Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

मेरे दिल में बसे गुरुदेव तुम हो


मेरे दिल में बसे गुरुदेव तुम हो
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

जमाना राह में काँटे बिछाता
मुझे क्या मैं तो तेरी राह चलता 
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

तुझे मिलने को दिल बैचैन रहता
तुझे देखे तो दिल को चैन पड़ता
मेरे मालिक मेरी दुनिया तुम हो
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...

जुदा रहना गँवारा कैसे होगा
तेरी चाहत से मेरी झोली भरना
मेरे प्रियतम मेरे सरताज तुम हो
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...
जमाना राह में काँटे बिछाता
मुझे क्या मैं तो तेरी राह चलता 
मेरे दिलबर मेरी दुनिया तुम हो 
हमारे प्यार की मूरत तुम हो
मेरे दिल में बसे ...






साथ तुम ही हो

साथ तुम ही हो, पास तुम ही हो
हर साधक की आस तुम ही हो

जल बिन जैसे मछली तड़पती 
ऐसा अपना हाल है
देर न करियो ओ मेरे बापू
तुम बिन सब बेहाल है
जाने कहाँ उड़ी चैन हमारी
जिए भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

तरस रही हैं अखियाँ सबकी
हे गुरुवर अब आ भी जाओ
बरस बरस कर नैना पुकारें 
गुरुवर आ भी जाओ
धैर्य ना अब कहीं टूट जाए सब
 हमको ना तड़पाओ
सूना वीराना जीवन मेरा
रहे भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

ऐसी भी क्या गलती हो गई
दूर जो हमसे हो गए तुम
चाँद बिना चकोर रहे ना
स्वाति बिन जो चातक
बापू तुम बिन कैसे रहे हम
हम सारे तेरे साधक
तेरा सहारा जिसको मिला हो
भूले तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम
रहे भी तो कैसे 

देख तुझे हर दिल ये कहता
तुमसा ना कोई और जहाँ में
दामन छोड़ ना जाऊँगा मैं
तुमसे सच्चा नाता है
बिगड़ी सबकी बनाने वाले
तू ही पिता तू ही माता है
तेरा मेरा रिश्ता पुराना
कहे भी तो कैसे
मेरे गुरुवर तुम बिन हम 
रहे भी तो कैसे 
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गुरु मेरे

गुरु मेरे ,गुरु मेरे, गुरु मेरे, दाता मेरे, दाता मेरे
भरोसा मेरा नही हारेगा, है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा ,है भरोसा मुझे
गुरु मेरे ,गुरु मेरे, गुरु मेरे, दाता मेरे, दाता मेरे 

अपनों का बदल जाना ,दुनिया का है दस्तूर
अपनों को निभाने में मेरा गुरु बड़ा मशहूर
मुझे भी अपना तू बनाएगा, है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा, है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

इतिहास गवाह है जब जिसने पुकारा है
जीता ही भरोसा ही जब गुरु सहारा है
मेरा भी गुलशन तू निखरेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

जो कुछ था पास मेरे सब अर्पण कर डाला
अब हाथ उठा करके समर्पण कर डाला
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे...

भरोसा मेरा नही हारेगा है भरोसा मुझे
मेरा भी जीवन तू सँवारेगा है भरोसा मुझे
गुरु मेरे गुरु मेरे गुरु मेरे दाता मेरा गुरु मेरे 

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सुनो न बापू

सुनो न बापू एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
फिर चले गए क्यों जोगी यहाँ कोई नही है अपना

सुनो न बापू एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
सुनो न जोगी एक छोटी सी बात है आपसे कहना
आपने हमको सिखाया ही न था आपसे दूर रहना
फिर चले गए क्यों जोगी यहाँ कोई नही है अपना
फिर चले गए क्यों बापू यहाँ कोई नही है अपना
मीरा ने भक्ति की थी, शबरी ने भक्ति की थी
श्रीराम जी में जितना ,कैसे बताए बापू...

बापू कब आओगे अब तो ये भी हमें बता दो
अब वृक्ष लताएँ भी है कहते बापू को लौटा दो
अब क्या कहूँ मैं उनसे हम भी तड़पे है कितना
श्रीराम जी बिन तड़पे थे भरत जी जितना
कैसे बताए...

एक ही दिल था जोगी मेरा वो भी तुम्हें दिया है
मैंने मोल न जाना था तुमने अनमोल किया है
दिल के बदले तुम्हें माँगे हमें कीमत दो बस इतना
शबरी ने भक्ति की थी,मीरा ने भक्ति की थी
नन्दलाल जी में जितना,कैसे बताए बापू...

कितना गाऊँ कितना सुनाऊँ आप तो बस सुनते हो
कहते ना हो कुछ बस यूँ ही आप तो चुप बैठे हो
कुछ तो बोलो मेरे जोगी कि धैर्य धरे हम कितना
मीरा ने भक्ति की थी, शबरी ने भक्ति की थी
श्रीराम जी में जितना ,कैसे बताए बापू....

फिरसे बहारें आएँगी जब बापू आएँगे
नाँच उठेंगा हर दिल जब हम दर्शन पाएँगे
ऐसे दिन पर कब आएँगे सोचे सदा बस इतना
श्रीराम जी बिन तड़पे थे भरत जी जितना
कैसे बताए बापू....

तसवीर को निहारूँ

तसवीर को निहारूँ ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
गुरुवर तुम्हें पुकारू,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ।।धृ।।

कब आओगे गुरुजी,कबसे टेर लगाऊँ
तसवीर को निहारूँ...

