Sant Shri Asharamji Bapu

Sant Shri Asharamji Bapu is a Self-Realized Saint from India, who preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being.

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संत श्री आशारामजी बापू

भारत के संत श्री आशारामजी बापू आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र मे एक सच्चिदानंद इश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते है

रामा रे रामा रे रामा रे-2

रामा रामा रामा रामा रा....मा , जय बापू आसारामा
सबका करते हित मेरे रामा
भव पार करावें मेरे रामा, जय बापू आसारामा
बापू रूप में आये मेरे रामा
मुक्ति करावे मेरे रामा, जय बापू - - -

सबके दिलों में बैठे मेरे रामा
भक्ति करावे मेरे रामा, जय बापू - - -
सबकी झोली भरें मेरे रामा
खुशियाँ लुटावे मेरे रामा, जय बापू - - -
सबके हरते दुख मेरे रामा
शांति दिलावे मेरे रामा, जय बापू - - -
भक्ति बढ़ावे मेरे रामा, जय बापू - - -
ज्ञान बढ़ावे मेरे रामा, जय बापू - - -

जग से हैं निराले मेरे रामा
सत्य दिखावें मेरे रामा, जय बापू - - -

भक्तों के रखवारे मेरे रामा
निर्भय बनावे मेरे रामा, जय बापू - - -

जीवन का सच्चा सार मेरे रामा
विवेक जगावें मेरे रामा, जय बापू - - -

घट घट में बसे हैं मेरे रामा
माया हटावें मेरे रामा, जय बापू - - -

बुद्धि शुद्धि के दाता मेरे रामा
सदगुण बढ़ावें मेरे रामा, जय बापू - - -

सबको शांति देते मेरे रामा
भ्रांति मिटावे मेरे रामा, जय बापू - - -

चरणों में इनके है हमको रहना
दूर न होवे मेरे रामा, जय बापू - - -

दृष्टी से अपनी करूणा है करते
प्रेम लुटावे मेरे रामा, जय बापू - - -

इनकी चरण रज कष्ट निवारे
देवे आनंद मेरे रामा, जय बापू - - -

इनके जैसा कोई नहीं है
जग से निराले मेरे रामा, जय बापू - - -

भवसागर में डोले है नैय्या
सबके खिवैय्या मेरे रामा, जय बापू - - -

आत्म ज्ञान का बोध कराते
अहम मिटावे मेरे रामा, जय बापू - - -

ब्रम्हनिष्ठ वेदांत के ज्ञानी
ज्योति पुंज मेरे रामा, जय बापू - - -

जिसने भी दिल से इनको पुकारा
दौड़े चले आये मेरे रामा, जय बापू - - -

तुमको न भूलें ओ सदगुरुदेवा

तुमको न भूलें ओ सदगुरुदेवा
तेरा ही सहारा है मेरे गुरुदेवा

गर फिसलूँ मैं तो तुम ही बचाना
भक्ति की ज्योत मेरे दिल में जगाना
तेरे रंग में रंग जाए जीवन ये सारा

मकसद है मेरा तुमको ही पाना
तुझे छोड़कर अब कहीं नहीं जाना
छूटे न साथ कभी भी तुम्हारा

दुनियाँ के रिश्तों से हुआ बेगाना
तुम ही प्रभु मेरे सपनों में आना
तुमसा नही है और कोई प्यारा

प्रीती को मेरी तुम ही बढ़ाना
तुम ही प्रभु हो मेरा आशियाना
तुम ही हो मेरी किश्तों का किनारा

ध्यान मेरा तुम भक्ति में लगाना
दोषों को मेरे अब तुम ही भगाना
कितनों को भव से तुमने है तारा

दुनिया ने मुझको तो चाहा गिराना
मार्ग सही तुम मुझको दिखाना
तुम बिन नही है कोई भी हमारा

मोह निशा से प्रभु मुझको जगाना
माया के परदे को तुम ही हटाना
सारे जग का तू है पालन हारा

तेरे दर पे मिलता सच्चा खजाना
रहे बाकी न फिर कुछ पाना
सबसे प्यारा है गुरु तेरा ही द्वारा



 

कोई जाने या ना जाने

कोई जाने या ना जाने मैं तो जान गया
भक्तों के भगवान को पहचान गया

तुम ही बने राम कृष्ण और तुलसी संत कबीर
गुरु रूप ही ईश रूप है कह गये दास कबीर

तुम भक्तों के ईश महेश हो आये लेके शरीर
सुन्दर रूप और चमकता भाल है सरल सहज समधीर

ज्ञान गंगा मुख से बहती भक्त बहाए नीर
दर्शन से मिले शांति तृप्ति साधक हो जाए धीर

तेरी महिमा बड़ी निराली कोई जान न पाया
जिसने तुमको प्रेम से ध्याया वो ही सब कुछ पाया

तेरे द्वार जो भी आया अमोलक धन वो पाया
मिटे दोष और दुख दारिद्रय सुख शांति वो पाया

गुरु ही बाँटे सब भक्तन को साचि हरि हर प्रीत
गुरु भक्ति ही दे जाएगी सफल जीवन की रीत

तुम हो मेरा जीवन

तुम हो मेरा जीवन मेरी पूजा सदगुरुजी
तुम से मेरा नाता एक साँचा सदगुरुजी
जग रूठ जाए तो भी गम नहीं गम नहीं
तु नही रूठना साँई बस तू ही बस तू ही
तू मेरा मैं तेरा – 2 बस यही साथ है
तुम हो मेरा जीवन - - -

सेवा पूजा तेरी मैं करूँ मैं करूँ
प्रीत में तेरी पागल बन फिरूं बन फिरूं
तू मिला सब मिला दिल मेरा यूँ खिला
बस यही चाह है - - -

साँझ सवेरे दर्शन मैं करूँ मैं करूँ
पल पल याद में तेरी मैं डूबूँ मैं डूबूँ
हाथ ये थाम ले, बस तेरा मान ले
बस यही आस है - - -

तू ही है रब मेरा सच कहूँ सच कहूँ
सूरत प्यारी देख के खुश रहूँ खूश रहूँ
साँस में नाम हो तेरा ही नाम हो
बस यही बात है - - -
तुम हो मेरा जीवन - - -