Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

गुरुवर मेरे पाँव कमजोर हैँ



गुरुवर मेरे पाँव कमजोर हैँ

तेरे सिवा मुझको चलाएगा कौन II  धृ  II



बापू मेरे हम सबके तुम हो सहारे

तुमरे बिना अब जीवन ये कैसे गुजारे

गुरुवर इंतजार कब तक करें

तेरे सिवा मुझको अब भाएगा  कौन

गुरुवर मेरे पाँव.......



तुम ही स्वामी मेरे, जीवनधन हमारे

भव सागर से हमको अब कौन उबारे

गुरुवर अंधकार घनघोर हैं

तेरे  सिवा राह सुझाएगा कौन

गुरुवर मेरे पाँव.......



बापू मेरे हमरी  तुम आँखों के तारे

हम साधक अब तुमको रो रो पुकारें

तुम ही मेरे राम हे घनश्याम

तेरे सिवा पार लगाएगा कौन

गुरुवर मेरे पाँव.......



सुबह श्याम बापू हम तुमको पुकारे

हर क्षण अब ये आँखें राह निहारे

आओ गुरुदेव भी जाओ

तेरे सिवा हमको संभालेगा कौन

गुरुवर मेरे पाँव.......



बापू  मेरे हम सबके तुम हो सहारे

तुमरे बिना अब जीवन ये कैसे गुजारे

गुरुवर इंतजार कब तक करें

तेरे सिवा मुझको अब भाएगा  कौन

तेरे  सिवा राह सुझाएगा कौन

तेरे सिवा पार लगाएगा कौन

तेरे सिवा हमको संभालेगा कौन

तेरे सिवा मुझको चलाएगा कौन.........







तेरी मर्जी तू ही जाने





तेरी मर्जी तू ही जाने, तेरी मर्जी तू ही जाने
तू अलमस्त कबीरा हैं
तू ही रामा तू ही मौला, तू ही मस्त फकीरा हैं ।। धृ ।।

   
हर युग में अवतार हैं डरते,  कैसी तेरी माया है
   
बड़भागी हैं रब को हमने  गुरु रूप में पाया हैं
   
तेरी रेहमत हो गयी तो पापी भव तर जाते हैं
   
लख चौरासी छूट गए जो तेरे दर्शन पाते हैं
    
जग में सुन्दर हैं एक नाम साँई साँई आशाराम
कर दे सबके पूरण काम साँई साँई आशाराम
तू नानक तू पीर मोहमद तू  कृष्णI तू मीरा हैं
तू ही रमा..........


कैसा तेरा रूप हैं तेरी कैसी ये सच्चाई हैं
  
ब्रम्ह ज्ञान का दीप जलाने दिव्य चेतना आयी है
   
मिले कृपा जो गुरुदेव की  परमानन्द को पाते हैं
  
ब्रम्हभाव प्रगटाके गुरूवर ज्योत से ज्योत जलाते हैं
 
जग में सुन्दर हैं एक नाम साँई साँई आशाराम
करदे सबके पूरण काम साँई साँई आशाराम
पर उपकार है करने आए ,पर उपकार है करने आए
हरते सबकी पीडा हैं
तू ही रमा.........
    
गुरुदेव के नाम का कीर्तन गुरुस्वरूप समाना है

गुरु का कीर्तन शिव का कीर्तन कहते ये भगवाना हैं
    
गुरु दीक्षा से कर्म सफल हो गुरु बिन जीव अज्ञानी है
    
जिनकी कृपा से ब्रम्ह है मिलता वो गुरु अमृतवाणी हैं

जग में सुन्दर हैं एक नाम साँई साँई आशाराम
कर दे सबके पूरण काम साँई साँई आशाराम
करते बेडा पार सभीका टूटे जगजंजीरा हैं
तू ही रमा........


गुरूकृपा है जिनपर होती वो धन बल को पातें हैं
 
गुरुकृपा से ब्रम्हा विष्णू शिव जग को संभाले हैं
 
मैँ सबमें हूँ मुझमें सब हैं आत्म स्वरुप दिखलातें हैं
 
ऐसे श्री सद्गुरु के चरणों में हम शीश झुकाते हैं

जग में सुन्दर हैं एक नाम साँई साँई आशाराम
तू धरती तू आसमान हैं, तू धरती तू आसमान हैं
तू अग्नि तू समीरा हैं
तू ही रामा.......