हम सब भटक रहे है, तुम बिन अनाथ होकर
तुम दूर जा बसे हो, औरों के साथ होकर
अब तुमही ये बताओ कैसे तुम्हें बुलाऊँ
तसवीर को निहारूँ...

नियमों को दिल न माने,कानून भी न जाने
दुनिया समझ रही है हम हो गए दिवाने
है अब ये जिद हमारी वापस तुम्हें ले आऊँ
तसवीर को निहारूँ...

निर्दोष हो प्रभूजी ,हम सब ये जानते है
जग माने या न माने, साधक तो मानते है
अब तुमही ये बताओ कैसे तुम्हें बुलाएँ
तसवीर को निहारूँ....

लीला तुम्हारी प्रभूजी जानी है कब किसीने
संतों की सत्य वाणी मानी है कब सभी ने
दुनिया की रीत है ये चाहूँ न बदल पाऊँ

तसवीर को निहारुँ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
कब आओगे गुरुजी,कबसे टेर लगाऊँ
गुरुवर तुम्हें पुकारुँ,चहूँ ओर ढूँढ आऊँ
तसवीर को निहारुँ....
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अब तो प्रभू आ जाओ

अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ

नैना झरझर बहते हैं मोरे दूरी अब तो मिटाओ
चुपके चुपके चुपके  देखते हो तुम 
यूँ ना मोहे सताओ,यूँ ना मोहे सताओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ

तुम बिन सूना आँगन ये मेरा ताके बाँट तिहारी
कलियाँ तुम बिन मुरझा गई है गुमसुम ये फुलवारी
गुमसुम ये फुलवारी,गुमसुम ये फुलवारी
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ

नैना झरझर बहते हैं मोरे दूरी अब तो मिटाओ
चुपके चुपके चुपके  देखते हो तुम 
यूँ ना मोहे सताओ,यूँ ना मोहे सताओ
साथ न छोड़ो हम दीनों का अब तो दरस दिखाओ
अब तो प्रभू आ जाओ देर न यूँ लगाओ
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तुम न आए प्रभूजी

तुम न आए प्रभूजी कि शाम हो गई
मेरी पूजा की थाली सजी रह गई
भोग रखा फूल रखे मुरझा गए
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

हमसे रूठे हो क्या आप आते नही
भूल अपराध मेरे बताते नही
तेरे चरणों में बैठे बैठे शाम हो गई
मन में दर्शन की इच्छा बनी रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

ध्यान भी कर लिया ज्ञान भी सुन लिया
तेरे चरणों मे रहकर के सब मिल गया
मन में आशा अब ये ही बनी रह गई
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए गुरुजी...

कईं जन्मों से नाता मेरा आपका
आप मेरे प्रभु मैं हूँ अब आपका
तेरी करूणा से नई जिंदगी मिल गई
मन में दर्शन की इच्छा बनी रह गई
तुम न आए गुरुजी...

राहों में तेरे पलकें बिछा रहे
आ जाओ गुरुदेव हम बुला रहे
तेरे बिन ये जीवन वीरान हो गए
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...

कब आओगे अब तो बता दो जरा
राह आने की अब तो दिखा दो जरा
झलक कैसे मिले अँखियाँ तरस गई
आरती भी जली की जली रह गई
तुम न आए प्रभूजी...
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स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर

स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर 
बाँधी है जीवन डोर
दिल मेरा लगा ही रहता 
हर पल तेरी ओर ।।धृ।।

नैनों के दर्पण में गुरुवर 
तुमको सदा ही देखूँ
क्या से क्या बनाते हो 
हर पल यहीं मैं सोचूँ
मन आँगन में अब तो बाबा 
नाचे है खुशियों के मोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...

तुमने ही चमकाया गुरुवर 
तकदीर का ये सितारा
नाज करूँ मैं भाग्य पे अपनी 
पाकर तेरा ही सहारा
तेरी निगाहों में हमने देखी
स्वर्णिम युग की भोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...

तेरी एक नजर में हम तो
जन्मों के सुख पाए
तेरी ही महिमा के गुरुवर 
गीत सदा हम गाए
पाके अनोखा प्यार तेरा हम 
हो गए भावविभोर
स्नेह प्यार की तुमसे गुरुवर ...
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अब सुन लो हम सबकी पुकार

अब सुन लो हम सबकी पुकार 
कि करते है हम इंतज़ार
आ जाओ हे मेरे भगवान 
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार।।धृ।।

हर बंधन को तोड़ने वाले 
इस बंधन पर आओ
तरस गई है अखियाँ सबकी 
आ के दरश दिखाओ
बाँध रखी है तुमसे ही आस 
कि होगा तेरा दीदार
सुन लो मेरी अब तो पुकार
कि करते है हम इंतज़ार

नम हुई अखियाँ आज भी प्यारे 
करती है तेरा इंतज़ार
कैसे कहे हम कैसे बताए
 इनको तेरी ही आस
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है हम इंतज़ार

विरह की घड़ियाँ कटती नही है
अब ना देर लगाओ
दर्शन सत्संग देकर बापू 
हमको पार लगाओ
विरह अगन को अब तो बुझाओ
सुन लो हमारी पुकार
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार

दिल की सबकी सुनने वाले
क्यों न सुनते हमारी 
हर पल हर घड़ी मेरे जोगी
आस लगी है तुम्हारी
आ जाओ हे मेरे भगवान 
कि करते है तुमसे ही प्यार
कि करते है हम इंतज़ार
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ऐ मेरे तारणहारे

ऐ मेरे तारणहारे तू ही बता दे 
तेरा दर्शन कब होगा
अब और ना सताओ

तुमसे जुड़ी है साँसे हमारी
हर धड़कन में छवि है तुम्हारी
तुम ही तीरथ धाम हमारे
हर पल बापू बापू पुकारें
तू ही बता दे तेरा दर्शन कब होगा
अब और ना सताओ
ऐ मेरे तारणहारे...

