पूजन कर लो मात-पिता का
शुभदिन आया हैं
पूजन कर लो मात-पिता का
आज करेंगे मात-पिता का पूजन और वंदन
मात-पिता-गुरू के चरणों में अर्पण ये जीवन
जिसने दिया हैं जीवन हमको
उनको हमारा नमन, अर्पण ये जीवन
ममता की मूरत हैं माँ, पिता रूप में हैं महादेवा
दोनों रूप में है गुरुदेवा, करूणा सागर गुरुदेवा
मात-पिता-गुरू सच्चे तीरथ, पुण्यों का करूँ अर्जन
उनकी कृपा से विघ्न कटे सब, करते हैं वो रक्षण
बड़े उपकार उनके, चुका ना हम हैं सकते
प्रेम की वर्षा करते, सदा शुभमंगल करते
वो तो हैं धूप सहते हमें छाँव में रखते
आज करेंगे मात-पिता का पूजन और वंदन
ममता की मूरत हैं माँ, पिता रूप में हैं महादेवा
दोनों रूप में है गुरुदेवा, करूणा सागर गुरुदेवा
स्वर्ण सुशोभित आसन पर मैं मात-पिता को बिठाऊँ
परम् सुगन्धित केसर चंदन से उनको तिलक लगाऊँ
करूँ मैं उनका अर्चन, सभी देवों का दर्शन
उनकी पूजा करने से सभी का हो मन पावन
उनकी मुस्कान से ही सभी का होता मंगल
आज करेंगे मात-पिता का पूजन और वंदन
ममता की मूरत हैं माँ, पिता रूप में हैं महादेवा
दोनों रूप में है गुरुदेवा, करूणा सागर गुरुदेवा
पूजन कर लो मात-पिता का शुभदिन आया हैं
शुभदिन आया हैं
मात-पिता-गुरू सेवा से ही जनम सुहाया हैं
जनम सुहाया हैं
पूजन कर लो मात-पिता का
गुरूवर की महिमा हैं भारी जाने दुनिया सारी
लाखों जनम से भटके हैं हम, गुरू ने बिगड़ी सँवारी
गुरू ही ब्रह्मा विष्णु, गुरू तो हैं शिवशंकर
उनकी कृपा दृष्टि से मिटे सब रोग भयंकर
उनकी मीठी निगाहें स्नेह बरसाए हर पल
आज करेंगे मात-पिता का पूजन और वंदन
मात-पिता-गुरू के चरणों में अर्पण ये जीवन
जिसने दिया हैं जीवन हमको
उनको हमारा नमन, अर्पण ये जीवन
ममता की मूरत हैं माँ, पिता रूप में हैं महादेवा
दोनों रूप में है गुरुदेवा, करूणा सागर गुरुदेवा
पूजन कर लो मात-पिता का शुभदिन आया हैं
शुभदिन आया हैं
मात-पिता-गुरू सेवा से ही जनम सुहाया हैं
जनम सुहाया हैं
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