प्रार्थना कर जोड़के


प्रार्थना कर जोड़के, लीला अपनी छोड़के आओ ना गुरुदेव
सब अधीर है हो रहे, सारे साधक रो रहे..आओ ना गुरुदेव II धृ II

   आपके दर्शन बिना कुछ भी ना भाता हमें
   याद कर कर आपकी मन बहुत तड़पाता हमें
कष्ट इतना ना सहो, दूर हमसे ना रहो..आओ ना गुरुदेव...

   हे प्रभो जो बन पड़ा वो सभी तो हमने किया
   पर सफलता ना मिली, जल रहा सबका जिया
आपही कुछ कीजिये, शीघ्र दर्शन दीजिये.. आओ ना गुरुदेव...

   क्या करें हम सभी अब कुछ भी समझ ना आ रहा
   अभी तक का हर प्रयास विफल ही होता जा रहा
विपत्ति यह भारी हरो,प्रेरणा कुछ तो करो.. आओ ना गुरुदेव...

   हैं सहारा हम सभी के आप तारणहार हैं
   पाके संग बल आपका हम हो रहें भवपार हैं
व्यासपीठ निहरतें, आपको ही पुकरतें.. आओ ना गुरुदेव...

   सूना आश्रम आप बिन हैं सभी व्याकुल हो रहें
   आपके सानिद्ध्य बिन सब धैर्य अपना खो रहें
कर कृपा अब आओ ना, विपत्ती दूर भगाओ ना..आओ ना गुरुदेव... 
   

जब तक साँसे चलती हैं

 

जब तक साँसे चलती हैं, गुरुवर की महिमा गाऊँ
सपने मे गुरु को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ...

    जब माया मोह मे उलझा,
    मन ने मुझको भटकाया
    गुरुदेव ने हाथ पकड़कर
    मुझे सत्य का पंथ दिखाया
    गुरु के चरणों को तजकर
    अब और कहाँ मैं जाऊँ
सपने मे गुरु को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ
जब तक साँसे चलती हैं, गुरुवर की महिमा गाऊँ
सपने मे गुरु को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ...

    मेरे मन का रूप दिखाए
    मुझे गुरु चरणों का दर्पण
    गुरुदेव की छाया हो तो
    टूटे पापों का बंधन
    गुरुदेव की महिमा समझूँ
    और दुनिया को समझाऊँ
सपने मे गुरु को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ
जब तक साँसे चलती हैं, गुरुवर की महिमा गाऊँ
सपने मे गुरु को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ...

    संसार के तूफानों में
    गुरुदेव का मिला सहारा
    जब डूबा भवसागर में
    गुरुदेव ने मुझको उबारा
    तुम गाओ राम की महिमा
    मैं असाराम को ध्याऊ
सपने मे उनको को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ
जब तक साँसे चलती हैं, गुरुवर की महिमा गाऊँ
सपने मे  गुरु को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ...
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साईं तेरी शोभा वरनी न जाये

साईं  तेरी शोभा वरनी न जाये .........................
तेरी आँखे है तेजस्वी, तेज अध्यात्म बहाए
चमक दमकता  भाल विशाल , प्रति पल स्मित लहराए
साईं  तेरी शोभा वरनी न जाये .....................


अमृतमयी है  वाणी  तेरी ज्ञान की प्यास छिपाए
जो पिए सो पाए परम पद, पद - पद दीप जलाये
मोह विरक्त हो मुक्त हो जीवन, सब में है साईं समाये
साईं  तेरी शोभा वरनी न जाये ...................


धर्म प्रेमी माँ बाप की शिक्षा, कैसे रंग न लाये
शांति,प्रेम, आनंद के सागर, सदगुरु ये समझाये
आवन-जवान, आदि-उपादी, सबसे तू ही छुडाये
साईं  तेरी शोभा वरनी न जाये ...................

जन्म लिए एक नगर सेठ घर, सिन्धु नदी के तीर
धर्मक्षेत्र में कल - कल  बहते बेहते शुब्र मति के नीर
आसुमल से अलग हुए गुरु आसाराम कहावे
साईं  तेरी शोभा वरनी न जाये ...................

साईं  तेरी शोभा वरनी न जाये .........................
तेरी आँखे है तेजस्वी, तेज अध्यात्म बहाए
चमक दमकता  भाल विशाल, प्रति पल स्मित लहराए
साईं  तेरी शोभा वरनी न जाये .....................

पोथी पढली,पैसा गिन लिया, माना सब कुछ है जाना
कहाँ से आये कहाँ है जाना, ना जाना तो क्या जाना ?
पोथी पढली,पैसा गिन लिया, माना सब कुछ है जाना ........