आपके बिन सूनी दुनिया हमारी
इस जीवन में तुम ही मुरारी
दर्शन के बिन चैन न आए
आपके बिन अब प्रभु रहा नही जाए
तू ही बता दे ...

हालत अपनी क्या हम बताएँ
आपके बिन अब कहीं चैन न पाए 
हर पल आपकी याद सताए
आपके बिन प्रभु जिया नही जाए
तू ही बता दे ...

राह में बैठे पलकें बिछाएँ

राह में बैठे पलकें बिछाएँ
है तरसती दरश को निगाहें

आज सतगुरु हमारे कहाँ है
दिल हमारे उनके बिन तन्हा है
रो रही रूह बाँहें फैलाएँ
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

ये खुशी है तो कैसी खुशी है
बेबसी और बेचारगी है
अश्क आँखों से अब रुक न पाए
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

भाव कैसा ये भक्त मिलन का
रात का था पता ना ही दिन का
वो वक्त भुलाए तो कैसे
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

साधक सब याद करते है तुमको
अपनी सूरत तो दिखला दो हमको
दूर पलभर रहा अब न जाए
है तरसती दरश को निगाहें
राह में बैठे...

जगमग जगमग ज्योत जले-आरती

जगमग जगमग ज्योत जले
मेरे बापू के दरबार में
आओ रे भक्तों
आओ रे भक्तों भक्ति कर लो
बापू के दरबार में
जगमग जगमग ज्योत जले
 मेरे बापू के दरबार में...

निशदिन तेरा नाम पुकारें
निशदिन तेरी ज्योत जलावे
आओ रे भक्तों...

ऐसी अंतर ज्योत जलाओ
हम दिनों को पार लगाओ
आओ रे भक्तों...

निराकार है ज्योत तुम्हारी
तीन लोक फैली उजियारी
आओ रे भक्तों….

जिसने बापू का नाम पुकारा
दूर हुआ उसका अंधियारा
आओ रे भक्तों...

नील गगन के चाँद सितारे
ऐसे लगे बापू नयन तुम्हारे
आओ रे भक्तों....

प्रेम सहित जो आरती गावे
दुःख-दारिद्र्य निकट नही आवे
आओ रे भक्तों,आओ रे भक्तों भक्ति कर लो
बापू के दरबार में...
जगमग जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में...

ज्योत से ज्योत जगाओ आरती

ज्योत से ज्योत जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ
मेरा अंतर तिमिर मिटाओ 
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ..

हे योगेश्वर,हे परमेश्वर
हे ज्ञानेश्वर, हे सर्वेश्वर
निज किरपा बरसाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

हम बालक तेरे द्वार पे आए
मंगल दरस दिखाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

शीश झुकाए करें तेरी आरती
प्रेमसुधा बरसाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

साँची ज्योत जगे जो हृदय में
सोहं नाद जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

अंतर में युग-युग से सोई 
चित शक्ति को जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

जीवन में श्रीराम अविनाशी
चरणन शरण लगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...

ज्योत से ज्योत जगाओ
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ
मेरा अंतर तिमिर मिटाओ 
सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ



तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी

तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा।।धृ।।

माता पिता सम तुमही हो मेरे
तुम्हारी सेवा में समर्पित रहूँगा

तुमही सारथी हो जीवन के रथ के
तुम्हें मित्र हरदम बनाए रहूँगा

मैं हूँ आज तुम हो अहोभाग्य मेरे
तुम्हें दिल में अपने बिठाए रहूँगा
तुमही मेरे सतगुरु....

भले आँधियाँ आए तूफान आए
चरणों की पतवार पकड़े रहूँगा

संभाले ही रहना मेरी डोर सतगुरु
तुम्हारी पतंग बनके उड़ता रहूँगा

मैं जो कुछ भी जैसा तुम्हारा हूँ स्वामी
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा

करो मुझको स्वीकार हे मेरे बापू
तुम्हारे लिए मैं समर्पित रहूँगा

तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा

माता पिता सम तुमही हो मेरे
तुम्हारी सेवा में समर्पित रहूँगा

तुमही सारथी हो जीवन के रथ के
तुम्हें मित्र हरदम बनाए रहूँगा

भले आँधियाँ आए तूफान आए
चरणों की पतवार पकड़े रहूँगा

मैं जो कुछ भी जैसा तुम्हारा हूँ स्वामी
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा

करो मुझको स्वीकार ओ मेरे बापू
तुम्हारे लिए मैं समर्पित रहूँगा

तुमही मेरे सतगुरु जीवन के स्वामी
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा
माता पिता सम तुमही हो मेरे
तुम्हारी सेवा में समर्पित रहूँगा
तुमही सारथी हो जीवन के रथ के
तुम्हें मित्र हरदम बनाए रहूँगा
भले आँधियाँ आए तूफान आए
चरणों की पतवार पकड़े रहूँगा
मैं जो कुछ भी जैसा तुम्हारा हूँ स्वामी
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा
सदा ही तुम्हारा सेवक रहूँगा
तुम्हारे ही चरणों में अर्पित रहूँगा
तुम्हारे लिए में समर्पित रहूँगा

