म है
पूजन करूँ...

बापू ने लीलाशाहजी की 
सेवा कर यह फल पाया
ब्रम्हज्ञान को हँसते गाते
हम सबको है सिखलाया
लाखों मिलते मात पिता दिल
तब सद्गुरु दिल बनता है
पूजन करूँ...
Audio



ॐ जय जय मात-पिता

ॐ जय जय मात-पिता
प्रभू गुरुजी मात-पिता
सद्भाव देख तुम्हारा
मस्तक झुक जाता
ॐ जय जय मात-पिता

कितने कष्ट उठाए 
हमको जन्म दिया
मैय्या पाला बड़ा किया
सुख देती दुःख सहती
पालनहारी माँ
ॐ जय जय मात-पिता

अनुशासित कर आपने
उन्नत हमें किया
पिता आपने जो हैं दिया
कैसे ऋण मैं चुकाऊँ 
कुछ न समझ आता
ॐ जय जय मात-पिता

सर्व तीर्थमई माता
सर्व देव में पिता
जो कोई इनको पूजे
पूजित हो जाता
ॐ जय जय मात-पिता

मात-पिता की पूजा
गणेशजी ने भी की
सर्व प्रथम गणपति को
ही पूजा जाता
ॐ जय जय मात-पिता

बलिहारी सद्गुरु की
मार्ग दिखा दिया
सच्चा मार्ग दिखा दिया
मातृ पितृ पूजन कर
जग जय जय गाता
ॐ जय जय मात-पिता

मात-पिता गुरु की
आरती जो गाता
है प्रेम सहित गाता
वो संयमी हो जाता
सदाचारी हो जाता
भव से तर जाता

लफंगे लफ़ंगियों की 
नकल छोड़
गुरु सा संयमी होता
गणेशजी सा संयमी होता
स्वयं आत्मसुख पता
औरों को पवाता

ॐ जय जय मात-पिता
प्रभू गुरुजी मात-पिता
सद्भाव देख तुम्हारा
मस्तक झुक जाता
ॐ जय जय मात-पिता

चाहे जैसे मुझे रख लो

चाहे जैसे मुझे रख लो कुछ ना कहूँगा मैं
तेरा ही था तेरा ही हूँ तेरा रहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

तुम्हारे नाम का का मोती मेरी दौलत है
ये रुतबा और ये शोहरत भी तेरी बदौलत है
तू है सागर मैं हूँ कतरा तुझ संग बहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

मेरा मन अब नही लगता है जग की बातों में
अपनी उंगली थमा दी मैंने तेरे हाथों में
जिस तरफ ले चलो मुझको वही चलूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

गम की रातें लगें कि जैसे सुख का सवेरा है
बस तू एक बार कह दे कि हाँ तू मेरा है
फिर तो हर एक सितम हँस कर ही सहूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...

जिसकी अटकी है जान तुझमें मैं वो परिंदा हूँ
तू मेरे साथ है इस आस पे मैं तो जिंदा हूँ
हमारी आस जो टूटी तो जी ना सकूँगा मैं
चाहे जैसे मुझे रख लो...
Audio