कौन देश से आया प्राणी, कहाँ  है तेरा बसेरा रे
उजियारे में भटक रहा तू, हो नहीं तेरा सवेरा रे
अपने को पहचान ले बंदे, ओरो को पहचाना क्या
कहाँ से आये कहाँ है जाना, ना जाना तो क्या जाना ?
पोथी पढली ,पैसा गिन लिया माना सब कुछ है जाना ........

बस तू इतना जान ले बन्दे, सपना है संसार
भूल भुलैया से बचना, तू अपना आप उभार
संत मिले जो सदगुरु जैसे, जीवन से घबराना क्या ?
कहाँ से आये कहाँ है जाना, ना जाना तो क्या जाना ?
पोथी पढली ,पैसा गिन लिया माना सब कुछ है जाना ........

मस्त फ़क़ीर है मौला मेरा, मालिक मेरा साईं रे
योग लीला है जीवन उसका, मैं उसकी परछाई रे
राम का दाना राम की चिड़िया चुग गई तो पछताना क्या ?

कहाँ से आये कहाँ है जाना, ना जाना तो क्या जाना ?
पोथी पढली ,पैसा गिन लिया माना सब कुछ है जाना ........
ना जाना तो क्या जाना ?

ऐसी भूल दुनिया के अंदर

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ऐसी भूल दुनिया के अंदर साबुत करनी करता तू ,
ऐसो खेल रचो मेरे दाता जहाँ देखू वह तू को तू .
भाई जहाँ देखू वहाँ तू को तू .

किडी में तू नानो बन बैठो हाथी में तू मोटो क्यूँ
बन महावत ने माथे बैठो हाकन वालो तू को तू .
ऐसो खेल रचो मेरे दाता जहाँ देखू वह तू को तू .
भाई जहाँ देखू वहाँ तू को तू .


दाता में दाता बन बैठो भिखारी के वेलो तू
ले झोली ने मांगन लागो देवा वालो दाता तू
ऐसो खेल रचो मेरे दाता जहाँ देखू वह तू को तू .
भाई जहाँ देखू वहाँ तू को तू .


चोरों में तू चोर बन बैठो बदमाशो मे वेलो तू
कर चोरी ने भागन लागो पकड्ने वालो तू को तू
ऐसो खेल रचो मेरे दाता जहाँ देखू वह तू को तू .
भाई जहाँ देखू वहाँ तू को तू .

नर नारी में एक विराजे दुनि याँमें दो दिखे क्यूँ
बन बालक ने रोआ लागो राखन वालो तू को तू .
ऐसो खेल रचो मेरे दाता जहाँ देखू वह तू को तू .
भाई जहाँ देखू वहाँ तू को तू .

जल थल मे तू ही विराजे भूत जंत वेलो तू
कहत कबीर सुनो भाई साधू गुरु भी बनके बैठो तू
ऐसो खेल रचो मेरे दाता जह देखू वह तू को तू .
भाई जहाँ देखू वहाँ तू को तू .

ऐसी भूल दुनिया के अंदर साबुत करनी करता तू ,
ऐसो खेल रच्यो मेरे दाता  जहाँ देखू वह तू को तू .
भाई जहाँ देखू वहाँ तू को तू .