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श्री सद्गुरु चालीसा

।। अथ श्री सद्गुरु चालीसा ।।

दोहा
ॐ नमो गुरुदेव जी, सबके सरजन हार।
व्यापक अंतर बाहर में, पार ब्रह्म करतार ।।1।।
देवन के भी देव हो, सिमरू मैं बारम्बार।
आपकी किरपा बिना, होवे न भव से पार ।।2।।
ऋषि-मुनि सब संत जन, जपें तुम्हारा जाप।
आत्मज्ञान घट पाय के, निर्भय हो गये आप ।।3।।
गुरु चालीसा जो पढ़े, उर गुरु ध्यान लगाय।
जन्म-मरण भय दुःख मिटे, काल कबहुँ नहीं खाय ।।4।।
गुरु चालीसा पढ़े सुने, रिद्धि-सिद्धि सुख पाय।
मन वांछित कारज सरें, जन्म सफल हो जाय ।।5।।

चौपाई
ॐ नमो गुरुदेव दयाला, भक्तजनों के हो प्रतिपाला ।।1।।
पर उपकार धरो अवतारा, डूबत जग में हंस1 (जीवात्मा) उबारा ।।2।।
तेरा दरख करें बड़भागी, जिनकी लगन हरि से लागी ।।3।।
नाम जहाज तेरा सुखदाई, धारे जीव पार हो जाई ।।4।।
पारब्रह्म गुरु हैं अविनाशी, शुद्ध स्वरूप सदा सुखराशी ।।5।।
गुरु समान दाता कोई नाहीं, राजा प्रजा सब आस लगायी ।।6।।
गुरु सन्मुख जब जीव हो जावे, कोटि कल्प के पाप नशावे ।।7।।
जिन पर कृपा गुरु की होई, उनको कमी रहे नहीं कोई ।।8।।
हिरदय में गुरुदेव को धारे, गुरु उसका है जन्म सँवारें ।।9।।
राम-लखन गुरु सेवा जानी, विश्व-विजयी हुए महाज्ञानी ।।10।।
कृष्ण गुरु की आज्ञा धारी, स्वयं जो पारब्रह्म अवतारी ।।11।।
सद्गुरु कृपा है अति भारी, नारद की चौरासी टारी ।।12।।
कठिन तपस्या करें शुकदेव, गुरु बिना नहीं पाया भेद ।।13।।
गुरु मिले जब जनक विदेही, आत्मज्ञान महासुख लेही ।।14।।
व्यास, वसिष्ठ मर्म गुरु जानी, सकल शास्त्र के भये अति ज्ञानी ।।15।।
अनंत ऋषि मुनि अवतारा, सदगुरु चरण-कमल चित्त धारा ।।16।।
सद्गुरु नाम जो हृदय धारे, कोटि कल्प के पाप निवारे ।।17।।
सद्गुरु सेवा उर में धारे, इक्कीस पीढ़ी अपनी वो तारे ।।18।।
पूर्व जन्म की तपस्या जागे, गुरु सेवा में तब मन लागे ।।19।।
सद्गुरु-सेवा सब सुख होवे, जनम अकारथ क्यों है खोवे ।।20।।
सद्गुरु सेवा बिरला जाने, मूरख बात नहीं पहिचाने ।।21।।
सद्गुरु नाम जपो दिन-राती, जन्म-जन्म का है यह साथी ।।22।।
अन्न-धन लक्ष्मी जो सुख चाहे, गुरु सेवा में ध्यान लगावे ।।23।।
गुरुकृपा सब विघ्न विनाशी, मिटे भरम आतम परकाशी ।।24।।
पूर्व पुण्य उदय सब होवे, मन अपना सद्गुरु में खोवे ।।25।।
गुरु सेवा में विघ्न पड़ावे, उनका कुल नरकों में जावे ।।26।।
गुरु सेवा से विमुख जो रहता, यम की मार सदा वह सहता ।।27।।
गुरु विमुख भोगे दुःख भारी, परमारथ का नहीं अधिकारी ।।28।।
गुरु विमुख को नरक न ठौर, बातें करो चाहे लाख करोड़ ।।29।।
गुरु का द्रोही सबसे बूरा, उसका काम होवे नहीं पूरा ।।30।।
जो सद्गुरु का लेवे नाम, वो ही पावे अचल आराम ।।31।।
सभी संत नाम से तरिया, निगुरा नाम बिना ही मरिया ।।32।।
यम का दूत दूर ही भागे, जिसका मन सद्गुरु में लागे ।।33।।
भूत, पिशाच निकट नहीं आवे, गुरुमंत्र जो निशदिन ध्यावे ।।34।।
जो सद्गुरु की सेवा करते, डाकन-शाकन सब हैं डरते ।।35।।
जंतर-मंतर, जादू-टोना, गुरु भक्त के कुछ नहीं होना ।।36।।
गुरु भक्त की महिमा भारी, क्या समझे निगुरा नर-नारी ।।37।।
गुरु भक्त पर सद्गुरु बूठे2 (बरसे), धरमराज का लेखा छूटे ।।38।।
गुरु भक्त निज रूप ही चाहे, गुरु मार्ग से लक्ष्य को पावे ।।39।।
गुरु भक्त सबके सिर ताज, उनका सब देवों पर राज ।।40।।

दोहा
यह सद्गुरु चालीसा, पढ़े सुने चित्त लाय।
अंतर ज्ञान प्रकाश हो, दरिद्रता दुःख जाय ।।1।।
गुरु महिमा बेअंत है, गुरु हैं परम दयाल।
साधक मन आनंद करे, गुरुवर करें निहाल ।।2।।
1 जीवात्मा 2 बरसे
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

रब्ब मेरा सतगुरु बन के आया

रब्ब मेरा सतगुरु बन के आया
 मैनू वेख लें दे।मैनू वेख लैन दे, 
मथ्था टेक लैन दे॥

बूटे बूटे पानी पावे,सूखे बूटे हरे बनावे।
नी ओ आया माली बन के,
मैनू वेख लें दे॥

जिथ्थे वी ओह चरण छुआवे,
पत्थर वी ओथे पिघलावे।
नी ओह आया तारणहारा,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी महिमा गाई ना जाए,
त्रिलोकी इथे झुक जावे।
नी ओ आया पार उतारण,
मैनू वेख लैन दे॥

ब्रह्म गायन दी मय पिलावे,
जो पी जावे ओह तर जावे।
एह ब्रह्म दा रस स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी सूरत रब दी सूरत,
कर दे मुरादे सब दी पुरन।
नी ओह रब दा पूरण स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी चरनी तीरथ सारे,
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे।
नी ओह आया पार उतारण,
मैनू वेख लैन दे॥

जनम मरण दे चक्कर कटदे,
जेहड़े इसदे दर दे झुकदे।
नी ओह रब्ब दा पूरण रूप,
मैनू देख लैन दे॥

नाम दी इसने प्याऊ लगाईं,
राम नाल दुनिया झुमाई।
एहदे नाम दा अमृत पी के
मैनू वेख लैन दे॥

सत्संग एस दा बड़ा निराला,
जीवन विच करदा है उजाला।
मेरे रब्ब दा ज्योति स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

प्रीत है उसदी बड़ी अनोखी,
नाम दी दौलत कदे ना फुट्दी।
नी ओह आया जग नू झुमावन,
मैनू वेख लैन दे॥

घट घट सब दे ज्योत जगावे,
मोह माया दे भरम मिटावे।
एह मिठ्ठी निगाह बरसावे,
मैनू वेख लैन दे॥
राम नाम  दी बोली प्यारी,
गंगा जी वी बनी पुजारी।
सब तीरथ होए निहाल,
मैनू वेख लैन दे॥

मेरे सद्गृरु प्यारे

मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

साँई लीलाशाह के मन का ये अनमोल है मोती
इनके नाम की सारे जग में जगती जगमग ज्योति
बड़ा ऊँचा इनका धाम ये पूरी आस करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

जनम जनम के पाप मिटाती इनकी अमृत वाणी
सत्संग में इनके आकरके बदल जाए जिंदगानी
ऐसा देते है पैगाम  ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

संत कबीर और तुलसी नानक नजर है इनमे आते
मुनि वसिष्ठ और वेद व्यास भी कभी है झलक दिखाते
कभी बनके राम और श्याम ये पूरी आस करें
मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

मेरे सद्गृरु प्यारे दिल में सबके वास करें
लेकर हरिओम का नाम ये पूरी आस करें

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

प्राणों के पंछी चहके मधुर गुनगुनाए 
श्वासों की ये स्वर लहरी यहीं मंत्र गाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

जन्मों का लेखा जोखा पढ़ा नही जाए
जो कुछ भी सुख दुःख देखा कहा नही जाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

तेरे सर पे हाथ गुरु का क्यों घबराए
कर्म भूमि कर्म किये जा क्यों ललचाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

माया के मोह जाल में पंछी फँस जाए
राग द्वेष तृष्णा घेरे चैन न पाए
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

जीवन समर्पण करदे गुरु के चरण में 
सबकुछ मिलेगा तुमको उनकी शरण में
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि
गुरु कृपा से मन की बगिया हरदम रहती हरीभरी
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि बोल तू मानवा हरि ॐ हरि

भाव दो भक्ति दो

भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
धर्म वरदान दो,सत्य का ज्ञान दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो..

मेरे गुरु है जहाँ वहाँ पे अँधेरा नही
है सदा सुख वहाँ दुःख का डेरा नही
जाऊँ तेरी शरण पाऊँ तेरे चरण
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए

तूने मुझको रचा ,मैं हुँ रचना तेरी
तू है मेरा कवि, मैं हुँ कविता तेरी
प्राण दीपक जले, साँस जबतक चले
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए

गुरु सुनते रहे और मैं सुनाता रहूँ
बीते सदियाँ यूँही ,गीत गाता रहूँ
मेरा बनके रहे मुझको अपना कहे
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए

भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
धर्म वरदान दो,सत्य का ज्ञान दो
मुझको इसके सिवा कुछ नही चाहिए
भाव दो भक्ति दो ,भक्ति की शक्ति दो..

मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया
मुरझाया था जीवन जो मेरा आज फिरसे खिल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

सत्संग के ही प्रताप से दुःख दर्द सारे टल गए
अगणित जनम के पाप का कूड़ा भरा वह जल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

कहते है कोई क्या मिला ,समझा उसे सकते नही
बिछुड़ा ना पलभर भी कभी था उससे मिलना हो गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

फूला हुआ फिरता सदा निज मूर्खता अभिमान में
मिली संत चरणों की कृपा,अभिमान असूर निकल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

बेहोश रहता था सदा सुख भोग की आसक्ति में
गुरुज्ञान के ही प्रकाश से मुरझा पड़ा वह खिल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

परमात्मा परिपूर्ण है सब देश मे सब काल में
सतरंगी सुंदर मन मेरा घनश्याम रंग में रंग गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया
मुरझाया था जीवन जो मेरा आज फिरसे खिल गया
मुझको मेरे सौभाग्य से सद्गृरु का दर्शन हो गया

हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये

हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

लीजिये हमको शरण में हम सदाचारी बने
ब्रम्हचारी धर्मरक्षक वीर व्रतधारी बने
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

निंदा किसीकी हम किसीसे भूलकर भी ना करें
ईर्षा किसीकी हम किसीसे भूलकर भी ना करें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

सत्य बोले झूठ त्यागे मेल आपस में करें
दिव्य जीवन हो हमारा यश तेरा गाया करें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

जाए हमारी आयु हे प्रभु लोक के उपकार में
हाथ डाले हम कभी ना भूलकर अपकार में
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

मातृ भूमि मातृ सेवा हो अधिक प्यारी हमें
देश में सेवा मिले निज देश हितकारी बनें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

कीजिये हमपर कृपा ऐसी ऐ परमात्मा
मोह मद मत्सर रहित होवे हमारी आत्मा
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

प्रेम से हम गुरुजनों की नित्य ही सेवा करें
प्रेम से हम दुःखी जनों की नित्य ही सेवा करें
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये

हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये
हुँ अधम आधीन अशरण अब शरण में लीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

खा रहा गोते हुँ मैं भवसिंधु के मजधार में
आसरा कोई न देता, आप ही कुछ कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

मुझमे है जप-तप न साधन और ना कोई ज्ञान है
ज्ञान का दीपक जलाकर दिल को रौशन कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

पाप बोझे से लदी नैय्या भवर में आ रही
नाथ आओ अब बचाओ पार इसको कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

आप भी यदि छोड़ देंगे फिर कहाँ जाऊँगा मैं
जन्म के सारे दुःखों से मुक्त मुझको कीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

सब जगह मैंने भटककर अब शरण ली आपकी
शरणागत की लाज रखलो, चरणों में रख लीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....
हुँ अधम आधीन अशरण अब शरण में लीजिये
हे मेरे गुरुदेव करुणासिंधु करूणा कीजिये.....

बड़े प्रेम से सब मिल बोलो

बड़े प्रेम से सब मिल बोलो ,वाणी में अमृत घोलो
अंतर घट के पट खोलो, गुरुदेव की शरण में हो लो
फिर नयन मूंद कर बोलो,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

जब घोर अंधेरा छाए ,कोई राह नजर नही आये
जब मन तेरा घबराए,पीड़ा दुःख - दर्द डराए
मन बार बार दोहराए,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

मानव तन में हम आये,सपनों के महल सजाए
माया में मन ललचाए, जीवन यूँ ही ढल जाए
गुरुदेव ही पार लगाए,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

सत्कर्म ही ज्ञान सिखाए, सुमिरन से ही सुख पाए
जो दया धर्म अपनाए,वो जीवन सफल बनाए
नित झूम झूम कर गाए,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम

बड़े प्रेम से सब मिल बोलो ,वाणी में अमृत घोलो
अंतर घट के पट खोलो, गुरुदेव की शरण में हो लो
फिर नयन मूंद कर बोलो,गुरूचरणम शरणम मम
गुरूचरणम शरणम मम,गुरूचरणम शरणम मम...

भाव का भूखा हुँ मैं

भाव का भूखा हुँ मैं, बस भाव ही एक सार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है।।धृ।।

अन्न,धन अरु वस्त्र ,भूषण कुछ न मुझको चाहिए
आप हो जाए मेरा बस पूर्ण यह सत्कार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

भाव बिन सबकुछ भी दे तो मैं कभी लेता नही
भाव से एक फूल भी दे तो मुझे स्वीकार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

जो भी मुझमे भाव रखके आते है मेरी शरण
मेरे और उसके हृदय का एक रहता तार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

बाँध लेते भक्त मुझको प्रेम की एक डोर से
इसलिए इस भूमि पर होता मेरा अवतार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है...

भाव का भूखा हुँ मैं, बस भाव ही एक सार है
भाव से मुझको भजे तो उसका बेडा पार है।

तुमही राम मेरे

तुमही राम मेरे,कन्हैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो ।।धृ।।

जिधर देखता हुँ नजर तुमही आते
सभी भक्त साधक तेरे गीत गाते
शब्दों की माला के गवैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....

न जानू मैं भक्ति , न जानू पूजा
सिवा तेरे सद्गुरु नही कोई दूजा
नसीबों के मेरे रचैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....

पाप को मिटा के धरम को सँवारा
मेरे प्यारे गुरुवर ने भक्तों को तारा
दुखड़ों की धूप में छैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....

पैश्चिम में बैठे,पूरब की जाने
उत्तर या दक्षिण हो सभी तुमको माने
चारों दिशाओं के रचैय्या तुमही हो
जीवन की नैय्या के खिवैया तुमही हो
तुमही राम मेरे....


तकदीर सँवर गयी म्हारी

तकदीर सँवर गयी म्हारी
तकदीर सँवर गयी म्हारी
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं।।धृ।।
मुझे रत्नों की मिल गयी ढेरी
मन्ने रत्नों की मिल गयी ढेरी
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...
हरि ॐ.. मेरी थी कोई नेक कमाई
मेरी थी कोई नेक कमाई
हो जी हो ..मेरी थी कोई नेक कमाई
जो आज मुझे ले आयी
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...
हरि ॐ..जीवन क्या है ये जाना
जीवन क्या है ये जाना
हो जी हो.. जीवन क्या है ये जाना
मैने खुद को पहचाना
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...
हरि ॐ.. शुभ वचन सुणे जब थारे
शुभ वचन सुणे जब थारे
हो जी हो..शुभ वचन सुणे जब थारे
मैने धाम देख लिए सारे
बापूजी थारे सत्संग में 
बापूजी थारे सत्संग में कहूँ सच मैं
तकदीर सँवर गयी म्हारी...