गुरुभक्तों के खुल गये भाग




गुरुभक्तों के खुल गये भाग

गुरुभक्तों के खुल गये भाग जब गुरुसेवा मिले |

गुरुभक्तों के खुल गये भाग जब गुरुसेवा मिले || धृ ||

सेवा मिली थी राजा हरिश्चंद्र को |

दे दिया राज और ताज जब गुरु सेवा मिले |

दे दिया राज और ताज जब गुरुसेवा मिले ||१||

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

आप भी बिके राजा रानी को बेच दिया |

आप भी बिके राजा रानी को बेच दिया |

बेच दिया रोहितकुमार जब गुरुसेवा मिले |

बेच दिया रोहितकुमार जब गुरुसेवा मिले ||२||

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

सेवा करी थी भिलनी भक्त ने |

सेवा करी थी भिलनी भक्त ने |

रामजी पहुँच गये द्वार जब गुरुसेवा मिले |

रामजी पहुँच गये द्वार जब गुरुसेवा मिले ||३||

राम राम ॐ राम राम ॐ

राम राम ॐ राम राम ॐ

तुमको भी मौका गुरूजी ने दीना |

हमको भी मौका गुरूजी ने दीना |

हो जाये भव से पार जब गुरुसेवा मिले |

हो जाये भव से पार जब गुरुसेवा मिले ||४||

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ 


चिंता मिट जायेगी



चिंता मिट जायेगी

चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |

हो चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी ||धृ||

एक बार तू आ जा सत्संग में |

यहाँ घनश्याम भी है, यहाँ प्रभुराम भी है |

यहाँ घनश्याम भी है, यहाँ प्रभुराम भी है |

सब बैठे है गुरुवर के संग में ||१||

चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |

जो नियम से सुने गुरुवाणी वो हरि दर्शन पाये |

जो नियम से सुने गुरुवाणी वो हरि दर्शन पाये |

गूंगा भी हरि ॐ कहे जो गुरुकृपा हो जाये |

शिक्षा चाहे तो, वो दीक्षा चाहे तो, वो शिक्षा चाहे तो, वो दीक्षा चाहे तो |

मन रंग दे तू गुरुवर के रंग में ||२||

वो चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |



किस्मतवाले यहाँ आते है अभागा क्या आयेगा |

किस्मतवाले यहाँ आते है अभागा क्या आयेगा |

बावरे गंगा तट से तू प्यासा क्यूँ जायेगा |

डोरी श्रद्धा की, सेवा निष्ठा की, वो डोरी श्रद्धा की सेवा निष्ठा की |

तू मोझरी घर की पतंग में ||३||

वो चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |

वो चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |



साधू होगा तू जब आत्मा से, तू भव तर जायेगा साधू होगा |

हो साधू होगा तू जब आत्मा से, तू भव तर जायेगा |

आँखे होगी पावन तेरी तब ही देख पायेगा |

आये बजरंगी बनके सत्संगी |

वो आये बजरंगी बनके सत्संगी |

सत्संग की शक्ति अंग अंग में ||४||

वो चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |

एक बार तू आ जा सत्संग में |

यहाँ घनश्याम भी है, यहाँ प्रभुराम भी है |

सब बैठे है गुरुवर के संग में ||५||

वो चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |

वो चिंता मिट जायेगी चौरासी कट जायेगी |

पा लिया है मैंने सबकुछ




पा लिया है मैंने सबकुछ

पा लिया है मैंने सबकुछ तेरे द्वारे गुरुदेवा

बाँध लिया है मैंने मन को तेरे द्वारे गुरुदेवा

गुरुदेवा, गुरुदेवा करूं तेरी मै सेवा

पा लिया है मैंने सबकुछ तेरे द्वारे गुरुदेवा ||धृ||

तेरे द्वारे मैं आया नहीं चाह रही कोई बाकी

तेरे द्वारे मैं आया नहीं चाह रही कोई बाकी

मेरे मन मंदिर में बसी है गुरुवर तेरी ही झाँकी

मेरे मन मंदिर में बसी है गुरुवर तेरी ही झाँकी

पा लिया है मैंने सबकुछ तेरे द्वारे गुरुदेवा ||१||

तेरे दर्शन कर ना पावुं फिर बेचैनी बढ़ जाती

चाहे कही जाऊं बस याद तेरी ही आती

चाहे कही जाऊं बस याद तेरी ही आती

बाँध लिया है मैंने मन को तेरे द्वारे गुरुदेवा ||२||

तुम बिन तो अब दाता मूरत न किसी की भाति

तुम बिन तो अब दाता मूरत न किसी की भाति

तुम ने जो नैया सम्भाली तुम बिन न ये तर पाती

तुम ने जो नैया सम्भाली तुम बिन न ये तर पाती

पा लिया है मैंने सबकुछ तेरे द्वारे गुरुदेवा ||३ ||

मैं भटका था जग में तुम से अब लगन लगा ली