उमर चली खाली कर चली

उमर चली ,खाली कर चली 
हाँ ,हाँ , उमर चली, खाली कर चली 
काया की ये खोली...।।धृ।।
बस कुछ साँसे और बची है 
जाग मेरे हमजोली
उमर चली...

नैनों की खिड़की के काँच हुए मैले
अब वो चमक है कहाँ जो थी पहले 
मन के द्वार पे मैल है इतनी
देखके आत्मा डोली
उमर चली....

तुझको ये खोली हरि ने जब दी थी
नई नवेली थी साफ सुथरी थी
तूने इसके आँगन में पगले 
पाप की खेती बो ली
उमर चली....

माया के जाले कपट की है काई
तूने कभी की न इसकी सफाई
गया दशहरा गुजरी दिवाली
आके चली गयी होली
उमर चली...

नैनों की खिड़की के काँच हुए मैले
अब वो चमक है कहाँ जो थी पहले
मन के द्वार पे मैल है इतनी
देखके आत्मा डोली
उमर चली...



स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार

स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार
हमपर यूँ ही रहे बरसता सदा तुम्हारा प्यार...
साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हो,साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ

तेरे आँगन में मिलते हमें जीवन के सुख सारे 
तेरे ही दर्शन से कट जाते पाप हमारे
कहाँ मिलेगी ऐसी ज्योति इतना सुंदर द्वार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार....

मात-पिता तुम मेरे तुम संगी- साथी सहारे
अब मेरा यह जीवन चरणों में रहे तुम्हारे
तेरी पूजा कर न सका तो जीवन है बेकार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार...

जब जब कष्ट हुए है तुमने ही कष्ट निवारे
तुमही हो जीवन साथी तुम ही भगवान हमारे
इसी जनम में कर दो साँई हमको भव से पार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार....

ऋषि मुनि पाते है जो आनंद शांति अपार
वोही आनंद हमें मिलता है कर सतगुरु के दीदार
बापू का ये प्यार न रूठे ना छूटे गुरुद्वार
स्वर्ग से सुंदर सपनों से प्यारा है गुरु का दरबार
हमपर यूँ ही रहे बरसता सदा तुम्हारा प्यार
साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हो,साँई तेरा प्यार न रूठे कभी दरबार न छुटे 
हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ,हरि हरि ॐ

सद्गुरु सा ना कोई जगत में

सद्गुरु सा ना कोई जगत में ,उनका ही गुण गान करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....

गुरु रूप में शिवजी आए, करने भक्तों का उद्धार
महिमा इनकी न जाने कोई, इनके तो है रूप हजार
दर्शन गुरु के करो हमेशा,सुबह सवेरे जाप करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....

मुनी पुत्र होकर शुकजी ने जनक को गुरु बनाया था
लहणा की थी भक्ति गुरु में गुरु अंगद कहलाया था
गुरुभक्ति में मन को लगाकर तृष्णाओं का नाश करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....

महँगीबा का आसू प्यारा देखो आज है संत महान
लाखों शीश शरण में झुकते हम सबके है वो है भगवान
ज्ञान गंग में गुरु के साधक सतत सभी स्नान करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
सद्गुरु सा ना कोई जगत में ,उनका ही गुण गान करो
मन की मैली चादर अपनी बिन साबुन ही साफ करो
बिन साबुन ही साफ करो....


हे गुरुदेव मेरी कुटिया को

हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना
जैसे कृपा की थी शबरी पे वैसे दरस दिखा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना...

बनकर श्याम ,बनकर श्याम सुदामाजी को जैसे तुमने तारा था
बैठके नैय्या,बैठके नैय्यामें केवट की उसको पार उतारा था
अगर किसी दिन,अगर किसी दिन फुरसत हो तो 
मेरे भाग्य जगा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को.. 

पारस है,पारस है श्रीचरण तुम्हारे मुझको सोना कर देंगे
निर्मल पावन,निर्मल पावन इस कुटिया का 
हर एक कोना कर देंगे
अपने चरणों,अपने चरणों की रज
 देकर मेरा मान बढ़ा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना
जैसे कृपा की थी शबरी पे वैसे दरस दिखा जाना
हे गुरुदेव मेरी कुटिया को मंदिर कभी बना जाना...

गुरुदेव प्रार्थना है

गुरुदेव प्रार्थना है 
अज्ञानता मिटा दो,सच्ची डगर दिखा दो
श्री सतगुरु शरणम,श्री सतगुरु शरणम,श्री सतगुरु शरणम

हम है तुम्हारे बालक,कोई नही हमारा
मुश्किल पड़ी है जब भी,तुमने दिया सहारा
चरणों में अपने रख लो,चन्दन हमें बना दो
गुरुदेव प्रार्थना है ....

पूजन का तेरे गुरुवर अधिकार चाहते है
थोडासा हम भी तेरा बस प्यार चाहते है
मन में हमारे अपनी सच्ची लगन लगा दो
गुरुदेव प्रार्थना है ....