मैं भटका था जग में तुम से अब लगन लगा ली

मेरे बगियाँ के गुरुवर तुम ही रक्षक तुम ही माली

मेरे बगियाँ के गुरुवर तुम ही रक्षक तुम ही माली

बाँध लिया है मैंने मन को तेरे द्वारे गुरुदेवा ||४ ||

तुमसे ही सब महका तुम चंदन हो मै पानी

तुमसे ही सब महका तुम चंदन हो मै पानी

जो निगुरा भटके जगमे गुरुमहिमा न जानी

बाँध लिया है मैंने मन को तेरे द्वारे गुरुदेवा || ५ || 

मेरे मन में ज्योत जगा दो



मेरे मन में ज्योत जगा दो

मेरे मन में ज्योत जगा दो गुरुवर ज्योत जगा दो

मेरे मन में ज्योत जगा दो गुरुवर ज्योत जगा दो

ज्योत जगा दो ज्योत जगा दो

मेरे मन में ज्योत जगा दो गुरुवर ज्योत जगा दो

जो भी तेरी शरण में आया पलट गई जीवन की काया

तू दाता मेरा खुशियाँ बांटे चुभते ना कष्ट के काटे

मुझ सच की राह दिखा दो गुरुवर ओ गुरुवर राह दिखा दो

राह दिखा दो राह दिखा दो

मेरे मन में ज्योत जगा दो गुरुवर ज्योत जगा दो

आर्चन वंदन तुमको हमारे तुमही सबकी आँखों के तारे

पर हित सेवा का मार्ग दिखाते हमको जग में जीना सिखाते

हमे आत्म शांति दिला दो गुरुवर शांति दिला दो

तेरे नाम से पाप कटे है बाधाएँ मार्ग से हटे है

दे दो ऐसा आशीष हमको श्रद्धा से बस ध्यायें तुमको

मेरी प्रेमा भक्ति बढ़ा दो गुरुवर भक्ति बढ़ा दो

भक्ति बढ़ा दो भक्ति बढ़ा दो

मेरी प्रेमा भक्ति बढ़ा दो गुरुवर भक्ति बढ़ा दो 

कितनी महिमा गाऊं

कितनी महिमा गाऊं

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार ||धृ||

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार

एक है जिव्हा मेरी गुण है बेशुमान

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार ||१||

तेरी कृपा से मेरे गुरु मन को मिला करार

जाग उठा मेरा तनमन में गुरुवर तेरा प्यार

तू दाता है सबका गुरुवर तू ही तारणहार

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार ||२||

तेरा भक्त ना हिम्मत हारे दुःख हो चाहे हजार

तुमसे ही खुशियाँ सारी तुमसे ही है बहार

तेरी कृपा से मिटते गुरुवर सबके दोष विकार

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार ||३||



तुम ही साहिल मेरे में डूब रहा है मझधार

तुम बिन कौन सहारा तुम सबके तारणहार

हम भी आये शरण में गुरुवर हम को लगा दो पार

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार ||४ ||

आयेगा जब मौत का झटका सब देंगे बिसार

बिखरेंगे रिश्ते और नाते तुटेंगे सब काल

तुमही एक हमारे गुरुवर मिट जाये संसार

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार ||५ ||

तेरी भक्ति में है शक्ति तेरा ज्ञान है सार

तेरे नाम की कुंजी से फूले है मुक्ति द्वार

हम भक्तों के तुम को गुरुवर वंदन बारंबार

कितनी महिमा गाऊं कितना करूँ सत्कार

महिमा अपरंपार तेरी महिमा अपरंपार ||६|| 

कितना सुंदर कितना प्यारा



कितना सुंदर कितना प्यारा

देते है नित्य नवीन ख़ुशी है हमको ये हर बार

देते है नित्य नवीन ख़ुशी है हमको ये हर बार

जग पे नहीं भरोसा हमको इन्ही पे है ऐतबार

जग पे नहीं भरोसा हमको इन्ही पे है ऐतबार

कभी ये द्वार न छुटे कभी ये विश्वास न टूटे

गहरा है भवसागर और तुमही तारणहार

गहरा है भवसागर और तुमही तारणहार

तूफानों में कष्ट और तुमही ठेवन तारणहार

तेरे हाथों सौंप दी हमने जीवन की पतवार

कितना सुंदर कितना प्यारा है गुरु का दरबार

हम करते है इस द्वारे को वंदन बारंबार

कभी ये विश्वास न टूटे कभी ये द्वार न छुटे

तेरी भक्ति से बनते है बिगड़े कारज सारे

तुम ही मुकुट मणि हो तुम ही सरताज हमारे

तेरी शरण में आकर हमने पाया सच्चा साथ

कितना सुंदर कितना प्यारा है गुरु का दरबार

हम करते है इस द्वारे को वंदन बारंबार

तेरे श्रीचरणों बहती है प्रेम की धारा

उनमे सब तीर्थ ये तीर्थराज हमारा

बिना तुम्हारे अपने में भी जीना है बेकार

कितना सुंदर कितना प्यारा है गुरु का दरबार

हम करते है इस द्वारे को वंदन बारंबार

कभी ये द्वार न छुटे कभी ये विश्वास न टूटे