अच्छे है या बुरे है जैसे भी है तुम्हारे
मुमकिन नही है अब हम किसी और को पुकारे
अपना बना के हमको अपना वचन निभा दो 
गुरुदेव प्रार्थना है 
अज्ञानता मिटा दो,सच की डगर दिखा दो
ॐ सतगुरु शरणम,ॐ सतगुरु शरणम,ॐ सतगुरु शरणम


गुरुदेव मेरे प्यारे तेरे सहारे

गुरुदेव मेरे प्यारे तेरे सहारे
जीवन अपना बिताना है हमें
जिंदगी का साथ निभाना है हमें।।धृ।।
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे तेरे सहारे...

पल पल बीता जाए जीवन
हम कुछ कर ना पाए
मोह माया में फँस के रह गए
अब तो दिल ये चाहे
समय का डर और काल की चिंता
हमको नही सताए
राग द्वेष सब दूर हो मनसे
विपदा नही रुलाए
अज्ञानता मिटा दो,कोई ऐसी दवा दो
जिंदगी से दर्द को मिटाना है हमें
रोते हुए को हँसाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

ABCD याद रही अपनी भाषा ना जानी
सन 47 भूल गए पर भूले नही गुलामी
कोई किसीकी बात न माने सब करते मनमानी
पश्चिम के चक्कर में फँसकर करते रहे नादानी
है सबसे प्यारी, ये भाषा हमारी
सबके जुबान पे लाना है हमे
जीवन सफल बनाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

उनका कैसे होगा भला जो गुरुवर को ही भूले
बिना ज्ञान के कैसे कोई आसमान को छू लें
कलियुग का है असर के देखो दुनिया उल्टी घूमे
अहं की ऊँची डाल पे बाँधे अहंकार के झूले
है प्रार्थना हमारी ,करो रखवारी
सच्चाई का रास्ता दिखाना है हमें
चरणों में अपने बिठाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

गुरुवर तुम बिन मोक्ष न मिलता अब हमने ये जाना
सारी दुनिया ढूँढ के आखिर में तुमको पहचाना
गुरुवर सच्चा नाम ये तेरा सुखों का खजाना
नूरानी सूरत ने तेरी कर दिया हमें दिवाना
इंसाफ कर देना माफ कर देना
भटके को रास्ते पे लाना है हमें
जिंदगी का साथ निभाना है हमें
हम जानते है तुम्हें मानते है
प्रेम का दीप जलाना है हमें
जीवन सफल बनाना है हमें
गुरुदेव मेरे प्यारे ...

गुरु चरणों की करूँ वंदना

गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
गुरुचरणों की धूल बनू मैं
जीवन सफल बनाऊँ
यही मेरी कामना है।।धृ।।
गुरु के चरण को तजके
बोलो जहाँ में कहाँ जाऊँ मैं
आँखे खुले जो मेरी
दर्शन गुरु के सदा पाऊँ मैं
गुरु के चरण को तजके
बोलो जहाँ में कहाँ जाऊँ मैं
मन को अपने मंदिर कर लूँ
गुरुवर को बैठाऊँ
यही मेरी कामना है
गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
पापों का सागर दुनिया
गुरु का सहारा मुझे चाहिए
जानू ना जंतर मंतर
जानू ना जंतर मंतर
नाम तुम्हारा मुझे चाहिए
मैं अज्ञान के अंधकार में
ज्ञान का दीप जलाऊँ
यही मेरी कामना है
गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
दुनिया से टूटे नाता
गुरुवर से नाता नही तोडना
छूटे जमाना चाहे
छूटे जमाना चाहे 
गुरु के चरण को नही छोड़ना
दुनिया से टूटे नाता
गुरुवर से नाता नही तोडना
जब भी दूँ आवाज गुरु को
सदा सामने पाऊँ 
यही मेरी कामना है....
गुरुचरणों की करूँ वंदना
गुरु को हर दिन ध्याऊँ
यही मेरी कामना है....
गुरुचरणों की धूल बनू मैं
जीवन सफल बनाऊ
यही मेरी कामना है...

अटको अगर तुम भटको अगर तुम

अटको अगर तुम, भटको अगर तुम
ना बन पाए काम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...।।धृ।।
गम की सुबह हो ,दुःख की दोपहरी
या खुशियों की श्याम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...

वेद पुराण ने आदि काल से गुरुमहिमा गाई
ब्रम्हा हो या विष्णु सबको गुरुभक्ति भाई
गुरुचरणों की कृपा से माटी चंदन हो जाए
गुरुद्वार से भक्त गुरु का जो चाहे पाए
गुरुका, जो चाहे पाए
गुरुवंदन करूँ,गुरु को नमन करूँ
सुबह हो चाहे श्याम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...

गुरुकृपा से मन का सारा दोष निकल जाए
जैसे लोहा पारस छूकर कंचन बन जाए
गुरु चरणों में अर्पित कर दे हर सुख दुःख प्राणी
गुरु की महिमा को जो समझे वो सच्चा ज्ञानी
ज्ञानी,वो सच्चा ज्ञानी
जल में या थल में,चल में अचल में
गुरुवर आए काम,ले लो तुम गुरुवर का नाम...

गुरुबिन ज्ञान नही मिलता है ,मनो ना मानो
ईश्वर को पाना है तो तुम गुरु को पहचानो
सच्चे मन से जो गुरुवर का सुमिरन कर लेता है
उसके मन में गुरुज्ञान अमृत भर देता है
राम ने पाया,कृष्ण ने पाया
गुरुचरणों से ज्ञान,ले लो तुम गुरुवर का नाम...
अटको अगर तुम...